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बकरीद पर पर्दे में कैद हुए ‘स्वामी विवेकानंद’
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 25 Sep 2015 11:27 PM IST
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बकरीद की नमाज से पहले प्रशासन ने गांधी पार्क पर चौराहे पर स्थित स्वामी विवेकानंद और पद्मभूषण स्व. दादा बनारसीदास चतुर्वेदी की प्रतिमाओं को कपड़े से ढकवा दिया। इस बेतुकी कार्रवाई की शहर भर में तीखी प्रतिक्रिया में हुई तो नमाज के बाद कपड़ा हटवा दिया गया। मामले में डीएम ने सफाई इंस्पेक्टर काो निलंबित कर दिया है।
बताया जा रहा है कि पूर्व के वर्षों में भी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा नमाजियों के सामने नहीं पड़े, इसके लिए प्रतिमा के सामने दमकल वाहन को खड़ा कर दिया जाता था। इस बार भी प्रतिमा के सामने दमकल वाहन तो खड़ा किया ही गया साथ ही प्रतिमा को सफेद पन्नी और कपड़े से ढक दिया गया। इसके साथ ही स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार और राज्यसभा सदस्य रहे पद्मभूषण स्व. दादा बनारसीदास चतुर्वेदी की प्रतिमा को भी ढक दिया गया। राजनैतिक दलों के कैंपों में पहुंचे लोगों के बीच इसको लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई और प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस परंपरा पर सवाल उठने लगे तो नमाज के बाद कपड़ा हटवा दिया गया। ईदगाह कमेटी के सचिव इसरार अहमद ने इस पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रतिमाओं को ही ढकने की कोई डिमांड नहीं की गई थी। फिर प्रशासन या निगम ने ये निर्णय क्यों लिया, यह उनकी समझ से परे है। इस संबंध में वह जिलाधिकारी से वार्ता करेंगे। भाजपा विधायक मनीष असीजा ने कहा कि शहर में सभी धर्मों एवं संप्रदायों के त्योहार पूरे उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाए जाने की परंपरा है। नगरवासी आपस में मेलजोल के साथ मनाते हैं। प्रशासन को इस तरह की नई शुरुआत नहीं करनी चाहिए, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
टेंट ठेकेदार और सफाई इंस्पेक्टर की गलती के चलते प्रतिमाएं ढक दी गई। उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिले में ऐसी कोई नई परिपाटी नहीं पड़ने दी जाएगी।
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विजय किरन आनंद, जिलाधिकारी
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टेंट ठेकेदार और सफाई इंस्पेक्टर पर फोड़ा ठीकरा
स्वामी विवेकानंद और दादा बनारसी दास की प्रतिमाओं को ढकने पर जब विरोध हुआ तो अधिकारी बगले झांकते नजर आए। शुरु में तो तो निगम के अधिकारी प्रशासन और प्रशासन निगम के इशारे पर उठाया गया कदम बताते रहे। बताते रहे बाद में इसका ठीकरा टेंट ठेकेदार और सफाई इंसपेक्टर पर फोड़ दिया। व्यवस्थाओं को देख रहे सिटी मजिस्ट्रेट रविंद्र सिंह मामले से अनभिज्ञ नजर आए तो डीएम ने कार्रवाई की बात के साथ ही मीडिया पर भी मामले को तूल देने का आरोप लगाया।
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बताया जा रहा है कि पूर्व के वर्षों में भी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा नमाजियों के सामने नहीं पड़े, इसके लिए प्रतिमा के सामने दमकल वाहन को खड़ा कर दिया जाता था। इस बार भी प्रतिमा के सामने दमकल वाहन तो खड़ा किया ही गया साथ ही प्रतिमा को सफेद पन्नी और कपड़े से ढक दिया गया। इसके साथ ही स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार और राज्यसभा सदस्य रहे पद्मभूषण स्व. दादा बनारसीदास चतुर्वेदी की प्रतिमा को भी ढक दिया गया। राजनैतिक दलों के कैंपों में पहुंचे लोगों के बीच इसको लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई और प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस परंपरा पर सवाल उठने लगे तो नमाज के बाद कपड़ा हटवा दिया गया। ईदगाह कमेटी के सचिव इसरार अहमद ने इस पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रतिमाओं को ही ढकने की कोई डिमांड नहीं की गई थी। फिर प्रशासन या निगम ने ये निर्णय क्यों लिया, यह उनकी समझ से परे है। इस संबंध में वह जिलाधिकारी से वार्ता करेंगे। भाजपा विधायक मनीष असीजा ने कहा कि शहर में सभी धर्मों एवं संप्रदायों के त्योहार पूरे उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाए जाने की परंपरा है। नगरवासी आपस में मेलजोल के साथ मनाते हैं। प्रशासन को इस तरह की नई शुरुआत नहीं करनी चाहिए, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
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टेंट ठेकेदार और सफाई इंस्पेक्टर की गलती के चलते प्रतिमाएं ढक दी गई। उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिले में ऐसी कोई नई परिपाटी नहीं पड़ने दी जाएगी।
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विजय किरन आनंद, जिलाधिकारी
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टेंट ठेकेदार और सफाई इंस्पेक्टर पर फोड़ा ठीकरा
स्वामी विवेकानंद और दादा बनारसी दास की प्रतिमाओं को ढकने पर जब विरोध हुआ तो अधिकारी बगले झांकते नजर आए। शुरु में तो तो निगम के अधिकारी प्रशासन और प्रशासन निगम के इशारे पर उठाया गया कदम बताते रहे। बताते रहे बाद में इसका ठीकरा टेंट ठेकेदार और सफाई इंसपेक्टर पर फोड़ दिया। व्यवस्थाओं को देख रहे सिटी मजिस्ट्रेट रविंद्र सिंह मामले से अनभिज्ञ नजर आए तो डीएम ने कार्रवाई की बात के साथ ही मीडिया पर भी मामले को तूल देने का आरोप लगाया।