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सावन में आएं बैजनाथ धाम

Mon, 10 Jul 2017 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 10 Jul 2017 01:00 AM IST
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Baijnath Dham come in sawan
बैजनाथ्‍ा ध्‍ााम - फोटो : अमर उजाला
तहसील क्षेत्र के प्रमुख शिवालयों में कसबा पतारा के बाबा बैजनाथ धाम का विशेष महत्व है। इसका वर्णन परिमाल रासो (आल्हा खंड) की सुमिरिनी में मिलता है। चूना के गारे से बना मंदिर काफी प्राचीन और भव्य है। वहीं, गर्भगृह के भीतर स्थापित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि यह इसी स्थान पर पाताल से निकला था।
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कानपुर-सागर राजमार्ग पर स्थित कसबा और ब्लाक मुख्यालय की बस्ती के भीतर बने बाबा बैजनाथ धाम पहुंचने के लिए ब्लाक मुख्यालय वाली रोड से होकर जाना पड़ता है। मुख्य मार्ग से करीब सात सौ मीटर आगे चलने पर मंदिर मिलता है।
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कसबा निवासी पूर्व प्रधान गयाप्रसाद त्रिवेदी, राजेंद्र पाठक, नरेंद्र प्रताप सिंह, भुवन भास्कर शुक्ला, सत्यदेव त्रिपाठी और रमेश गुप्ता ने बताया कि बाबा बैजनाथ की मूर्ति उनके अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में है। जबकि, मूर्ति कितनी प्राचीन है इसका कोई प्रमाणिक उल्लेख नहीं है। बताया कि मंदिर में रोजाना सुबह-शाम होने वाली आरती और पूजा में कसबे के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। जबकि, शिवरात्रि और सावन के सोमवारों में दूर-दूर से लोग बाबा के दर्शन और पूजन करने को आते हैं।
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बताया कि, बीते पांच वर्ष पहले मंदिर के मुख्य शिखर पर रखा कीमती सोने के कलश चोरी हो गया था। जिसका पुलिस आजतक खुलासा नहीं कर पाई। बताया कि, कलश चोरी की घटना के बाद से मोहल्ले के लोग अब स्वयं मंदिर की निगरानी करते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को बाबा का फूलों से विशेष श्रंगार किया जाता है।

...ऐसे पहुंचें बाबा के मंदिर
बाबा बैजनाथ धाम मंदिर पहुंचने के लिए बस और ट्रेन के अलावा अपने निजी साधन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। बता दें कि, पतारा कानपुर-सागर राजमार्ग और कानपुर-बांदा रेलमार्ग पर स्थित है। यहां का रेलवे स्टेशन काफी पुराना है। जबकि, परिवहन निगम की बसों का भी ठहराव है।


सावन के महीने में शिव के पूजन का विशेष महत्व है। भोले के भक्त अपने आराध्य को बिल्वपत्र, भांग और धतूरा अर्पण करके खुश करते हैं। शिवभक्तों ने बताया कि सावन के महीने में बेलपत्र की जरूरत पड़ती है। बताया कि जंगलों के अंधाधुंध विनाश से अब बेल के पेड़ दूर-दूर तक सरलता से ढूंढ़े नहीं मिलते हैं। इसके बावजूद भी वह किसी तरह बेलपत्र का इंतजाम जरूर करते हैं।


 
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