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नगर-देहात पुलिस में नहीं रहा तालमेल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jun 2016 01:35 AM IST
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आशुतोष की तलाश में जुटी कानपुर पुलिस को शुरू से ही अपहर्ताओं की लोकेशन कानपुर देहात जिले में होने की बात पता चली थी लेकिन कहीं न कहीं कानपुर शहर व देहात की पुलिस के बीच तालमेल की कमी रही। देहात जनपद की पुलिस का इस्तेमाल केवल सहयोगी की भूमिका के तौर पर किया गया। पुलिस की यही चूक भारी पड़ गई।
पुलिस सूत्रों की मानें तो शुरूआत से ही छानबीन की कमान कानपुर पुलिस ने अपने हाथों में ले रखी थी। किसे-किसे पूछताछ के लिए उठाना है, किस-किस जगह कब छापा मारना है, किन नंबरों को सर्विलांस पर लेना है और कब क्या निर्णय लेना है, यह सीधे कानपुर की पुलिस तय करती रही। यही वजह रही कि इस मामले में कानपुर देहात पुलिस ज्यादा गंभीरता से नहीं जुटी।
एक पुलिस अधिकारी की मानें तो यदि पहले दिन से ही स्थानीय पुलिस को भी विवेचक की भूमिका के तौर पर सक्रिय किया जाता तो शायद पहले ही अपराधियों तक पुलिस पहुंच जाती। इस मुद्दे पर देहात पुलिस अधीक्षक पुष्पांजलि का कहना है कि देहात पुलिस के स्तर से कोई भी चूक नहीं हुई है। पहले दिन से ही जो-जो सहयोग मांगा गया उसे कानपुर की पुलिस को मुहैया कराया गया। मुख्य तौर पर जांच की भूमिका में कानपुर पुलिस ही रही।
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पुलिस सूत्रों की मानें तो शुरूआत से ही छानबीन की कमान कानपुर पुलिस ने अपने हाथों में ले रखी थी। किसे-किसे पूछताछ के लिए उठाना है, किस-किस जगह कब छापा मारना है, किन नंबरों को सर्विलांस पर लेना है और कब क्या निर्णय लेना है, यह सीधे कानपुर की पुलिस तय करती रही। यही वजह रही कि इस मामले में कानपुर देहात पुलिस ज्यादा गंभीरता से नहीं जुटी।
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एक पुलिस अधिकारी की मानें तो यदि पहले दिन से ही स्थानीय पुलिस को भी विवेचक की भूमिका के तौर पर सक्रिय किया जाता तो शायद पहले ही अपराधियों तक पुलिस पहुंच जाती। इस मुद्दे पर देहात पुलिस अधीक्षक पुष्पांजलि का कहना है कि देहात पुलिस के स्तर से कोई भी चूक नहीं हुई है। पहले दिन से ही जो-जो सहयोग मांगा गया उसे कानपुर की पुलिस को मुहैया कराया गया। मुख्य तौर पर जांच की भूमिका में कानपुर पुलिस ही रही।
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