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गुटबाजी के कारण नपं के चुनाव में भाजपा को मिली हार
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:57 PM IST
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कासिमाबाद। नगर निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद जहूराबाद विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को झटका लगा। इसके लिए कोई और नहीं, बल्कि भाजपा और उसकी गुटबाजी जिम्मेदार रही है। नगर पंचायत बहादुरगंज के चुनाव में जिस तरह से प्रत्याशी के सिंबल के साथ धोखाधड़ी हुई, उसी दिन से पार्टी इस चुनाव में बैकफुट पर चली गई थी। चुनाव बाद इसी को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा है। कुछ लोग भाजपा के सहयोगी पार्टी सुभासपा को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यहां भाजपा और भासपा दोनों ने अपना उम्मीदवार खड़ा ियि था। जिसमें दूसरे नंबर पर भासपा का उम्मीदवार रहा।
नगर निकाय चुनाव में देखा जाए तो भाजपा कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सकी। पार्टी पिछले चुनाव में जीती गई सीटों पर ही अपना कब्जा बरकरार रख सकी। बहादुरगंज में इस बार स्थिति दूसरी थी। यहां भासपा और भाजपा का गठबंधन ढीला पड़ने और दोनों दलों के आमने-सामने लड़ने से दोनों को इसका खामियाजा उठाना पड़ा है। इसके साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई गुटबाजी, प्रत्याशी चयन में विलंब के साथ सिंबल को लेकर अंतिम समय दिन तक जो स्थिति उत्पन्न रही, यही सब हार की वजह बताए जा रहे हैं।
भाजपा का स्पष्ट निर्णय न होने से पहले ही यह बात चर्चा में आ गई थी कि चुनावी नतीजों से भाजपा को करारा झटका लग सकता है और हुआ भी वही। भाजपा यहां पर कई चुनावों से, चाहे वह विधानसभा का चुनाव रहा हो या जिला पंचायत का अथवा पार्टी संगठन का चुनाव, हर बार गुटबाजी के कारण पार्टी की किचकिच होती रही है। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद लोगों को लगा कि विधानसभा चुनाव आने पर जहूराबाद विस क्षेत्र में भाजपा में सुधार हो जाएगा, लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी भाजपा में कोई सुधार नहीं देखने को मिला। गुटबाजी हर जगह देखने को मिली। नगर पंचायत बहादुरगंज का चुनाव गुटबाजी के कारण ही भाजपा हारी है। यही कारण है कि भाजपा का एक खास खेमा टूटकर अंदरखाने दूसरे प्रत्याशी की मदद में लग गया था जिससे भाजपा अपना सम्मान बचाने में विफल रही तथा चुनावी बाजी हार गई। चुनाव बाद इसी बात की चर्चा बहादुरगंज नगर से लेकर पूरे विधानसभा में हो रही है।
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नगर निकाय चुनाव में देखा जाए तो भाजपा कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सकी। पार्टी पिछले चुनाव में जीती गई सीटों पर ही अपना कब्जा बरकरार रख सकी। बहादुरगंज में इस बार स्थिति दूसरी थी। यहां भासपा और भाजपा का गठबंधन ढीला पड़ने और दोनों दलों के आमने-सामने लड़ने से दोनों को इसका खामियाजा उठाना पड़ा है। इसके साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई गुटबाजी, प्रत्याशी चयन में विलंब के साथ सिंबल को लेकर अंतिम समय दिन तक जो स्थिति उत्पन्न रही, यही सब हार की वजह बताए जा रहे हैं।
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भाजपा का स्पष्ट निर्णय न होने से पहले ही यह बात चर्चा में आ गई थी कि चुनावी नतीजों से भाजपा को करारा झटका लग सकता है और हुआ भी वही। भाजपा यहां पर कई चुनावों से, चाहे वह विधानसभा का चुनाव रहा हो या जिला पंचायत का अथवा पार्टी संगठन का चुनाव, हर बार गुटबाजी के कारण पार्टी की किचकिच होती रही है। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद लोगों को लगा कि विधानसभा चुनाव आने पर जहूराबाद विस क्षेत्र में भाजपा में सुधार हो जाएगा, लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी भाजपा में कोई सुधार नहीं देखने को मिला। गुटबाजी हर जगह देखने को मिली। नगर पंचायत बहादुरगंज का चुनाव गुटबाजी के कारण ही भाजपा हारी है। यही कारण है कि भाजपा का एक खास खेमा टूटकर अंदरखाने दूसरे प्रत्याशी की मदद में लग गया था जिससे भाजपा अपना सम्मान बचाने में विफल रही तथा चुनावी बाजी हार गई। चुनाव बाद इसी बात की चर्चा बहादुरगंज नगर से लेकर पूरे विधानसभा में हो रही है।
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