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किसानों की सीएम से नहीं हुई मन की बात
ब्यूरो अमर उजाला, फीरोजाबाद
Updated Wed, 06 May 2015 11:48 PM IST
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अन्नदाता उत्साहित थे, खुशी थी कि सीएम से सीधे बात करेंगे। सवालों के साथ पहुंचे भी लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मन की बात नहीं हो सकी। सीएम ने योजनाओं का बखान किया और किसान सुनते रहे। समय के साथ उम्मीद खत्म हुई तो वह मायूस होकर लौट गए। जबकि दैवी आपदा में जिले के किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है।
सीएम अखिलेश यादव किसानों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रूबरू होंगे इसकी तैयारी कई दिनों से की गई थी। डीएम विजय किरन आनंद के निर्देश पर एसडीएम, कृषि से जुड़े विभागों से किसानों को बुलाने की जिम्मेदारी दी गई। बुधवार को सुबह दस बजे से पूर्व सभी तैयारी कर ली गई। डीएम विजय किरन आनंद, सीडीओ सुजीत कुमार, डीडी कृषिप्रसार डीपी सिंह, डीओ अखिलेश पांडेय, डीएचओ बलजीत सिंह व अन्य अफसर किसानों व वैज्ञानिकों के साथ मौजूद थे। वार्ता की शुरूआत 11.30 बजे हुई। सीएम नहीं मुख्य सचिव आलोक रंजन स्क्रीन पर दिखे। हमीरपुर सहित अन्य जिलों के किसानों से सीधे बात शुरू हुई। सीएम एक बजे स्क्रीन पर दिखे तो उत्साह दिखाई दिया। किसान इंतजार में थे अब मौका मिलेगा लेकिन सीएम का संबोधन चला। फसलों की बर्बादी पर किसानों को ढांढस बंधाया साथ ही कहा सरकार उनके साथ है। बोले यह शुरूआत है रूबरू होने का सिलसिला जारी रहेगा। सीएम जाने के बाद यह कमान मुख्य सचिव ने संभाली। दो बजे बिजली के जाते ही डीएम, सीडीओ भी चले गए।
जिले में हुई बर्बाद फसल
- जिले में 186637 हेक्टेयर में बोई गई थी रबी की फसल।
- 105734 हेक्टेयर फसल बारिश एवं ओलावृष्टि से प्रभावित।
- 86307.149 हेक्टेयर में 33 प्रतिशत से अधिक हुई हानि।
- 80946.88 हेक्टेयर गेहूं की फसल हुई बर्बाद।
- प्रदेश सरकार की 18 हजार प्रति हेक्टेयर, 1500 रुपये कम से कम दर से 159.16 करोड़ की भेजी डिमांड।
- केंद्र सरकार की दर 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर एवं एक हजार रुपये कम से कम 118.80 लाख की जरूरत।
- 1519.82 लाख रुपये जिले को मिली मुआवजा राशि।
जिले में बोई गई रबी की फसल का एरिया
फसल की प्रजाति हेक्टेयर में
गेहूं 97170
जौ 7560
सरसों 12240
चना 902
मटर 395
आलू 65000
------------------------------
तीन दर्जन से अधिक किसानों की हुई मौत
फसलों की बर्बादी के कारण जिले में अभी तक तीन दर्जन से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। आधा दर्जन से अधिक ने आत्महत्या की। जबकि ढाई दर्जन से अधिक की सदमे से मौत हो गई। घर के मुखिया की मौत के बाद परिवारीजनों का हाल बेहाल है। उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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दर्द का घूंट पीकर घरों को लौटे किसान
- मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे किसानों का दर्द सुनेंगे यह सुनकर नगला झाल के निवासी सुरेंद्र सिंह फौजी विकास भवन पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम बिना बुलाए आए हैं, कम से कम अपना दर्द तो मुख्यमंत्री के समक्ष रखें। हमारे यहां न तो सर्वे हुआ न ही मुआवजा मिला। लेखपाल टवेरा में चलते हैं हमारी वो क्या सुनेंगे।
- चुल्हावली टूंडला निवासी भगवान सिंह बिना बुलाए पहुंचे थे बोले कि हमारा आलू कृषि रक्षा इकाई से ली दवाई से खराब हुआ। गुहार डीडी कृषि प्रसार, डीएम से लगाई, कुछ नहीं हुआ। मुख्यमंत्री तक हमारा दर्द पहुंचे इसलिए यहां आया हूं।
- उन्नतिशील किसान विपिन कुलश्रेष्ठ भी मुख्यमंत्री के समक्ष सब्जियों की फसल को नई तकनीक के संबंध में बात करना चाहते थे। लेकिन जिले का नंबर ही नहीं आया तो मायूसी हाथ लगी।
- उन्नतिशील किसान चंद्रपाल कुशवाह ने कहा सीएम से बात करने का आमंत्रण मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन बात नहीं हो पाई तो मायूसी हाथ लगी। भविष्य में कभी मौका लगेगा तो अपनी बात अवश्य रखेंगे।
- रामस्वरूप सिरौला एका ने कहा कि हम तो कुछ सुझाव देना चाहिते थे कि किसान को यदि कुछ नया करने की सीख दी जाए तो कुछ आगे बढ़ सकें। लेकिन वहां जाने का मौका ही नहीं लगा।
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सीएम अखिलेश यादव किसानों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रूबरू होंगे इसकी तैयारी कई दिनों से की गई थी। डीएम विजय किरन आनंद के निर्देश पर एसडीएम, कृषि से जुड़े विभागों से किसानों को बुलाने की जिम्मेदारी दी गई। बुधवार को सुबह दस बजे से पूर्व सभी तैयारी कर ली गई। डीएम विजय किरन आनंद, सीडीओ सुजीत कुमार, डीडी कृषिप्रसार डीपी सिंह, डीओ अखिलेश पांडेय, डीएचओ बलजीत सिंह व अन्य अफसर किसानों व वैज्ञानिकों के साथ मौजूद थे। वार्ता की शुरूआत 11.30 बजे हुई। सीएम नहीं मुख्य सचिव आलोक रंजन स्क्रीन पर दिखे। हमीरपुर सहित अन्य जिलों के किसानों से सीधे बात शुरू हुई। सीएम एक बजे स्क्रीन पर दिखे तो उत्साह दिखाई दिया। किसान इंतजार में थे अब मौका मिलेगा लेकिन सीएम का संबोधन चला। फसलों की बर्बादी पर किसानों को ढांढस बंधाया साथ ही कहा सरकार उनके साथ है। बोले यह शुरूआत है रूबरू होने का सिलसिला जारी रहेगा। सीएम जाने के बाद यह कमान मुख्य सचिव ने संभाली। दो बजे बिजली के जाते ही डीएम, सीडीओ भी चले गए।
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जिले में हुई बर्बाद फसल
- जिले में 186637 हेक्टेयर में बोई गई थी रबी की फसल।
- 105734 हेक्टेयर फसल बारिश एवं ओलावृष्टि से प्रभावित।
- 86307.149 हेक्टेयर में 33 प्रतिशत से अधिक हुई हानि।
- 80946.88 हेक्टेयर गेहूं की फसल हुई बर्बाद।
- प्रदेश सरकार की 18 हजार प्रति हेक्टेयर, 1500 रुपये कम से कम दर से 159.16 करोड़ की भेजी डिमांड।
- केंद्र सरकार की दर 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर एवं एक हजार रुपये कम से कम 118.80 लाख की जरूरत।
- 1519.82 लाख रुपये जिले को मिली मुआवजा राशि।
जिले में बोई गई रबी की फसल का एरिया
फसल की प्रजाति हेक्टेयर में
गेहूं 97170
जौ 7560
सरसों 12240
चना 902
मटर 395
आलू 65000
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तीन दर्जन से अधिक किसानों की हुई मौत
फसलों की बर्बादी के कारण जिले में अभी तक तीन दर्जन से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। आधा दर्जन से अधिक ने आत्महत्या की। जबकि ढाई दर्जन से अधिक की सदमे से मौत हो गई। घर के मुखिया की मौत के बाद परिवारीजनों का हाल बेहाल है। उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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दर्द का घूंट पीकर घरों को लौटे किसान
- मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे किसानों का दर्द सुनेंगे यह सुनकर नगला झाल के निवासी सुरेंद्र सिंह फौजी विकास भवन पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम बिना बुलाए आए हैं, कम से कम अपना दर्द तो मुख्यमंत्री के समक्ष रखें। हमारे यहां न तो सर्वे हुआ न ही मुआवजा मिला। लेखपाल टवेरा में चलते हैं हमारी वो क्या सुनेंगे।
- चुल्हावली टूंडला निवासी भगवान सिंह बिना बुलाए पहुंचे थे बोले कि हमारा आलू कृषि रक्षा इकाई से ली दवाई से खराब हुआ। गुहार डीडी कृषि प्रसार, डीएम से लगाई, कुछ नहीं हुआ। मुख्यमंत्री तक हमारा दर्द पहुंचे इसलिए यहां आया हूं।
- उन्नतिशील किसान विपिन कुलश्रेष्ठ भी मुख्यमंत्री के समक्ष सब्जियों की फसल को नई तकनीक के संबंध में बात करना चाहते थे। लेकिन जिले का नंबर ही नहीं आया तो मायूसी हाथ लगी।
- उन्नतिशील किसान चंद्रपाल कुशवाह ने कहा सीएम से बात करने का आमंत्रण मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन बात नहीं हो पाई तो मायूसी हाथ लगी। भविष्य में कभी मौका लगेगा तो अपनी बात अवश्य रखेंगे।
- रामस्वरूप सिरौला एका ने कहा कि हम तो कुछ सुझाव देना चाहिते थे कि किसान को यदि कुछ नया करने की सीख दी जाए तो कुछ आगे बढ़ सकें। लेकिन वहां जाने का मौका ही नहीं लगा।