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Firozabad News: जिला न्यायालय ने वसीयत से संबंधित याचिका खारिज की
Sat, 25 Oct 2025 06:22 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sat, 25 Oct 2025 06:22 PM IST
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सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने एक वसीयत के प्रमाणीकरण से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के कार्यों में संदेह है और उनकी दलीलें अविश्वसनीय हैं।
याचिकाकर्ता संजीव कुमार और बृज मोहन ने विपक्षी लालजी प्रसाद, सरन कुमार, चंद्र प्रकाश और अन्य के खिलाफ 15 अप्रैल 2009 को याचिका दाखिल की थी। दावा किया था कि स्वर्गीय कामता प्रसाद, जो उनके और विपक्षी लालजी प्रसाद और चंद्रप्रकाश के पिता थे, उन्होंने 14 फरवरी 2005 को एक पंजीकृत वसीयत निष्पादित की थी। इस वसीयत के माध्यम से याचिकाकर्ता (संजीव कुमार और बृज मोहन) और विपक्षी मनीष कुमार और अमित कुमार, जो लालजी प्रसाद के बेटे हैं, उनको विवादित मकान का मालिक और हकदार बनाया गया था। मांग की थी कि वसीयत के अनुसार उन्हें प्रमाणीकरण जारी किया जाए। विपक्षी ने वसीयत को फर्जी और अवैध बताया। दावा किया कि कामता प्रसाद कई वर्षों से कैंसर से पीड़ित थे और 2005 में अपनी मानसिक क्षमता खो चुके थे। इस स्थिति में उनके द्वारा विवादित वसीयत का निष्पादन संभव नहीं था।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुना और पाया कि याचिकाकर्ताओं के कार्यों में कुछ गड़बड़ी है और उनके बयान अविश्वसनीय हैं। इस लिहाज से अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
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फिरोजाबाद। जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने एक वसीयत के प्रमाणीकरण से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के कार्यों में संदेह है और उनकी दलीलें अविश्वसनीय हैं।
याचिकाकर्ता संजीव कुमार और बृज मोहन ने विपक्षी लालजी प्रसाद, सरन कुमार, चंद्र प्रकाश और अन्य के खिलाफ 15 अप्रैल 2009 को याचिका दाखिल की थी। दावा किया था कि स्वर्गीय कामता प्रसाद, जो उनके और विपक्षी लालजी प्रसाद और चंद्रप्रकाश के पिता थे, उन्होंने 14 फरवरी 2005 को एक पंजीकृत वसीयत निष्पादित की थी। इस वसीयत के माध्यम से याचिकाकर्ता (संजीव कुमार और बृज मोहन) और विपक्षी मनीष कुमार और अमित कुमार, जो लालजी प्रसाद के बेटे हैं, उनको विवादित मकान का मालिक और हकदार बनाया गया था। मांग की थी कि वसीयत के अनुसार उन्हें प्रमाणीकरण जारी किया जाए। विपक्षी ने वसीयत को फर्जी और अवैध बताया। दावा किया कि कामता प्रसाद कई वर्षों से कैंसर से पीड़ित थे और 2005 में अपनी मानसिक क्षमता खो चुके थे। इस स्थिति में उनके द्वारा विवादित वसीयत का निष्पादन संभव नहीं था।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुना और पाया कि याचिकाकर्ताओं के कार्यों में कुछ गड़बड़ी है और उनके बयान अविश्वसनीय हैं। इस लिहाज से अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
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