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कैकेयी-मंथरा संवाद सुन लोगों की आंखों से छलके आंसू
Updated Wed, 20 Sep 2017 11:23 PM IST
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गाजीपुर। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से लीला के चौथे दिन मंगलवार की रात हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबूतरा पर कलाकारों द्वारा राम-सीता विवाह, राजतिलक, मंथरा, कैकेयी संवाद सुन दर्शक भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
सीता स्वयंवर के बाद भगवान श्रीराम जैसे की भाई लक्ष्मण के साथ कोहबर में पहुंचते हैं, वैसे ही मां सीता की सखियों द्वारा हंसी-ठिठोली के साथ ही मंगल गीत का क्रम शुरु हो जाता है। गीत शुरु होते ही मौजूद भक्त भी राममय होकर झूमने लगते हैं। लोगों की हंसी पर उस समय विराम लग जाता है और चेहरा उदास हो जाता है, जब कैकेयी और मंथरा का संवाद शुरु होता है और मंथरा दासी के रूप में कैकेयी से भगवान राम को अयोध्या का राज न मिलने को लेकर कैकेयी का कान भरने लगती है। इसके बाद भी कैकेयी मंथरा की एक न सुनती है। राजगद्दी को लेकर दोनों में काफी देर तक वाक्य युद्ध होता है। अंतत: मंथरा अपने मकसद में कामयाब हो जाती है और कैकेयी को भरत को राजगद्दी पर बैठाने के लिए मनाते हुए भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास राजा दशरथ से मांगने के लिए भी राजी करा लेती है। कैकेयी-मंथरा का संवाद सुन वहां मौजूद सैकड़ों दर्शकों की आंखें छलछला गईं। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, उपमंत्री लवकुमार त्रिवेदी, सरदार दर्शन सिंह प्रबंधक, विरेश राम वर्मा, योगेश कुमार वर्मा, राजकुमार शर्मा, अजय कुमार अग्रवाल, अजय कुमार पाठक, बांके तिवारी, सरदार चरनजीत सिंह, मीडिया प्रभारी पंडित कृष्ण बिहारी त्रिवेदी आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
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सीता स्वयंवर के बाद भगवान श्रीराम जैसे की भाई लक्ष्मण के साथ कोहबर में पहुंचते हैं, वैसे ही मां सीता की सखियों द्वारा हंसी-ठिठोली के साथ ही मंगल गीत का क्रम शुरु हो जाता है। गीत शुरु होते ही मौजूद भक्त भी राममय होकर झूमने लगते हैं। लोगों की हंसी पर उस समय विराम लग जाता है और चेहरा उदास हो जाता है, जब कैकेयी और मंथरा का संवाद शुरु होता है और मंथरा दासी के रूप में कैकेयी से भगवान राम को अयोध्या का राज न मिलने को लेकर कैकेयी का कान भरने लगती है। इसके बाद भी कैकेयी मंथरा की एक न सुनती है। राजगद्दी को लेकर दोनों में काफी देर तक वाक्य युद्ध होता है। अंतत: मंथरा अपने मकसद में कामयाब हो जाती है और कैकेयी को भरत को राजगद्दी पर बैठाने के लिए मनाते हुए भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास राजा दशरथ से मांगने के लिए भी राजी करा लेती है। कैकेयी-मंथरा का संवाद सुन वहां मौजूद सैकड़ों दर्शकों की आंखें छलछला गईं। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, उपमंत्री लवकुमार त्रिवेदी, सरदार दर्शन सिंह प्रबंधक, विरेश राम वर्मा, योगेश कुमार वर्मा, राजकुमार शर्मा, अजय कुमार अग्रवाल, अजय कुमार पाठक, बांके तिवारी, सरदार चरनजीत सिंह, मीडिया प्रभारी पंडित कृष्ण बिहारी त्रिवेदी आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
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