{"_id":"5bfd7c70bdec22416d12ca33","slug":"131543339120-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरक्षी आवासों के शौचालयों की स्थिति दयनीय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरक्षी आवासों के शौचालयों की स्थिति दयनीय
Updated Tue, 27 Nov 2018 11:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुहवल। सरकार एक तरफ जहां स्वच्छता मिशन के तहत पूरे जनपद तथा गांवों को पूरी तरह से शौचमुक्त करने में जी-जान से जुटी है, वहीं सुहवल थाने के आरक्षी आवासों में रहने वाले पुलिस कर्मी और उनके परिजन शौचालय की दशा दयनीय होने से खुले में शौच करने को विवश हैं। जानकारी होने के बाद भी आला-अधिकारी समस्या का समाधान कराने को लेकर गंभीर नहीं है।
देखा जाए तो आरक्षियों को रहने के लिए थाना परिसर में कुल आठ आवास का निर्माण कराया गया है। शौचालय की सुविधा के लिए आठ शौचालय भी बनवाए गए हैं। इनमें से पांच जर्जर हो चुके हैं। इससे यहां रहने वाले आरक्षियों और उनके परिजन जाने तक से परहेज करते हैं। ऐसे में पुलिस कर्मियों को शौच के लिए परेशान होना पड़ता है। आलम यह है कि सिपाही ही नहीं उनका परिवार भी खुले में शौच करने को विवश है। इस परेशानी की वजह से चार आरक्षियों ने अपने परिवार को यहां से अन्यत्र भेज दिया है। जबकि अन्य लोग परेशानी के बाद भी इन आवास में रह रहे हैं। इस समस्या से आरक्षियों में निराशा है। आरक्षियों ने बताया कि पांच शौचालय पूरी तरह से बदहाल हो गए है, इसलिए हम लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरी में शौच के लिए खुले में जाना पड़ रहा है। उधर जिन लोगों को आरक्षी आवास में स्थित इन शौचालयों की स्थिति की जानकारी है, उनमें यह चर्चा हो रही है कि सरकार स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए तमाम तरह के प्रचार-प्रसार कर लोगों को खुले में शौच न करने की लिए जागरूक कर रही है। वहीं पुलिस के आला-अधिकारी इस दिशा में ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरकार का यह अभियान यहां मुंह चिढ़ा रहा है। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक केके सिंह ने बताया कि शौचालयों की स्थिति बेहतर करने के लिए विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। मंजूर होते ही इसका कायाकल्प करा दिया जाएगा।
विज्ञापन
देखा जाए तो आरक्षियों को रहने के लिए थाना परिसर में कुल आठ आवास का निर्माण कराया गया है। शौचालय की सुविधा के लिए आठ शौचालय भी बनवाए गए हैं। इनमें से पांच जर्जर हो चुके हैं। इससे यहां रहने वाले आरक्षियों और उनके परिजन जाने तक से परहेज करते हैं। ऐसे में पुलिस कर्मियों को शौच के लिए परेशान होना पड़ता है। आलम यह है कि सिपाही ही नहीं उनका परिवार भी खुले में शौच करने को विवश है। इस परेशानी की वजह से चार आरक्षियों ने अपने परिवार को यहां से अन्यत्र भेज दिया है। जबकि अन्य लोग परेशानी के बाद भी इन आवास में रह रहे हैं। इस समस्या से आरक्षियों में निराशा है। आरक्षियों ने बताया कि पांच शौचालय पूरी तरह से बदहाल हो गए है, इसलिए हम लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरी में शौच के लिए खुले में जाना पड़ रहा है। उधर जिन लोगों को आरक्षी आवास में स्थित इन शौचालयों की स्थिति की जानकारी है, उनमें यह चर्चा हो रही है कि सरकार स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए तमाम तरह के प्रचार-प्रसार कर लोगों को खुले में शौच न करने की लिए जागरूक कर रही है। वहीं पुलिस के आला-अधिकारी इस दिशा में ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरकार का यह अभियान यहां मुंह चिढ़ा रहा है। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक केके सिंह ने बताया कि शौचालयों की स्थिति बेहतर करने के लिए विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। मंजूर होते ही इसका कायाकल्प करा दिया जाएगा।
विज्ञापन