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VIDEO: रात के अंधेरे में बिस्तर में घुसा काला नाग, डसते ही खुली नींद, युवक ने दिखाई सूझबूझ; माैत को दे दी माैत

Sat, 22 Aug 2026 08:01 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: Arun Parashar Updated Sat, 22 Aug 2026 08:01 PM IST
सार

सांप से छेड़छाड़ करने या उसे मारने के बजाय दूर से ही युवक ने उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद बिना समय गंवाए दोस्त के साथ तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। करीब 45 मिनट के भीतर ट्रॉमा सेंटर पहुंचने पर चिकित्सकों ने इलाज किया। वीडियो से सांप की प्रजाति (करैत) की पहचान कर सटीक एंटी-स्नेक वेनम दिया।
 

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young man was bitten by a krait snake while in bed in firozabad
रात में सोते में सांप ने युवक को डसा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

फिरोजाबाद की एफएम कॉलोनी में किराए के मकान में शुक्रवार रात पलंग पर सो रहे एटा निवासी एक युवक को जहरीले करैत सांप ने डस लिया। समय रहते नींद खुलने और दोस्त के साथ 45 मिनट के भीतर ट्रॉमा सेंटर पहुंचने की वजह से युवक को समय पर इलाज मिल सका। जिससे उसकी जान बच गई।
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एटा जिले के गांव खेतुपुरा निवासी शिवा एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं और एफएम कॉलोनी में रहते हैं। शुक्रवार रात वह अपने कमरे में पलंग पर सो रहे थे तभी जहरीला करैत सांप उनके बिस्तर में घुस गया और उन्हें डस लिया। डसने का अहसास होते ही शिवा की नींद खुल गई। आंख खुली तो सामने जहरीला सांप देखकर उसके होश उड़ गए। 
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शिवा के साथ रहने वाले दोस्त ने स्थिति की गंभीरता को समझा और सांप से छेड़छाड़ करने या उसे मारने के बजाय दूर से ही उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद बिना समय गंवाए दोस्त शिवा को लेकर तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। करीब 45 मिनट के भीतर ट्रॉमा सेंटर पहुंचने पर वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वरुण गुप्ता ने तुरंत मरीज का उपचार शुरू किया। सांप के वीडियो से उसकी प्रजाति (करैत) की पहचान कर सटीक एंटी-स्नेक वेनम दिया गया। इससे शिवा की हालत में तेजी से सुधार हुआ और वह अब खतरे से बाहर है।

 

सीधे तंत्रिका तंत्र को असर पहुंचाता है जहर
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेश गोयल के अनुसार करैत सांप बेहद जहरीला होता है और इसके डसने पर विष सीधे तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर असर डालता है। ऐसे मामलों में एक-एक मिनट की देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

10 दिन में 17 लोग बने सांप के शिकार, जागरूकता से बची जान
बारिश में बिलों में पानी भरने के कारण सांपों के बाहर निकलने के मामले तेजी से बढ़े हैं। ट्रॉमा सेंटर आंकड़े बताते हैं कि बीते 10 दिनों के भीतर सर्पदंश के 17 मरीज इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। राहत की बात यह रही कि लोग झाड़-फूंक या बायगीर के चक्कर में पड़ने के बजाय सीधे अस्पताल पहुंचे। इन सभी 17 मरीजों की जान बचाई जा सकी।

 

सांप के डसने पर यह करें
मरीज को शांत रखें: घबराहट से दिल की धड़कन बढ़ती है, जिससे जहर शरीर में तेजी से फैलता है।
प्रभावित अंग को स्थिर रखें: जिस अंग में सांप ने काटा है, उसे हिलाने-डुलने न दें।
सुरक्षित दूरी से फोटो और वीडियो लें : यदि संभव हो तो बिना जोखिम उठाए सांप की फोटो या वीडियो ले लें ताकि डॉक्टर को इलाज में आसानी हो।
तत्काल अस्पताल पहुंचे: मरीज को पैदल चलाने के बजाय सीधे किसी वाहन से नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।

 

यह न करें:
झाड़-फूंक न कराएं: तंत्रमंत्र या देसी इलाज में समय बर्बाद करना जानलेवा हो सकता है।
कट न लगाएं: घाव पर ब्लेड से चीरा लगाने या मुंह से जहर चूसने की कोशिश न करें।
कसकर न बांधें: प्रभावित स्थान के ऊपर रस्सी या कपड़ा बहुत कसकर न बांधें।

 

करैत को मानव शरीर की गर्मी और गंध करती है आकर्षित
जिला वन अधिकारी भानेंद्र सिंह ने बताया कि करैत एक ठंडे खून वाला सांप है। रात के समय जब तापमान गिरता है तो करैत गर्मी की तलाश में निकलता है। सोते हुए इंसान का शरीर गर्मी और गंध छोड़ता है जिससे आकर्षित होकर करैत रजाई, गद्दे, चादर या पलंग के अंदर घुस जाता है। करैत दिन के समय पूरी तरह सुस्त रहता है और शांत जगहों पर पड़ा रहता है। यह मुख्य रूप से रात 10 बजे से तड़के 4 बजे के बीच शिकार के लिए निकलता है। करैत का मुख्य भोजन छोटे चूहे, छिपकलियां और अन्य छोटे सांप होते हैं। चूहे अक्सर भोजन की गंध या अनाज की तलाश में घरों और लोगों के बिस्तरों के आसपास पहुंचते हैं, जिनका पीछा करते हुए करैत बिस्तर तक पहुंच जाता है। करैत के दांत बहुत छोटे और सूई जैसे बारीक होते हैं। जब यह सोते हुए इंसान को डसता है, तो इसका अहसास किसी चींटी या मच्छर के काटने जैसा होता है। व्यक्ति को लगता है कि कोई कीड़ा काट गया है और वह बिना ध्यान दिए सोता रहता है। मगर इसका जहर सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। डसने के बाद सूजन या तेज दर्द नहीं होता लेकिन धीरे-धीरे पेट में ऐंठन, पलकों का झुकना, बोलने में दिक्कत और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। नींद में ही जहर फैलने के कारण व्यक्ति को संभलने का मौका नहीं मिलता।


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