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यूपी में गरीबों के लिए बनेंगे 20,000 फ्लैट
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sun, 24 Mar 2013 12:53 AM IST
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आवास विकास परिषद नए वित्तीय वर्ष में प्रदेश भर में गरीबों के लिए 20,000 आवास बनवाएगी।
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इनमें 10,000 परिषद खुद बनाएगी और बाकी निजी बिल्डरों से बनवाएगी जिन्होंने परिषद से ग्रुप हाउसिंग के लिए जमीन ली है। यह सभी मकान बहुमंजिला होंगे।
आवास की मांग और जमीन की उपलब्धता को देखते हुए भूखंड और मकान आवंटित करने की योजना पर फिलहाल रोक जारी है। अभी आवास विकास का पूरा ध्यान सिर्फ अपार्टमेंट बनाने पर है।
आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने शनिवार को बताया कि नए वित्तीय वर्ष में परिषद गरीबों के लिए नई आवासीय योजनाएं शुरू करेगा।
उन निजी बिल्डरों पर भी गरीबों के लिए आवास बनाने का दबाव डाला जाएगा जिन्होंने परिषद से ग्रुप हाउसिंग के लिए जमीन ली है।
परिषद के नियमों के तहत ग्रुप हाउसिंग के लिए जमीन लेने वाले बिल्डर्स को कुल बनने वाले मकानों में से 20 प्रतिशत गरीबों के लिए बनाने होंगे।
कई ऐसे बिल्डर हैं जिन्होंने जमीन लेने के बाद निर्माण नहीं शुरू किया है। इससे गरीबों के मकान का मामला लटका है। ऐसे बिल्डरों के खिलाफ अब सख्ती की जाएगी।
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आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि परिषद जो 10,000 फ्लैट बनाएगी उनमें ईडब्लूएस के 2000, एलआईजी के 2000, एमआईजी व एचआईजी के 3000 और 60 से 90 वर्ग मीटर के 3000 फ्लैट होंगे।
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आवासीय पसंद जानने के लिए होगा सर्वे
तेजी से बढ़ते शहरी करण को देखते हुए आवास विकास परिषद अब प्रदेश के प्रमुख शहरों व उनसे जुड़े करीब तीन दर्जन छोटे शहरों में सर्वे कराने जा रही है। यह शहर कौन होंगे।
यह तय किया जा रहा है। सर्वे के माध्यम से परिषद लोगों की पसंद और जरूरत जानेगी कि वे कैसे आवास चाहते हैं और किस श्रेणी के आवासों की जनता को ज्यादा जरूरत है।
इस कार्य के लिए परिषद एक महीने के अंदर सर्वे करने वाली एजेंसी का चयन कर लेगी। एजेंसी को छह महीने के भीतर सर्वे का काम पूरा करना होगा। इसके आधार पर आने वाले पांच सालों के लिए परिषद अपनी आवासीय योजनाओं का खाका खींचेगी।
आवास आयुक्त ने बताया कि 2003 में राइटस ने सर्वे किया था मगर 2005 के बाद शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। लोगों की जरूरत और पसंद भी बदली है। पहले जहां लोग सिर्फ प्लॉट और मकान को ही प्राथमिकता देते थे वही लोग अब अपार्टमेंट कल्चर को पसंद करने लगे हैं।