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नीलगाय से टकराकर बाइक सवार की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2016 01:03 AM IST
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बाइक तेज रफ्तार में होने कारण चालक नियंत्रण खो बैठा और बाइक ट्रक के पीछे जा घुसी।
- फोटो : अमर उजाला
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घाटमपुर कस्बे के मुगल रोड पर नीलगाय से टकराकर एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हेलमेट न लगाए होने से उसके सिर पर चोट आई। सीएचसी से कानपुर रेफर किया गया, जहां कानपुर ले जाने से पहले ही मौत हो गई।
बता दें कि अरांव रोड सिरसागंज ( शिकोहाबाद) निवासी सोनू चंदेल (26) पुत्र रामकुमार की ससुराल बांदा के नदादेव कस्बे में है। शनिवार की सुबह सुसराल से वापस लौट रहा था। मुगल रोड स्थित राहा मोड़ के पास अचानक खेतों से निकलकर भागी एक नीलगाय उसकी बाइक से टकरा गई।
हादसे में सोनू चंदेल बाइक समेत रोड पर गिर गया। बाइक पर हेलमेट तो टांगे था लेकिन, लगाए न होने से सिर पर गंभीर चोट आई। आसपास मौजूद लोगों ने वाहन पर लादकर बेनीसिंह अवस्थी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने कानपुर रेफर कर दिया। कानपुर ले जाने में देरी होने से उसकी सीएचसी में ही मौत हो गई।
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इध्ार, यदि सीएचसी से भेजे गए मेमो में समय पर पुलिस का एक सिपाही अस्पताल पहुंच गया होता तो शायद सोनू चंदेल की जान बच सकती थी। इमरजेंसी कर रहे डाक्टर ने उसकी गंभीर हालत देख 10.30 बजे सीएचसी से कोतवाली को एक मेमो भेजा था जिसमें थाने से एक पुलिसकर्मी भेजने की मांग की गई थी।
डाक्टरों ने बताया कि घायल के साथ कोई तीमारदार नहीं था। जिससे उसे रेफर के बाद हैलट ले जाने वाला कोई नहीं था।बताया कि इलाज मिलने में देरी हो जाने से उसकी सीएचसी में ही मौत हो गई। वहीं, एसओ ने बताया कि घायल को रेफर करने के बाद कानपुर पहुंचाने की जिम्मेदारी अस्पताल की है। यदि कोई तीमारदार नहीं था तो एंबुलेंस के साथ सीएचसी का कोई कर्मचारी भी भेजा जा सकता था।
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बता दें कि अरांव रोड सिरसागंज ( शिकोहाबाद) निवासी सोनू चंदेल (26) पुत्र रामकुमार की ससुराल बांदा के नदादेव कस्बे में है। शनिवार की सुबह सुसराल से वापस लौट रहा था। मुगल रोड स्थित राहा मोड़ के पास अचानक खेतों से निकलकर भागी एक नीलगाय उसकी बाइक से टकरा गई।
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हादसे में सोनू चंदेल बाइक समेत रोड पर गिर गया। बाइक पर हेलमेट तो टांगे था लेकिन, लगाए न होने से सिर पर गंभीर चोट आई। आसपास मौजूद लोगों ने वाहन पर लादकर बेनीसिंह अवस्थी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने कानपुर रेफर कर दिया। कानपुर ले जाने में देरी होने से उसकी सीएचसी में ही मौत हो गई।
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इध्ार, यदि सीएचसी से भेजे गए मेमो में समय पर पुलिस का एक सिपाही अस्पताल पहुंच गया होता तो शायद सोनू चंदेल की जान बच सकती थी। इमरजेंसी कर रहे डाक्टर ने उसकी गंभीर हालत देख 10.30 बजे सीएचसी से कोतवाली को एक मेमो भेजा था जिसमें थाने से एक पुलिसकर्मी भेजने की मांग की गई थी।
डाक्टरों ने बताया कि घायल के साथ कोई तीमारदार नहीं था। जिससे उसे रेफर के बाद हैलट ले जाने वाला कोई नहीं था।बताया कि इलाज मिलने में देरी हो जाने से उसकी सीएचसी में ही मौत हो गई। वहीं, एसओ ने बताया कि घायल को रेफर करने के बाद कानपुर पहुंचाने की जिम्मेदारी अस्पताल की है। यदि कोई तीमारदार नहीं था तो एंबुलेंस के साथ सीएचसी का कोई कर्मचारी भी भेजा जा सकता था।