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सबसे पहला टीका अंश को लगा किया अभियान का शुभारंभ
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गाजीपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जापानी इंसेफिलाइटिस (जेई) टीकाकरण अभियान की शुरुआत हाथीखाना स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गिरीशचंद्र मौर्य ने सबसे पहला टीका अंश कुमार गौतम को लगाकर की। इसके बाद टीका लगाए गए सभी बच्चों को उन्होंने प्रमाण पत्र प्रदान किया।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि पिछली बार जेई टीकाकरण अभियान में करीब 82 हजार बच्चों का टीकाकरण का कार्य किया गया था। इस बार करीब 65 हजार बच्चों को टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए पूरे जिले में एक साथ 409 स्थानों पर टीकाकरण सत्र का आयोजन किया जाएगा। यह कार्य लगातार दस दिनों तक चलेगा। उम्मीद है कि इस बार लक्ष्य के सापेक्ष अधिक बच्चों का टीकाकरण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले से अभी तक डेंगू, स्वाइन फ्लू एवं मस्तिष्क ज्वर के एक भी मरीज नहीं पाए गए। जापानी बुखार के लक्षणों एवं बचाव के बारे में बताया कि जापानी इंसेफिलाइटिस फैलाने वाले कुछ संभावित विषाणु जापानी इंसेफिलाइटिस विषाणु, संक्रमण के बाद बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं है लेकिन बीमारी का शुरू में ही पता चल जाने से उपचार जल्द किया जाए तो ऐसी स्थिति में पीड़ित बच्चे या व्यक्ति की जान को बचाया जा सकता है। बताया कि बच्चों में यह रोग ज्यादा देखने को मिलता है, ऐसे में कोशिश करें कि बच्चों को पूरे कपड़े ही पहनाएं ताकि उनका शरीर ढका रहे। इस अवसर पर डॉ. पंकज सुथार, डॉ. प्रभुनाथ, अमित राय, सोना सिंह आदि उपस्थित रहीं।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि पिछली बार जेई टीकाकरण अभियान में करीब 82 हजार बच्चों का टीकाकरण का कार्य किया गया था। इस बार करीब 65 हजार बच्चों को टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए पूरे जिले में एक साथ 409 स्थानों पर टीकाकरण सत्र का आयोजन किया जाएगा। यह कार्य लगातार दस दिनों तक चलेगा। उम्मीद है कि इस बार लक्ष्य के सापेक्ष अधिक बच्चों का टीकाकरण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले से अभी तक डेंगू, स्वाइन फ्लू एवं मस्तिष्क ज्वर के एक भी मरीज नहीं पाए गए। जापानी बुखार के लक्षणों एवं बचाव के बारे में बताया कि जापानी इंसेफिलाइटिस फैलाने वाले कुछ संभावित विषाणु जापानी इंसेफिलाइटिस विषाणु, संक्रमण के बाद बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं है लेकिन बीमारी का शुरू में ही पता चल जाने से उपचार जल्द किया जाए तो ऐसी स्थिति में पीड़ित बच्चे या व्यक्ति की जान को बचाया जा सकता है। बताया कि बच्चों में यह रोग ज्यादा देखने को मिलता है, ऐसे में कोशिश करें कि बच्चों को पूरे कपड़े ही पहनाएं ताकि उनका शरीर ढका रहे। इस अवसर पर डॉ. पंकज सुथार, डॉ. प्रभुनाथ, अमित राय, सोना सिंह आदि उपस्थित रहीं।
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