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रेल राज्यमंत्री ने विवेकी राय स्मृति अंक का किया लोकार्पण
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:46 PM IST
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गाजीपुर। शहर के स्वामी सहजानंद पीजी कालेज में रविवार को रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने विवेकी राय स्मृति अंक के रुप में साहित्यिक पत्रिका का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि विवेकी राय लिखते तो थे स्वांत: सुखाय के लिए जो आगे चलकर कृति परांत सुखाय हो जाती थी। वह हिंदी के प्रेमचंद्र की अगली कड़ी तो भोजपुरी के कालीदास थे।
प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि डॉ. विवेकी राय ने कलम के जोर से समाज के लिए संघर्ष करते हुए उस ऊंचाई को प्राप्त किया जहां पहुंचना प्राय: सामान्य रचनाकारों के वश की बात नहीं है। वह हमेशा डॉ. शिवप्रसाद सिंह, राही मासूम रजा, कुवेरनाथ की श्रेणी में सबसे सशक्त रचनाकार के रुप मेें याद किए जाएंगे। देश की आबादी के तीन-चौथाई किसान वर्ग को डॉ. राय ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सशक्त पहचान दी। कहा कि बहुत कम साहित्यकार होते हैं जिनको सभी पीढ़ियों में सम्मान प्राप्त होता है। डॉ. विवेकी राय को सभी श्रेणी में लोगों ने सम्मान दिया। डॉ. पीएन सिंह ने कहा कि आने वाले दिनों में गाजीपुर कुवेरनाथ राय और विवेकी राय के रुप में जाना जाएगा। रामअवतार ने कहा कि बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी कलमकार थे। वह नए रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहते थे। डिप्टी कमिश्नर ओम धीरज ने कहा कि विवेकी राय हिंदी और भोजपुरी के सेतु थे। उनके साहित्य की पृष्ठभूमि ग्रामीण होते व्यापक थी। अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एवं ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह ने कहा कि डॉ. विवेकी राय निर्मल मन के ऊंचे साहित्यकार थे। इस मौके पर शेषनाथ राय, डॉ. जया पांडेय, विजयशंकर राय, डॉ. धीरेंद्र राय, डॉ. चंद्रशेखर तिवारी, डॉ. शकुंतला राय, दीनानाथ शास्त्री, अमिताभ अनिल दूबे, डॉ. जयराम राय, दिनेश राय, आनंद अंकुुर, यशवंत, हरिओम, हरिवंश आदि मौजूद रहे। स्वागत पूर्व प्राचार्य एवं पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. मांधाता राय ने किया। संचालन डॉ. गजाधर शर्मा गंगेश ने किया।
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प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि डॉ. विवेकी राय ने कलम के जोर से समाज के लिए संघर्ष करते हुए उस ऊंचाई को प्राप्त किया जहां पहुंचना प्राय: सामान्य रचनाकारों के वश की बात नहीं है। वह हमेशा डॉ. शिवप्रसाद सिंह, राही मासूम रजा, कुवेरनाथ की श्रेणी में सबसे सशक्त रचनाकार के रुप मेें याद किए जाएंगे। देश की आबादी के तीन-चौथाई किसान वर्ग को डॉ. राय ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सशक्त पहचान दी। कहा कि बहुत कम साहित्यकार होते हैं जिनको सभी पीढ़ियों में सम्मान प्राप्त होता है। डॉ. विवेकी राय को सभी श्रेणी में लोगों ने सम्मान दिया। डॉ. पीएन सिंह ने कहा कि आने वाले दिनों में गाजीपुर कुवेरनाथ राय और विवेकी राय के रुप में जाना जाएगा। रामअवतार ने कहा कि बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी कलमकार थे। वह नए रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहते थे। डिप्टी कमिश्नर ओम धीरज ने कहा कि विवेकी राय हिंदी और भोजपुरी के सेतु थे। उनके साहित्य की पृष्ठभूमि ग्रामीण होते व्यापक थी। अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एवं ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह ने कहा कि डॉ. विवेकी राय निर्मल मन के ऊंचे साहित्यकार थे। इस मौके पर शेषनाथ राय, डॉ. जया पांडेय, विजयशंकर राय, डॉ. धीरेंद्र राय, डॉ. चंद्रशेखर तिवारी, डॉ. शकुंतला राय, दीनानाथ शास्त्री, अमिताभ अनिल दूबे, डॉ. जयराम राय, दिनेश राय, आनंद अंकुुर, यशवंत, हरिओम, हरिवंश आदि मौजूद रहे। स्वागत पूर्व प्राचार्य एवं पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. मांधाता राय ने किया। संचालन डॉ. गजाधर शर्मा गंगेश ने किया।
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