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सादगी के साथ मनाया गया शहीद दिवस
Updated Sat, 18 Aug 2018 10:16 PM IST
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मुहम्मदाबाद(गाजीपुर)। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते घोषित राष्ट्रीय शोक की वजह से स्थानीय शहीद पार्क में शहीद दिवस शनिवार को सादगी के साथ मनाया गया। शहादत दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में 18 अगस्त 1942 को देश की आजादी के लिए शहादत देने वाले अष्ट शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी के बालाजी ने शहीद स्मृति भवन में शहीदों की याद में बनी झांकी का अनावरण कर किया। उन्होंने डॉ. शिवपूजन राय की मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मुहम्मदाबाद की शहादत बेमिसाल है। ऐसा उदाहरण विश्व में नहीं मिलेगा, जहां एक ही गांव शेरपुर के आठ नवजवानों ने देश को आजाद कराने के लिए एक साथ शहादत दी। शहीदों ने अपनी कुर्बानी देकर देश को आजाद कराया। आज हम सभी लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वर्ग, संप्रदाय, जाति एवं क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर शहीदों के सपनों का देश बनाने के लिए मिलकर प्रयास करें। यही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विधायक अलका राय ने कहा कि देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों ने अपने गांव, जाति एवं वर्ग के लिए शहादत नहीं दी थी बल्कि उनका उद्देश्य जाति, संप्रदाय से ऊपर उठकर देश के विकास के लिए था। आज हम सबकी जिम्मेदारी है कि शहीदों की कुर्बानी को व्यर्थ न जाने दें। उनके सपनों के अनुरूप भारत के निर्माण में अपना अपना योगदान करें। अमर शहीद डॉ. शिवपूजन राय के पुत्र दीनानाथ शास्त्री ने अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मुहम्मदाबाद की क्रांति को टुकड़ों-टुकड़ों में बांट देने से इसका सही मूल्यांकन नहीं हो पाता है। चीनी और रूसी क्रांति से वर्ष 42 की क्रांति काफी बड़ी थी। आधुनिक इतिहास में 1942 की क्रांति का नहीं के बराबर उल्लेख किया गया। श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह, शहीद पुत्र जितेंद्रनाथ घोष, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा, रामधारी सिंह यादव, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ. मारकंडेय सिंह, भाजपा नेता नागेंद्रनाथ पांडेय आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यक्षता शहीद पुत्र सुदर्शन राय एवं संचालन चौधरी दिनेशचंद्र राय तथा अंत में शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष अभयनारायण राय ने आभार प्रकट किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी के बालाजी ने शहीद स्मृति भवन में शहीदों की याद में बनी झांकी का अनावरण कर किया। उन्होंने डॉ. शिवपूजन राय की मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मुहम्मदाबाद की शहादत बेमिसाल है। ऐसा उदाहरण विश्व में नहीं मिलेगा, जहां एक ही गांव शेरपुर के आठ नवजवानों ने देश को आजाद कराने के लिए एक साथ शहादत दी। शहीदों ने अपनी कुर्बानी देकर देश को आजाद कराया। आज हम सभी लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वर्ग, संप्रदाय, जाति एवं क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर शहीदों के सपनों का देश बनाने के लिए मिलकर प्रयास करें। यही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विधायक अलका राय ने कहा कि देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों ने अपने गांव, जाति एवं वर्ग के लिए शहादत नहीं दी थी बल्कि उनका उद्देश्य जाति, संप्रदाय से ऊपर उठकर देश के विकास के लिए था। आज हम सबकी जिम्मेदारी है कि शहीदों की कुर्बानी को व्यर्थ न जाने दें। उनके सपनों के अनुरूप भारत के निर्माण में अपना अपना योगदान करें। अमर शहीद डॉ. शिवपूजन राय के पुत्र दीनानाथ शास्त्री ने अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मुहम्मदाबाद की क्रांति को टुकड़ों-टुकड़ों में बांट देने से इसका सही मूल्यांकन नहीं हो पाता है। चीनी और रूसी क्रांति से वर्ष 42 की क्रांति काफी बड़ी थी। आधुनिक इतिहास में 1942 की क्रांति का नहीं के बराबर उल्लेख किया गया। श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह, शहीद पुत्र जितेंद्रनाथ घोष, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा, रामधारी सिंह यादव, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ. मारकंडेय सिंह, भाजपा नेता नागेंद्रनाथ पांडेय आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यक्षता शहीद पुत्र सुदर्शन राय एवं संचालन चौधरी दिनेशचंद्र राय तथा अंत में शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष अभयनारायण राय ने आभार प्रकट किया।
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