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संपत्ति विवाद में दो की हत्या, एक घायल
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 06 Aug 2015 11:46 PM IST
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संपत्ति पर कब्जेदारी को लेकर कार सवार युवकों ने देर शाम मार्केट में अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक घायल हो गया। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई और बाजार बंद हो गया। सूचना पर एसपी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए और घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़ितों से जानकारी की।
दक्षिण कोतवाली क्षेत्र के गली बोहरान निवासी प्रदीप पुत्र मौजीराम की छारबाग में दुकान एवं कुछ जमीन है। इसे छारबाग निवासी रामू पुत्र रामदीन ने दो वर्ष पूर्व किराए पर लिया था। इसे खाली कराने को लेकर रामू और प्रदीप के बीच विवाद चल रहा है। इसी विवाद को लेकर गुरुवार शाम को प्रदीप अपने भाई और साथियों के साथ कार से यहां पहुंच गए और किराए पर दी गई दुकान को खाली कराने के लिए ताले तोड़ने लगे। रामू ने विरोध किया तो आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। इस पर आरोपियों ने रामू की छत पर चढ़कर फायरिंग कर दी। फायरिंग में ओमकार पुत्र कैलाश चंद्र गुप्ता निवासी चंद्रवार गेट थाना दक्षिण, कुलदीप पुत्र नंदराम निवासी छारबाग और बिहारी नामक युवक को गोली लग गई। तीन लोगों के घायल होते ही आरोपी कार में बैठकर फतेहाबाद की ओर भाग गए। मौके पर एकत्रित लोग घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आए। यहां ओमकार और कुलदीप को चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया, जबकि बिहारी नामक युवक को उपचार के लिए आगरा रेफर कर दिया गया। सूचना पर एसपी पीयूष श्रीवास्तव, एसपी सिटी उदय शंकर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। एसपी पीयूष श्रीवास्तव का कहना है कि गोली लगने से दो लोगों की मौत हुई है, जबकि तीसरे की हालत गंभीर है। छह आरोपियों के नाम प्रकाश में आए है। उनको गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। घटना के पीछे संपत्ति का विवाद बताया गया है।
हमलावरों के हाथ में पुलिस ने थमाई थी दुकान की चाभी
फीरोजाबाद। गुरुवार की शाम छारबाग पर जो हुआ उसके लिए खाकी सीधे तौर पर जिम्मेदार है। मामले का सही समय पर निस्तारण न करना और हमलावरों को चाभी थमा देने ने हत्याकांड की वारदात को शह दी। क्षेत्रीय वाशिंदें पुलिस की करतूत को चीख चीख कर कर रहे हैं लेकिन पुलिस ने चुप्पी साध ली है। अधिकारी जांच और कार्रवाई की बात से आगे कुछ बोलने को तैयारी नहीं हैं। स्थानीय वाशिंदों की मानें तो पुलिस से चाभी लेकर ही दुकान को खुलवाया गया। पुलिस यदि चाभी नहीं देती तो शायद दो बेगुनाहों की हत्या नहीं होती। पीड़ित ने न्याय पाने के लिए थाने से लेकर डीएम तक से शिकायत की थी।
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छारबाग स्थित प्रदीप के मकान में बनी दुकान में चूडी का कारोबार करने वाले विकलांग रामू ने एसपी पीयूष श्रीवास्तव को घटना के बारे में बताते हुए कहा कि साहब पुलिस समय से न्याय देती तो यह घटना नहीं होती। आरोपी प्रदीप संपति खाली कराने को लेकर पिछले 15 दिन से धमकियां दे रहा था। इसकी शिकायत डीएम एवं एसपी को डांक के माध्यम से भेजी थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आठ दिन पूर्व से आरोपी दुकान को ही नहीं खुलने दे रहे थे। तब इसकी शिकायत लाइनपार थानाध्यक्ष पुलिस से की थी। लाइनपार पुलिस ने मामले की जांच रामनगर चौकी प्रभारी को सौंप दी थी। आठ दिन से दुकान की चाभी चौकी पर रखी थी। परंतु गुरुवार को दबंग जब दुकान खुलवाने आए तो उनके हाथ में चाभी थी। दुकान खोलने को उसका विवाद भी हुआ था। हथियारों के साथ आए दबंगों ने दुकान को ही खुलवाने से पूर्व दो छत पर चढ़ गए थे। विवाद होते ही फायरिंग करनी शुरू कर दी थी। इससे साफ जाहिर है कि दबंगों के पास चाभी तो पुलिस के पास से ही पहुंची।
सपाई झंडा लगी गाड़ी में आए थे हमलावर
दो लोगों की हत्या करने वाले हमलावर सपा का झंडा लगी गाड़ी में सवार होकर आए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हथियारों को लहराते हुए दुकान के बाहर खड़े हुए थे। मकान की छत पर खड़े होकर तीन दर्जन से अधिक राउंड फायरिंग की। गाड़ी पर एक स्कूल का नाम एवं छोटू प्रधान भी लिखा था। बताते हैं कि दबंगों को सत्ताधारी नेता का भी संरक्षण प्राप्त है।
राहगीर बने गोली का शिकार
संपत्ति को लेकर रामू और प्रदीप के बीच चल रहे विवाद से ओमकार, कुलदीप और बिहारी का कोई लेना देना नहीं था। ओमप्रकाश नरेश की दुकान से तगादा लेने गया था। जबकि कुलदीप का घर घटनास्थल के समीप ही था। इसलिए विवाद होने पर वह घर से बाहर निकल आया था। वहीं बिहारी मकान मैटेरियल की दुकान पर पल्लेदारी का काम करता है।
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दक्षिण कोतवाली क्षेत्र के गली बोहरान निवासी प्रदीप पुत्र मौजीराम की छारबाग में दुकान एवं कुछ जमीन है। इसे छारबाग निवासी रामू पुत्र रामदीन ने दो वर्ष पूर्व किराए पर लिया था। इसे खाली कराने को लेकर रामू और प्रदीप के बीच विवाद चल रहा है। इसी विवाद को लेकर गुरुवार शाम को प्रदीप अपने भाई और साथियों के साथ कार से यहां पहुंच गए और किराए पर दी गई दुकान को खाली कराने के लिए ताले तोड़ने लगे। रामू ने विरोध किया तो आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। इस पर आरोपियों ने रामू की छत पर चढ़कर फायरिंग कर दी। फायरिंग में ओमकार पुत्र कैलाश चंद्र गुप्ता निवासी चंद्रवार गेट थाना दक्षिण, कुलदीप पुत्र नंदराम निवासी छारबाग और बिहारी नामक युवक को गोली लग गई। तीन लोगों के घायल होते ही आरोपी कार में बैठकर फतेहाबाद की ओर भाग गए। मौके पर एकत्रित लोग घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आए। यहां ओमकार और कुलदीप को चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया, जबकि बिहारी नामक युवक को उपचार के लिए आगरा रेफर कर दिया गया। सूचना पर एसपी पीयूष श्रीवास्तव, एसपी सिटी उदय शंकर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। एसपी पीयूष श्रीवास्तव का कहना है कि गोली लगने से दो लोगों की मौत हुई है, जबकि तीसरे की हालत गंभीर है। छह आरोपियों के नाम प्रकाश में आए है। उनको गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। घटना के पीछे संपत्ति का विवाद बताया गया है।
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हमलावरों के हाथ में पुलिस ने थमाई थी दुकान की चाभी
फीरोजाबाद। गुरुवार की शाम छारबाग पर जो हुआ उसके लिए खाकी सीधे तौर पर जिम्मेदार है। मामले का सही समय पर निस्तारण न करना और हमलावरों को चाभी थमा देने ने हत्याकांड की वारदात को शह दी। क्षेत्रीय वाशिंदें पुलिस की करतूत को चीख चीख कर कर रहे हैं लेकिन पुलिस ने चुप्पी साध ली है। अधिकारी जांच और कार्रवाई की बात से आगे कुछ बोलने को तैयारी नहीं हैं। स्थानीय वाशिंदों की मानें तो पुलिस से चाभी लेकर ही दुकान को खुलवाया गया। पुलिस यदि चाभी नहीं देती तो शायद दो बेगुनाहों की हत्या नहीं होती। पीड़ित ने न्याय पाने के लिए थाने से लेकर डीएम तक से शिकायत की थी।
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छारबाग स्थित प्रदीप के मकान में बनी दुकान में चूडी का कारोबार करने वाले विकलांग रामू ने एसपी पीयूष श्रीवास्तव को घटना के बारे में बताते हुए कहा कि साहब पुलिस समय से न्याय देती तो यह घटना नहीं होती। आरोपी प्रदीप संपति खाली कराने को लेकर पिछले 15 दिन से धमकियां दे रहा था। इसकी शिकायत डीएम एवं एसपी को डांक के माध्यम से भेजी थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आठ दिन पूर्व से आरोपी दुकान को ही नहीं खुलने दे रहे थे। तब इसकी शिकायत लाइनपार थानाध्यक्ष पुलिस से की थी। लाइनपार पुलिस ने मामले की जांच रामनगर चौकी प्रभारी को सौंप दी थी। आठ दिन से दुकान की चाभी चौकी पर रखी थी। परंतु गुरुवार को दबंग जब दुकान खुलवाने आए तो उनके हाथ में चाभी थी। दुकान खोलने को उसका विवाद भी हुआ था। हथियारों के साथ आए दबंगों ने दुकान को ही खुलवाने से पूर्व दो छत पर चढ़ गए थे। विवाद होते ही फायरिंग करनी शुरू कर दी थी। इससे साफ जाहिर है कि दबंगों के पास चाभी तो पुलिस के पास से ही पहुंची।
सपाई झंडा लगी गाड़ी में आए थे हमलावर
दो लोगों की हत्या करने वाले हमलावर सपा का झंडा लगी गाड़ी में सवार होकर आए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हथियारों को लहराते हुए दुकान के बाहर खड़े हुए थे। मकान की छत पर खड़े होकर तीन दर्जन से अधिक राउंड फायरिंग की। गाड़ी पर एक स्कूल का नाम एवं छोटू प्रधान भी लिखा था। बताते हैं कि दबंगों को सत्ताधारी नेता का भी संरक्षण प्राप्त है।
राहगीर बने गोली का शिकार
संपत्ति को लेकर रामू और प्रदीप के बीच चल रहे विवाद से ओमकार, कुलदीप और बिहारी का कोई लेना देना नहीं था। ओमप्रकाश नरेश की दुकान से तगादा लेने गया था। जबकि कुलदीप का घर घटनास्थल के समीप ही था। इसलिए विवाद होने पर वह घर से बाहर निकल आया था। वहीं बिहारी मकान मैटेरियल की दुकान पर पल्लेदारी का काम करता है।