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550 km chal kar ghar aya dharmandra
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घाटमपुर (कानपुर)। हरियाणा के गुरुग्राम की स्पोर्ट्स कंपनी में काम करने वाला धर्मेंद्र कुशवाहा ने सात दिन में पैदल चलकर 550 किलोमीटर की दूरी तय की। वह शुक्रवार की सुबह अपने घर पहुंच गया।
विकास खंड के बेंहटा बुजुर्ग गांव निवासी धर्मेंद्र कुशवाहा ने बताया कि देश में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित होने के बाद उसकी कंपनी बंद हो गई। साथ ही आसपास के ढाबे भी बंद हो गए। इससे भोजन का संकट पैदा हो गया। उसके पास पैसे भी नहीं थे। ॉ
इधर, वाहनों का संचालन बंद होने पर उसे घर वापस लौटने के लिए भी कोई रास्ता नहीं सूझा, तो वह साथियों के साथ पैदल ही घर के लिए चल दिया। गुरुग्राम से वह 21 मार्च की रात में निकला। 27 मार्च की सुबह अपने गांव आ पाया। उसने बिस्किट खाकर और पानी पीकर सफर काटा। इस दौरान उसके पैरों में सूजन आ गई और छाले पड़ गए।
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घाटमपुर (कानपुर)। तहसील क्षेत्र की यमुना पट्टी (तिरहर) के कई गांवों के 87 लोग एक कंटेनर में बैठकर वापस गांव आ रहे हैं। शुक्रवार की शाम उनका लोकेशन झांसी बताया गया।
क्षेत्र के गड़ाथा, चिटकिनपुर, निमधा और महुवापुरवा गांवों के 87 युवक गुजरात के सूरत में मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन और काम न मिलने से परेशान युवक अपने गांवों को वापस लौट रहे हैं। वाहनों का संचालन बंद होने से वे लोग कंटेनर से आ रहे हैं। परिजनों ने बताया कि सभी ने मिलकर कंटेनर का किराया 1.15 लाख रुपये दिया है।
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विकास खंड के बेंहटा बुजुर्ग गांव निवासी धर्मेंद्र कुशवाहा ने बताया कि देश में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित होने के बाद उसकी कंपनी बंद हो गई। साथ ही आसपास के ढाबे भी बंद हो गए। इससे भोजन का संकट पैदा हो गया। उसके पास पैसे भी नहीं थे। ॉ
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इधर, वाहनों का संचालन बंद होने पर उसे घर वापस लौटने के लिए भी कोई रास्ता नहीं सूझा, तो वह साथियों के साथ पैदल ही घर के लिए चल दिया। गुरुग्राम से वह 21 मार्च की रात में निकला। 27 मार्च की सुबह अपने गांव आ पाया। उसने बिस्किट खाकर और पानी पीकर सफर काटा। इस दौरान उसके पैरों में सूजन आ गई और छाले पड़ गए।
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घाटमपुर (कानपुर)। तहसील क्षेत्र की यमुना पट्टी (तिरहर) के कई गांवों के 87 लोग एक कंटेनर में बैठकर वापस गांव आ रहे हैं। शुक्रवार की शाम उनका लोकेशन झांसी बताया गया।
क्षेत्र के गड़ाथा, चिटकिनपुर, निमधा और महुवापुरवा गांवों के 87 युवक गुजरात के सूरत में मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन और काम न मिलने से परेशान युवक अपने गांवों को वापस लौट रहे हैं। वाहनों का संचालन बंद होने से वे लोग कंटेनर से आ रहे हैं। परिजनों ने बताया कि सभी ने मिलकर कंटेनर का किराया 1.15 लाख रुपये दिया है।