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हाईकोर्ट का फैसला सुन मायूस हुए शिक्षामित्र
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sat, 12 Sep 2015 11:31 PM IST
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फीरोजाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्धारित योग्यता न होने के कारण शिक्षामित्रों की शिक्षक की नियुक्त करने पर रोक लगा दी है। इससे अब तक हुई नियुक्तियां रद्द होंगी। शनिवार को हाईकोर्ट का फैसला आया तो जनपद में करीब 2031 शिक्षामित्रों एवं उनके परिवारों की चिंता बढ़ गईं।
बगैर टीईटी पास शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पदों पर समायोजित करने के सरकार के निर्णय के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर शनिवार को हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया। सुबह से शिक्षामित्रों की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुईं थीं। फैसला जब टीवी चैनलों पर देखा तो वह मायूस हो गए। जनपद में पहले समायोजन में करीब 734 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बने हैं। वहीं, दूसरे चरण में 939 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के नियुक्ति पत्र थमाए जाने हैं। तीसरे चरण के करीब 358 शिक्षामित्र सहायक शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे थे। अब सभी सपना टूटने जैसा मानते दिखे।
बिलख पड़े समायोजित हुए शिक्षामित्र
फैसला आने के बाद शिक्षामित्र बिलख पड़े। अधिकांश के माथे पर चिंता की लकीरें थीं। उन्हें भविष्य की भी चिंता सता रही थी।
सोशल मीडिया पर भी उमड़ा शिक्षामित्रों का दुख
सोशल मीडिया पर बने शिक्षकों के ग्रुपों में भी इस फैसले पर दुख दिख रहा था। शुरुआत में लोग इसे अफवाह समझ रहे थे। लेकिन चैनलों पर यह खबर प्रसारित हुई तो बहुत आहत हुए।
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विवेक कहते हैं कि मायावती की सरकार में कुछ अध्यापक बने हैं, जो बीटीसी थे। बीजेपी की सरकार में बीएड को विशिष्ट बीटीसी करा दिया। वो प्राइमरी में कैसे आ गए। हमारे लिए सरकार को नियम बदलने का हक क्यों नहीं हैं।
अफरोज खानम कहती हैं कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूरा परिवार बुरी तरह आहत है। सहायक अध्यापक बनने पर जो खुशी मिली थी, वो चूर हो गई है। ये फैसला बेरोजगार करने जैसा है।
मंजुला का कहना है कि इस फैसले से सारे अरमान चूर हो गए। काफी लंबे संघर्ष करने के बाद लगा कि अब सफलता मिली है। लेकिन हाईकोर्ट ने यह फैसला देकर सपनों को चूर कर दिया।
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बगैर टीईटी पास शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पदों पर समायोजित करने के सरकार के निर्णय के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर शनिवार को हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया। सुबह से शिक्षामित्रों की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुईं थीं। फैसला जब टीवी चैनलों पर देखा तो वह मायूस हो गए। जनपद में पहले समायोजन में करीब 734 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बने हैं। वहीं, दूसरे चरण में 939 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के नियुक्ति पत्र थमाए जाने हैं। तीसरे चरण के करीब 358 शिक्षामित्र सहायक शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे थे। अब सभी सपना टूटने जैसा मानते दिखे।
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बिलख पड़े समायोजित हुए शिक्षामित्र
फैसला आने के बाद शिक्षामित्र बिलख पड़े। अधिकांश के माथे पर चिंता की लकीरें थीं। उन्हें भविष्य की भी चिंता सता रही थी।
सोशल मीडिया पर भी उमड़ा शिक्षामित्रों का दुख
सोशल मीडिया पर बने शिक्षकों के ग्रुपों में भी इस फैसले पर दुख दिख रहा था। शुरुआत में लोग इसे अफवाह समझ रहे थे। लेकिन चैनलों पर यह खबर प्रसारित हुई तो बहुत आहत हुए।
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विवेक कहते हैं कि मायावती की सरकार में कुछ अध्यापक बने हैं, जो बीटीसी थे। बीजेपी की सरकार में बीएड को विशिष्ट बीटीसी करा दिया। वो प्राइमरी में कैसे आ गए। हमारे लिए सरकार को नियम बदलने का हक क्यों नहीं हैं।
अफरोज खानम कहती हैं कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूरा परिवार बुरी तरह आहत है। सहायक अध्यापक बनने पर जो खुशी मिली थी, वो चूर हो गई है। ये फैसला बेरोजगार करने जैसा है।
मंजुला का कहना है कि इस फैसले से सारे अरमान चूर हो गए। काफी लंबे संघर्ष करने के बाद लगा कि अब सफलता मिली है। लेकिन हाईकोर्ट ने यह फैसला देकर सपनों को चूर कर दिया।