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Firozabad News: चुनाव में ईवीएम आई तो थम गई वोटों की बर्बादी
Thu, 04 Apr 2024 12:12 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Thu, 04 Apr 2024 12:12 AM IST
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फिरोजाबाद। भारत निर्वाचन आयोग ने जैसे-जैसे चुनाव प्रणाली को हाईटेक बनाता गया वैसे-वैसे अनेक सुधार होते दिखाई दिए। 2004 के लोकसभा चुनाव ईवीएम के माध्यम से हुआ कराया गया तो फिर मतों के खराब होने की संभावना खत्म हो गई। इससे पहले हुए चुनावों पर नजर डाले तो फिरोजाबाद लोकसभा सीट में सर्वाधिक 1991 के चुनाव में मतपत्र खराब हुए थे। इसमें 15277 मतों को रिजेक्ट किया गया था।समय बदलने के साथ चुनावी प्रणाली में काफी बदलाव होता रहा। भारत निर्वाचन आयोग हर चुनाव में मया प्रयोग करता है। आजादी के बाद के चुनाव की बात करें तो 1962 से लेकर 1999 तक के लोकसभा चुनाव के दौरान मतपत्रों से चुनाव होने के कारण वोट की बर्बादी खूब होती रही। कभी मुहर ठीक नहीं लगने तो कही मुहर की स्याही दूसरे प्रत्याशी के खाने में लग जाने के कारण लोकसभा क्षेत्र में एक दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में मतपत्र खराब होते रहे हैं। मतपत्रों के माध्यम से हुए चुनावों पर यदि नजर डालें तो 1991 के चुनाव में फिरोजाबाद लोकसभा सीट में सर्वाधिक 15277 मतपत्र खराब हुए थे। जबकि सबसे कम 1971 के चुनाव में मात्र 3139 मत खराब हुए थे। हालांकि 1971 के चुनाव मे मतदाताओं ने मतदान के प्रति बेरुखी भी दिखाई धी। इस चुनाव में सबसे कम 31.11 प्रतिशत मतदाताओं ने ही मतदान में हिस्सा लिया था। लगातार खराब होते मतों के कारण ही भारत निर्वाचन आयोग ने आम चुनाव 2004 से ईवीएम के माध्यम से कराए जाने का निर्णय लिया। ईवीएम का प्रयोग होने के बाद से वोटों की बर्बादी का खेल खत्म हो गया है। क्योंकि आयोग ने मतदाताओं को एक विकल्प दिया है कि यदि चुनाव मैदान में खड़े प्रत्याशियों में कोई सही नहीं है तो नोटा का बटन दबा सकते हैं।
ईवीएम पर सवाल भी उठे...
ईवीएम से भले ही वोटों की होने वाली बर्बादी पर अंकुश लगा हो लेकिन राजनैतिक दल एक बार फिर ईवीएम के बजाय मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग करने लगे है। हालांकि विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग ने वीवीपैट का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। ताकि मतदाता को यह पता चल सके कि उसने किस प्रत्याशी को वोट दिया तो उसी को मिला है। मतगणना के दौरान वीवीपैट की पर्ची की रैंडम गिनती भी कराई जाती है।
एक नजर में लोकसभा की स्थिति
वर्ष -पड़े मत विधि मान्य मत -खराब मत
1962 -227824 -215977 -11847
1967 -248869 -236939 -11930
1971 -166702 -163563 -3139
1977 -321138 -315502 -5636
1980 -284771 -279390 -5381
1984 -342816 -336998 -5818
1989 -447164 -432544 -14620
1991 -449710 -434433 -15277
1996 -463468 -457254 -6214
1998 -596945 -589132 -7813
1999 -583195 -573312 -9883
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ईवीएम पर सवाल भी उठे...
ईवीएम से भले ही वोटों की होने वाली बर्बादी पर अंकुश लगा हो लेकिन राजनैतिक दल एक बार फिर ईवीएम के बजाय मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग करने लगे है। हालांकि विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग ने वीवीपैट का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। ताकि मतदाता को यह पता चल सके कि उसने किस प्रत्याशी को वोट दिया तो उसी को मिला है। मतगणना के दौरान वीवीपैट की पर्ची की रैंडम गिनती भी कराई जाती है।
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एक नजर में लोकसभा की स्थिति
वर्ष -पड़े मत विधि मान्य मत -खराब मत
1962 -227824 -215977 -11847
1967 -248869 -236939 -11930
1971 -166702 -163563 -3139
1977 -321138 -315502 -5636
1980 -284771 -279390 -5381
1984 -342816 -336998 -5818
1989 -447164 -432544 -14620
1991 -449710 -434433 -15277
1996 -463468 -457254 -6214
1998 -596945 -589132 -7813
1999 -583195 -573312 -9883
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