{"_id":"5edd1dcd8ebc3e90743f416c","slug":"13-cattle-killed-in-go-shelter-center-ghazipur-news-vns5289169150","type":"story","status":"publish","title_hn":"गो-आश्रय केंद्र में 13 मवेशियों की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गो-आश्रय केंद्र में 13 मवेशियों की मौत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुल्लहपुर। क्षेत्र के करुई गांव में बनाए गए अस्थाई गोवंश आश्रय केंद्र में चारा एवं रखरखाव के अभाव में 13 मवेशियों की मौत हो गई। यहां कुल 40 गोवंश रखे गए थे। इसकी जानकारी के बाद ग्रमीणों में काफी आक्रोश है। शासन-प्रशासन की ओर से खानपान और इलाज की सही व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण पशु असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं।
करीब छह महीना पूर्व शासन के निर्देश पर करुई में बांस और बल्लियों को घेरकर अस्थाई गो आश्रय स्थल बनाया गया था। इसमें जगह-जगह से पकड़कर कुल 40 मवेशी रखे गए थे। इधर एक सप्ताह के अंदर दवा और चारे के अभाव में देखते ही देखते 13 मवेशियों ने दम तोड़ दिया। केंद्र के चरवाहा बुझारत ने बताया कि महीने में बस एक ही बार चोकर आता है। पशुओं के इलाज के लिए डॉक्टर कभी-कभार ही आते हैं। वह भी दवा नहीं देते हैं। 40 मवेशियों में से 13 मवेशियों की मौत हो चुकी है। इस समय 27 मवेशी सिर्फ बचे हुए हैं जो खुले आसमान के नीचे तथा कीचड़ में रह रहे हैं। गांव के नन्हे तिवारी ने बताया कि गो-आश्रय स्थल का विकास कागजों में सिमटकर रह गया है। धरातल पर कुछ भी नहीं है। खंड विकास अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि सारे आरोप निराधार हैं। जब गौ आश्रय स्थल बना था तो पांच मवेशी बीमार थे। भूसा, बाजरा, चोकर पर्याप्त मात्रा में है। जल्द ही वहां टिन शेड का निर्माण कराया जाएगा।
विज्ञापन
करीब छह महीना पूर्व शासन के निर्देश पर करुई में बांस और बल्लियों को घेरकर अस्थाई गो आश्रय स्थल बनाया गया था। इसमें जगह-जगह से पकड़कर कुल 40 मवेशी रखे गए थे। इधर एक सप्ताह के अंदर दवा और चारे के अभाव में देखते ही देखते 13 मवेशियों ने दम तोड़ दिया। केंद्र के चरवाहा बुझारत ने बताया कि महीने में बस एक ही बार चोकर आता है। पशुओं के इलाज के लिए डॉक्टर कभी-कभार ही आते हैं। वह भी दवा नहीं देते हैं। 40 मवेशियों में से 13 मवेशियों की मौत हो चुकी है। इस समय 27 मवेशी सिर्फ बचे हुए हैं जो खुले आसमान के नीचे तथा कीचड़ में रह रहे हैं। गांव के नन्हे तिवारी ने बताया कि गो-आश्रय स्थल का विकास कागजों में सिमटकर रह गया है। धरातल पर कुछ भी नहीं है। खंड विकास अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि सारे आरोप निराधार हैं। जब गौ आश्रय स्थल बना था तो पांच मवेशी बीमार थे। भूसा, बाजरा, चोकर पर्याप्त मात्रा में है। जल्द ही वहां टिन शेड का निर्माण कराया जाएगा।
विज्ञापन