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लुट रहा पानी, गर्त में गई किसानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2015 01:00 AM IST
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नहरों और रजबहों में छोड़े गए पानी की लूट मची हुई है। किसान बीच में ही बांध लगाकर पानी को रोक रहे हैं, जिससे रजबहों के अंतिम छोर तक पानी न पहुंचने से समस्या है।
इतना ही नहीं खेतों में खड़ी गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किसानों के बीच झगड़े भी हो रहे हैं। सहायक अभियंता (नहर) डीके चौधरी ने बताया कि विलंब से नहरों में पानी छोड़े जाने से यह स्थिति हुइ है।
नवंबर के पहले सप्ताह में नहरों को सफाई के नाम पर बंद कर दिया गया था। जिसके चलते किसानों को किराए के संसाधनों से खेतों की पलेवा करने के बाद गेहूं की बुवाई करनी पड़ी।
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नहरों के सहारे सैकड़ों बीघे खेतों की पलेवा अभी तक नहीं हो पाई है। बीते चार-पांच दिन पहले क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा गया है। जिसके चलते किसान बीच में ही पानी लूटने में जुट गए हैं।
क्षेत्र की धरमपुर, भदरस, गिरसी और साढ़ नहरों के अलावा इनसे जुड़े रजबहों और माइनरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है।
तेजपुर, रतनपुर, बरौली, भदरस, भाट, जहांगीराबाद, पसेमा, बौहार, नौरंगा, हुसेना, बरीमहतैन, हथेही, पतरसा, तरगांव और तिलसड़ा माइनरों के किसानों ने बताया कि उनके यहां अभी तक नहर का पानी नहीं पहुंचा है।
किसानों ने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में बोई गई गेहूं की फसल को पहला पानी न मिलने से पौधों में कल्ले नहीं फूट रहे हैं। बताया कि नहरों में आगे के किसान बीच में ही बंधे बांधकर पानी रोक रहे हैं।
अंतिम छोर (टेल रक्बे) तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी डॉ.सरस कुमार तिवारी ने बताया कि गेहूं की फसल की बुवाई के 21 दिन बाद पहली सिंचाई जरूर कर दी जानी चाहिए।
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इतना ही नहीं खेतों में खड़ी गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किसानों के बीच झगड़े भी हो रहे हैं। सहायक अभियंता (नहर) डीके चौधरी ने बताया कि विलंब से नहरों में पानी छोड़े जाने से यह स्थिति हुइ है।
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नवंबर के पहले सप्ताह में नहरों को सफाई के नाम पर बंद कर दिया गया था। जिसके चलते किसानों को किराए के संसाधनों से खेतों की पलेवा करने के बाद गेहूं की बुवाई करनी पड़ी।
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नहरों के सहारे सैकड़ों बीघे खेतों की पलेवा अभी तक नहीं हो पाई है। बीते चार-पांच दिन पहले क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा गया है। जिसके चलते किसान बीच में ही पानी लूटने में जुट गए हैं।
क्षेत्र की धरमपुर, भदरस, गिरसी और साढ़ नहरों के अलावा इनसे जुड़े रजबहों और माइनरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है।
तेजपुर, रतनपुर, बरौली, भदरस, भाट, जहांगीराबाद, पसेमा, बौहार, नौरंगा, हुसेना, बरीमहतैन, हथेही, पतरसा, तरगांव और तिलसड़ा माइनरों के किसानों ने बताया कि उनके यहां अभी तक नहर का पानी नहीं पहुंचा है।
किसानों ने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में बोई गई गेहूं की फसल को पहला पानी न मिलने से पौधों में कल्ले नहीं फूट रहे हैं। बताया कि नहरों में आगे के किसान बीच में ही बंधे बांधकर पानी रोक रहे हैं।
अंतिम छोर (टेल रक्बे) तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी डॉ.सरस कुमार तिवारी ने बताया कि गेहूं की फसल की बुवाई के 21 दिन बाद पहली सिंचाई जरूर कर दी जानी चाहिए।