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आवेदन कांच इकाई का, मौके पर चल रही गैराज
अमर उजाला ब्यूूराे, फीराेजाबाद
Updated Sun, 01 Jan 2017 11:31 PM IST
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फैक्ट्री
- फोटो : self
दो वर्ष से लंबित चल रही 43 इकाइयों की हकीकत जांच के बाद सामने आ गई। उद्यमी की ओर से जिन स्थानों पर कांच इकाइयां स्थापित करने को आवेदन किए थे, वहां भौतिक सत्यापन में गैराज चलते मिले।
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से लंबित 43 इकाइयों का प्रेजेंट स्टेट्स तलब किया है। मंत्रालय को फाइनल रिपोर्ट भेजने के लिए उपायुक्त उद्योग द्वारा सभी 43 इकाइयों का भौतिक सत्यापन कराया गया है। 15 दिन चली जांच व मौका मुआयना कर जो फाइनल रिपोर्ट तैयार हुई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। उद्योग विभाग द्वारा की गई जांच में तीन स्थानों पर गैराज चलते मिले। 17 आवेदन ऐसे मिले, जिनके पास संबंधित विभागों की एनओसी नहीं थी। दो इकाइयों की एनओसी निरस्त हो चुकी थीं। उद्योग विभाग में पूर्व में तैनात रहे अफसर आखिर किस आधार पर 43 इकाइयों के दिल्ली से लखनऊ तक पैरवरी करते रहे। इन अफसरों ने आवेदन करने वाली इकाइयों का भौतिक सत्यापन भी नहीं कराया गया कि मौके पर इंफ्रास्ट्रक्चर की गैस की पाइप लाइन, भट्ठी बनी है अथवा नहीं या मात्र कागजों पर ही आवेदन किया है। यदि धरातल पर इन इकाइयों की जांच करा ली जाती तो कई इकाइयों के नाम सूची से स्वत: ही हट जाते।
दो साल से लंबित 43 इकाइयों की नए सिरे से कराई गई है। इसमें 43 में 15 इकाइयां ऐसी हैं, जिनकी सारी औपचारिकताएं पूर्ण की गई हैं। शेष के आवेदन निरस्त करते हुए फाइनल रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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वीरेंद्र कुमार
उपायुक्त उद्योग
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पर्यावरण मंत्रालय की ओर से लंबित 43 इकाइयों का प्रेजेंट स्टेट्स तलब किया है। मंत्रालय को फाइनल रिपोर्ट भेजने के लिए उपायुक्त उद्योग द्वारा सभी 43 इकाइयों का भौतिक सत्यापन कराया गया है। 15 दिन चली जांच व मौका मुआयना कर जो फाइनल रिपोर्ट तैयार हुई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। उद्योग विभाग द्वारा की गई जांच में तीन स्थानों पर गैराज चलते मिले। 17 आवेदन ऐसे मिले, जिनके पास संबंधित विभागों की एनओसी नहीं थी। दो इकाइयों की एनओसी निरस्त हो चुकी थीं। उद्योग विभाग में पूर्व में तैनात रहे अफसर आखिर किस आधार पर 43 इकाइयों के दिल्ली से लखनऊ तक पैरवरी करते रहे। इन अफसरों ने आवेदन करने वाली इकाइयों का भौतिक सत्यापन भी नहीं कराया गया कि मौके पर इंफ्रास्ट्रक्चर की गैस की पाइप लाइन, भट्ठी बनी है अथवा नहीं या मात्र कागजों पर ही आवेदन किया है। यदि धरातल पर इन इकाइयों की जांच करा ली जाती तो कई इकाइयों के नाम सूची से स्वत: ही हट जाते।
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दो साल से लंबित 43 इकाइयों की नए सिरे से कराई गई है। इसमें 43 में 15 इकाइयां ऐसी हैं, जिनकी सारी औपचारिकताएं पूर्ण की गई हैं। शेष के आवेदन निरस्त करते हुए फाइनल रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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वीरेंद्र कुमार
उपायुक्त उद्योग