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मां होती है शिशु की प्रथम शिक्षिका
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गाजीपुर। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर रायगंज में दो दिवसीय शिविर का समापन रविवार को किया गया। इस अवसर पर मातृ सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि चंद्रकला उपाध्याय ने कहा कि शिशु की प्रथम शिक्षिका मां है और परिवार उसकी प्रथम पाठशाला। परिवार से जो परिवेश जन्म से बालक को मिलता है उसी अनुरूप विद्यालय में उसका उन्मुखी विकास होता है। विशिष्ट अतिथि शोभा राय ने कहा कि बालक के विकास में हम माताओं का बड़ा योगदान है। जिस प्रकार कुम्हार कच्ची मिट्टी को सही रूप देकर सुंदर घड़े का निर्माण करता है, उसी प्रकार मां अपने बच्चों के अनुशासन एवं चरित्र निर्माण करती है। अमित देव ने कहा कि जन्म लेने के बाद एक शिशु उस पौधे के समान है जिसे धूप, वायु, खाद-पानी की समुचित व्यवस्था चाहिए जिससे उसकी जड़ें मजबूत हो और वह एक विशाल वृक्ष का रूप धारण कर सके। एक शिशु के जीवन में अनुशासन, शिक्षा, संस्कार तथा चरित्र का निर्माण होना आवश्यक है जिससे वह राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका का निर्वहन कर सके। इसके लिए संस्कारित विद्यालय एवं शिक्षक की अहम भूमिका होती है। इस दौरान रामबहादुर सिंह, परमानंद तिवारी, प्यारेमोहन तिवारी, सुमन सिंह विद्यालय के सभी आचार्य सहित सैकड़ों अभिभावक उपस्थित रहे।
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मुख्य अतिथि चंद्रकला उपाध्याय ने कहा कि शिशु की प्रथम शिक्षिका मां है और परिवार उसकी प्रथम पाठशाला। परिवार से जो परिवेश जन्म से बालक को मिलता है उसी अनुरूप विद्यालय में उसका उन्मुखी विकास होता है। विशिष्ट अतिथि शोभा राय ने कहा कि बालक के विकास में हम माताओं का बड़ा योगदान है। जिस प्रकार कुम्हार कच्ची मिट्टी को सही रूप देकर सुंदर घड़े का निर्माण करता है, उसी प्रकार मां अपने बच्चों के अनुशासन एवं चरित्र निर्माण करती है। अमित देव ने कहा कि जन्म लेने के बाद एक शिशु उस पौधे के समान है जिसे धूप, वायु, खाद-पानी की समुचित व्यवस्था चाहिए जिससे उसकी जड़ें मजबूत हो और वह एक विशाल वृक्ष का रूप धारण कर सके। एक शिशु के जीवन में अनुशासन, शिक्षा, संस्कार तथा चरित्र का निर्माण होना आवश्यक है जिससे वह राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका का निर्वहन कर सके। इसके लिए संस्कारित विद्यालय एवं शिक्षक की अहम भूमिका होती है। इस दौरान रामबहादुर सिंह, परमानंद तिवारी, प्यारेमोहन तिवारी, सुमन सिंह विद्यालय के सभी आचार्य सहित सैकड़ों अभिभावक उपस्थित रहे।
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