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वसंत पंचमी: सरस्वती शिशु मंदिर और संस्कृत विद्यालय परंपरा को रखे हैं जीवंत
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फिरोजाबाद। हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके लिए जनपद के संस्कृत विद्यालयों में सरस्वती पूजन की तैयारियां चल रही हैं। पर्व पर विलुप्त होती जा रही पट्टी पूजन परंपरा को संस्कृत विद्यालय जीवंत रखे हुए हैं। सरस्वती शिशु मंदिर गोशाला और हनुमान संस्कृत विद्यालय में वसंत पंचमी के दिन हवन-यज्ञ होगा। हवन पूजन के बाद ही इस सत्र में पहली बार दोनों विद्यालय खुलेंगे।
-यह कहते हैं लोग
संस्कृत विद्यालयों में सीमित हुए प्रवेश
1940 में हनुमान संस्कृत विद्यालय की नींव रखी गई थी। वसंत पंचमी के दिन प्रत्येक वर्ष हवन-पूजन कर मां सरस्वती की पूजा की जाती है। तैयारी इस बार भी की जा रही है। पूर्व में विद्यालय में प्रवेश कराने के लिए लोग अपने बच्चों को साथ लेकर आते थे। किंतु अब विद्यालयों में नए प्रवेशों की संख्या सीमित हो गई है। संस्कृत विद्यालयों को पूर्व में बहुत मान्यता दी जाती थी। 1993 के बाद से विद्यालय में नई नियुक्ति ही नहीं हुई। -रामप्रकाश शास्त्री, प्रभारी प्रधानाचार्य हनुमान संस्कृत विद्यालय।
शिशु मंदिर में होगा पट्टी पूजन
वसंत पंचमी पर इस बार भी हवन पूजन कर मां सरस्वती की पूजा की जाएगी। मां सरस्वती ज्ञान की देवी हैं, इसलिए लोग अपने बच्चों को पट्टी पूजन कराने के लिए लाते थे। अब दो, चार लोग ही पट्टी पूजन कराने विद्यालय आते हैं। कोरोना काल के बाद विद्यालय खुल गए हैं, किंतु हमने मां सरस्वती के पूजन के बाद ही विद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। -रविंद्र श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर गोशाला।
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काव्य गोष्ठी का होगा आयोजन
प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान की ओर से हर साल वसंत पंचमी पर काव्य गोष्ठी का आयोजन कराया जाता है। इस बार भी वसंत पंचमी पर सरस्वती शिशु मंदिर गोशाला पर काव्य गोष्ठी होगी।
- वसंत पंचमी पर कविता
फिर वसंत ने पलकें अपनी
खोलीं हैं पतझर के बाद।
रात अंधेरी कोरोना की
छंटने वाली है।
घोर निराशा
इस होली पर
घटने वाली है।
कोयल
नव स्वर में बोली है
आज बड़े अंतर के बाद।
फिर वसंत ने
पलकें अपनी
खोलीं हैं पतझर के बाद।
-कृष्ण कुमार ‘कनक’, युवा कवि।
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-यह कहते हैं लोग
संस्कृत विद्यालयों में सीमित हुए प्रवेश
1940 में हनुमान संस्कृत विद्यालय की नींव रखी गई थी। वसंत पंचमी के दिन प्रत्येक वर्ष हवन-पूजन कर मां सरस्वती की पूजा की जाती है। तैयारी इस बार भी की जा रही है। पूर्व में विद्यालय में प्रवेश कराने के लिए लोग अपने बच्चों को साथ लेकर आते थे। किंतु अब विद्यालयों में नए प्रवेशों की संख्या सीमित हो गई है। संस्कृत विद्यालयों को पूर्व में बहुत मान्यता दी जाती थी। 1993 के बाद से विद्यालय में नई नियुक्ति ही नहीं हुई। -रामप्रकाश शास्त्री, प्रभारी प्रधानाचार्य हनुमान संस्कृत विद्यालय।
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शिशु मंदिर में होगा पट्टी पूजन
वसंत पंचमी पर इस बार भी हवन पूजन कर मां सरस्वती की पूजा की जाएगी। मां सरस्वती ज्ञान की देवी हैं, इसलिए लोग अपने बच्चों को पट्टी पूजन कराने के लिए लाते थे। अब दो, चार लोग ही पट्टी पूजन कराने विद्यालय आते हैं। कोरोना काल के बाद विद्यालय खुल गए हैं, किंतु हमने मां सरस्वती के पूजन के बाद ही विद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। -रविंद्र श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर गोशाला।
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काव्य गोष्ठी का होगा आयोजन
प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान की ओर से हर साल वसंत पंचमी पर काव्य गोष्ठी का आयोजन कराया जाता है। इस बार भी वसंत पंचमी पर सरस्वती शिशु मंदिर गोशाला पर काव्य गोष्ठी होगी।
- वसंत पंचमी पर कविता
फिर वसंत ने पलकें अपनी
खोलीं हैं पतझर के बाद।
रात अंधेरी कोरोना की
छंटने वाली है।
घोर निराशा
इस होली पर
घटने वाली है।
कोयल
नव स्वर में बोली है
आज बड़े अंतर के बाद।
फिर वसंत ने
पलकें अपनी
खोलीं हैं पतझर के बाद।
-कृष्ण कुमार ‘कनक’, युवा कवि।