{"_id":"5c7d69acbdec2214676a958d","slug":"121551722924-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, श्याम नारायण तेरा नाम रहेगा’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, श्याम नारायण तेरा नाम रहेगा’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। शहीद श्याम नारायण की शव यात्रा में गाजीपुर की बलिदानी धरती का खूब बखान हुआ। यहां के वीरों का देश के लिए बलिदान को लोग रह रह कर याद करते रहे। शवयात्रा में शामिल हजारों लोग ‘यह धरती बलिदानी है, गाजीपुर का पानी है’ नारा लगा रहे थे। सभी की आंखों में देश भक्ति का जज्बा साफ झलक रहा था। एक तरफ जहां जिले के इस लाल की शहादत पर लोगों को गर्व था, वहीं पाकिस्तान के खिलाफ रोष। लोग जब तक सूरज-चांद रहेगा, श्याम नारायण तेरा नाम रहेगा, हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे के साथ आगे बढ़ रहे थे।
हसनपुर गांव से सुबह करीब साढ़े दस बजे शहीद श्याम नारायण की शव यात्रा निकली। शहीद के शव को कंधा देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। हर कोई अपने कंधे के ऊपर शव को लेकर शहादत को सलाम करने की कोशिश में जुटा रहा। चार किलोमीटर तक कंधे बदलते रहे फिर भी कई लोग कंधा देने से वंचित रहे। शव को फूल-माला से सजे सेना के वाहन पर रखा गया। वाहन के पीछे हजारों लोग पैदल चल रहे थे। इस भीड़ सैकड़ों लोगों के हाथों में तिरंगा था। शामिल लोग वंदे मातरम, हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद, जब तक सूरज-चांद रहेगा, श्याम नारायण तेरा नाम रहेगा आदि नारे लगा रहे थे। इन नारों की गूंज से यात्रा में शामिल लोगों की रगों में देश भक्ति का जज्बा दौड़ रहा था। शायद यह देशभक्ति का जज्बा ही था कि आम लोगों की कौन कहे, खास लोग भी करीब 20 किलोमीटर की पदयात्रा कर श्मशान घाट पर पहुंचे और जिले के अपने वीर सपूत को फक्र के बीच नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
विज्ञापन
हसनपुर गांव से सुबह करीब साढ़े दस बजे शहीद श्याम नारायण की शव यात्रा निकली। शहीद के शव को कंधा देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। हर कोई अपने कंधे के ऊपर शव को लेकर शहादत को सलाम करने की कोशिश में जुटा रहा। चार किलोमीटर तक कंधे बदलते रहे फिर भी कई लोग कंधा देने से वंचित रहे। शव को फूल-माला से सजे सेना के वाहन पर रखा गया। वाहन के पीछे हजारों लोग पैदल चल रहे थे। इस भीड़ सैकड़ों लोगों के हाथों में तिरंगा था। शामिल लोग वंदे मातरम, हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद, जब तक सूरज-चांद रहेगा, श्याम नारायण तेरा नाम रहेगा आदि नारे लगा रहे थे। इन नारों की गूंज से यात्रा में शामिल लोगों की रगों में देश भक्ति का जज्बा दौड़ रहा था। शायद यह देशभक्ति का जज्बा ही था कि आम लोगों की कौन कहे, खास लोग भी करीब 20 किलोमीटर की पदयात्रा कर श्मशान घाट पर पहुंचे और जिले के अपने वीर सपूत को फक्र के बीच नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
विज्ञापन