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सुहागनगरी में सुनाई दी सोहम की गंूज
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 15 Dec 2014 11:39 PM IST
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अखिल भारतीय सोहम महामंडल का 36 वां विराट संत सम्मेलन एवं श्रीमद्भागवत सप्ताह, गायत्री महा यज्ञ के शुभारंभ पर भव्य कलशयात्रा निकाली गई। 751 कलशों को धारण करके सौभाग्यवती महिलाएं निकलीं तो समूचा बाजार भक्ति से सराबोर दिखाई दिया। मार्ग में संत महापुरुषों एवं कलशयात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
सोहम पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज के सानिध्य में होने वाले सम्मेलन की कलशयात्रा का शुभारंभ सदर बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर से हुआ। संतों, कलशों की आरती भगवानदास एवं मुनेंद्र कुमार बंसल ने की। विजेंद्र सिंह यादव ने मुख्य डोले की आरती उतारी। बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालु थरकते हुए चल रहे थे। महिलाएं पीत वस्त्र धारण कर कलश उठाए थीं। कलश यात्रा में आगे धर्म ध्वजा के साथ ऊंट घोड़ों के साथ नगाड़े वादक चल रहे थे। गायत्री महायज्ञ के यज्ञपति विपिन शर्मा, मंजू शर्मा कथा के परीक्षित यजमान नरेंद्र शर्मा व चंद्रकांता शर्मा श्रीमद्भागवत को सिर पर धारण किए थे। समारोह की अध्यक्षता स्वामी विवेकानंद जी महाराज के उत्तराधिकारी स्वामी सत्यानंद महाराज ने की। कलशयात्रा छोटा चौराहा, घंटाघर, सदर बाजार होते हुए रामलीला प्रांगण में बने पंडाल में समाप्त हुई। पंडित रामगोपाल शास्त्री ने भागवत का पूजन कराकर धुंधकारी के चरित्र का वर्णन किया। चंद्रप्रकाश शर्मा, द्विजेंद्रमोहन शर्मा, संजीव मित्तल, दिनेश लहरी, दुर्गाप्रसाद गोयल, श्याम सिंह यादव, उमाकांत पचौरी, पीके झिंदल, राजनारायण गुप्ता, संजय अग्रवल, जीके शर्मा थे।
सत्संग मनुष्य को चरित्रवान बनाता है: विवेकानंद
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। रामलीला प्रांगण में कलशयात्रा के समापन पर सोहम पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज के साथ संजीव मित्तल व हरवंश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सम्मेलन का उद्घाटन महा मंडलेश्वर डा.स्वामी शिव चैतन्य महाराज ने किया। स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा सत्संग ऐसा विद्यालय है इसमें प्रवेश करने पर व्यक्ति का सबसे पहला लक्ष्य सदाचारी और निराभिमानी होना चाहिए। सत्संग मनुष्य को ज्ञानी, सेवक, धर्मात्मा, चरित्रवान बनाता है। महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद, स्वामी अभिरामदास, स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी सत्यानंद, स्वामी प्रीतमदास, स्वामी रामशरणदास, स्वामी नारायण नंददास, स्वामी महानंद, स्वामी निगमानंद, स्वामी आनंद स्वरूप, स्वामी अनतानंद, स्वामी सत्यस्वरूपा नंद शामिल थे।
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सोहम पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज के सानिध्य में होने वाले सम्मेलन की कलशयात्रा का शुभारंभ सदर बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर से हुआ। संतों, कलशों की आरती भगवानदास एवं मुनेंद्र कुमार बंसल ने की। विजेंद्र सिंह यादव ने मुख्य डोले की आरती उतारी। बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालु थरकते हुए चल रहे थे। महिलाएं पीत वस्त्र धारण कर कलश उठाए थीं। कलश यात्रा में आगे धर्म ध्वजा के साथ ऊंट घोड़ों के साथ नगाड़े वादक चल रहे थे। गायत्री महायज्ञ के यज्ञपति विपिन शर्मा, मंजू शर्मा कथा के परीक्षित यजमान नरेंद्र शर्मा व चंद्रकांता शर्मा श्रीमद्भागवत को सिर पर धारण किए थे। समारोह की अध्यक्षता स्वामी विवेकानंद जी महाराज के उत्तराधिकारी स्वामी सत्यानंद महाराज ने की। कलशयात्रा छोटा चौराहा, घंटाघर, सदर बाजार होते हुए रामलीला प्रांगण में बने पंडाल में समाप्त हुई। पंडित रामगोपाल शास्त्री ने भागवत का पूजन कराकर धुंधकारी के चरित्र का वर्णन किया। चंद्रप्रकाश शर्मा, द्विजेंद्रमोहन शर्मा, संजीव मित्तल, दिनेश लहरी, दुर्गाप्रसाद गोयल, श्याम सिंह यादव, उमाकांत पचौरी, पीके झिंदल, राजनारायण गुप्ता, संजय अग्रवल, जीके शर्मा थे।
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सत्संग मनुष्य को चरित्रवान बनाता है: विवेकानंद
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। रामलीला प्रांगण में कलशयात्रा के समापन पर सोहम पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज के साथ संजीव मित्तल व हरवंश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सम्मेलन का उद्घाटन महा मंडलेश्वर डा.स्वामी शिव चैतन्य महाराज ने किया। स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा सत्संग ऐसा विद्यालय है इसमें प्रवेश करने पर व्यक्ति का सबसे पहला लक्ष्य सदाचारी और निराभिमानी होना चाहिए। सत्संग मनुष्य को ज्ञानी, सेवक, धर्मात्मा, चरित्रवान बनाता है। महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद, स्वामी अभिरामदास, स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी सत्यानंद, स्वामी प्रीतमदास, स्वामी रामशरणदास, स्वामी नारायण नंददास, स्वामी महानंद, स्वामी निगमानंद, स्वामी आनंद स्वरूप, स्वामी अनतानंद, स्वामी सत्यस्वरूपा नंद शामिल थे।
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