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रामलीला मैदान पर आज जीवंत होगी रामायण
Amar Ujala
Updated Fri, 23 Sep 2016 01:35 AM IST
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रामलीला मैदान पर आज जीवंत होगी रामायण
- फोटो : Amar Ujala
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ऐतिहासिक रामलीला से लोहिया - मुलायम के नाम तो खैराती बेग के दान के किस्से हैं जुड़े
मंच नहीं तालाबनुमा मैदान में मंचन करते हैं कलाकार
पूरे देश से आए दुकानदारों ने सजाई दुकाने, लगे झूले
कांच की नगरी में आज (शुक्रवार) रामलीला का आगाज हो रहा है। रामलीला का अनूठा मंच सज गया है। रोम के लोग जिस तरह सीढ़ियों पर बैठकर ग्लेडेटियर की लड़ाई का आनंद लेते थे यहां के लोग भी राम-रावण संग्राम का कुछ वैसे ही आनंद लेने को तैयार हो रहे हैं। कलाकार तालाबनुमा जमीन पर चारों ओर घूम-घूम कर जब अपने किरदार निभाएंगे तो सीढ़ियों पर बैठे हजारों दर्शक उनमें डूबते नजर जाएंगे। वैभवशाली रामलीला के इतिहास में आयोजन के लिए सेठों की दीवानगी है तो 1984 में राम बारात के दौरान आंधी तूफान की त्रासदी भी है। मुलायम सिंह यादव और राम मनोहर लोहिया के नाम जुड़े है तो खैराती बेग के दान के किस्से भी इसी रामलीला ने गढे़ हैं।
रामलीला महोत्सव का आयोजन 1870-1880 के बीच लाला बद्रीप्रसाद अग्रवाल के गोदाम में किया जाता था। 1880 के बाद इसका मंचन रामलीला मैदान में शुरू हुआ। यहां रामलीला का मंचन स्टेज पर नहीं होता। बनारस की तरह कलाकार मैदान में घूम-घूम कर अपने किरदार का मंचन करते हैं। रामलीला मैदान परिसर में लगी कन्हैयालाल गोयंका की प्रतिमा इस आयोजन में उनकी भूमिका की कहानी आज भी बयां कर रही है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने 1994 में इसका अनावरण किया था। रामलीला की ख्याति सुनकर 1961 व 65 में डा. राम मनोहर लोहिया भी इसे देखने फीरोजाबाद आए थे। फीरोजाबाद की रामलीला को इससे और भी ऊंचाई मिलती है कि जिस मैदान पर इसका आयोजन हो रहा है, वह 52 बीघा जमीन खैराती बेग ने दान दी थी।
सुलोचना सती, ताड़िका वध और राम वनवास का मंचन जब रामलीला स्थित तलैया में नौका डालकर होता है तो रामायणकाल ही जीवंत होता नजर आता है। सन् 1984 तक रामलीला महोत्सव फीरोजाबाद जिले का लक्खी मेला कहलाता था। वर्ष 1993 से 2012 तक रामलीला का आयोजन अध्यक्ष विजेंद्रपाल सिंह यादव के नेतृत्व में हुआ। इसी दरम्यान दो बार तदर्थ समिति द्वारा रामलीला कराई गई। 2013 से श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव समिति द्वारा एमएलसी डा. दिलीप यादव के नेतृत्व में रामलीला का आयोजन कराया जा रहा है। यहां ग्वालियर, मुरैना, भिंड, हाथरस, अलीगढ़, आगरा के लोगों ने दुकानें सजा ली हैं। झूला, तमाशे, खेल खिलौने बिकने को तैयार हैं।
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15 साल से कभी राम बने कभी सीता
रामलीला महोत्सव में दुर्गा नगर निवासी धर्मेंद्र दीक्षित 15 सालों से मुख्य किरदार अदा करते आ रहे हैं। वह कभी भरत कभी श्रीराम - जानकी कह भूमिका निभा रहे हैं। धर्मेंद्र को इस बात का रंज है कि अब रामलीला मैदान पहले की तरह शाम चार बजे तक पूरा नहीं भरता है। गंज मोहल्ला निवासी श्याम कुमार उपाध्याय हनुमान का किरदार 12 साल से निभा रहे हैं। तिलक नगर निवासी कुलदीप शर्मा का कहना है कि उनकी बचपन की इच्छा रामलीला में शामिन होने की थी। यह पिछले साल पूरी हो गई है। वह भरत बने थे।
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मंच नहीं तालाबनुमा मैदान में मंचन करते हैं कलाकार
पूरे देश से आए दुकानदारों ने सजाई दुकाने, लगे झूले
कांच की नगरी में आज (शुक्रवार) रामलीला का आगाज हो रहा है। रामलीला का अनूठा मंच सज गया है। रोम के लोग जिस तरह सीढ़ियों पर बैठकर ग्लेडेटियर की लड़ाई का आनंद लेते थे यहां के लोग भी राम-रावण संग्राम का कुछ वैसे ही आनंद लेने को तैयार हो रहे हैं। कलाकार तालाबनुमा जमीन पर चारों ओर घूम-घूम कर जब अपने किरदार निभाएंगे तो सीढ़ियों पर बैठे हजारों दर्शक उनमें डूबते नजर जाएंगे। वैभवशाली रामलीला के इतिहास में आयोजन के लिए सेठों की दीवानगी है तो 1984 में राम बारात के दौरान आंधी तूफान की त्रासदी भी है। मुलायम सिंह यादव और राम मनोहर लोहिया के नाम जुड़े है तो खैराती बेग के दान के किस्से भी इसी रामलीला ने गढे़ हैं।
रामलीला महोत्सव का आयोजन 1870-1880 के बीच लाला बद्रीप्रसाद अग्रवाल के गोदाम में किया जाता था। 1880 के बाद इसका मंचन रामलीला मैदान में शुरू हुआ। यहां रामलीला का मंचन स्टेज पर नहीं होता। बनारस की तरह कलाकार मैदान में घूम-घूम कर अपने किरदार का मंचन करते हैं। रामलीला मैदान परिसर में लगी कन्हैयालाल गोयंका की प्रतिमा इस आयोजन में उनकी भूमिका की कहानी आज भी बयां कर रही है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने 1994 में इसका अनावरण किया था। रामलीला की ख्याति सुनकर 1961 व 65 में डा. राम मनोहर लोहिया भी इसे देखने फीरोजाबाद आए थे। फीरोजाबाद की रामलीला को इससे और भी ऊंचाई मिलती है कि जिस मैदान पर इसका आयोजन हो रहा है, वह 52 बीघा जमीन खैराती बेग ने दान दी थी।
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सुलोचना सती, ताड़िका वध और राम वनवास का मंचन जब रामलीला स्थित तलैया में नौका डालकर होता है तो रामायणकाल ही जीवंत होता नजर आता है। सन् 1984 तक रामलीला महोत्सव फीरोजाबाद जिले का लक्खी मेला कहलाता था। वर्ष 1993 से 2012 तक रामलीला का आयोजन अध्यक्ष विजेंद्रपाल सिंह यादव के नेतृत्व में हुआ। इसी दरम्यान दो बार तदर्थ समिति द्वारा रामलीला कराई गई। 2013 से श्री सनातन धर्म रामलीला महोत्सव समिति द्वारा एमएलसी डा. दिलीप यादव के नेतृत्व में रामलीला का आयोजन कराया जा रहा है। यहां ग्वालियर, मुरैना, भिंड, हाथरस, अलीगढ़, आगरा के लोगों ने दुकानें सजा ली हैं। झूला, तमाशे, खेल खिलौने बिकने को तैयार हैं।
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15 साल से कभी राम बने कभी सीता
रामलीला महोत्सव में दुर्गा नगर निवासी धर्मेंद्र दीक्षित 15 सालों से मुख्य किरदार अदा करते आ रहे हैं। वह कभी भरत कभी श्रीराम - जानकी कह भूमिका निभा रहे हैं। धर्मेंद्र को इस बात का रंज है कि अब रामलीला मैदान पहले की तरह शाम चार बजे तक पूरा नहीं भरता है। गंज मोहल्ला निवासी श्याम कुमार उपाध्याय हनुमान का किरदार 12 साल से निभा रहे हैं। तिलक नगर निवासी कुलदीप शर्मा का कहना है कि उनकी बचपन की इच्छा रामलीला में शामिन होने की थी। यह पिछले साल पूरी हो गई है। वह भरत बने थे।