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‘धर्म शिक्षा और सदाचार है परम आवश्यक’
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‘धर्म शिक्षा और सदाचार है परम आवश्यक’
फिरोजाबाद। धर्म शिक्षा व सदाचार की आज महती आवश्यकता है। आज समाज को सही दिशा प्राप्त नहीं हो रही है। आज का युवा सबसे अधिक भ्रमित हो रहा है। यह बातें सोमवार को अखिल भारतीय सोह्म महामंडल के सात दिवसीय संत सम्मेलन के समापन पर सोहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि धर्म की ठीक से जानकारी प्राप्त हो सके इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है। आज सद्शिक्षा व सदाचार के अभाव में घर-घर समस्याएं हैं। बच्चे बुजुर्गों के प्रति उदासीन हो रहे हैं। इसी कारण वृद्धाश्रम खुल रहे हैं। खुद के अंदर मातृ देवो भव: पितृ देवो भव: अतिथि देवो भव: की भावनाएं जागृत करें। स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने कहा कि पति की सेवा करना पत्नी का धर्म है, कपट छोड़कर पतियों की सेवा करें। स्वामी अनंतानंद महाराज ने कहा कि सत्संग का मूल उद्देश्य मोक्ष को प्राप्त करना है।
परमानंद महाराज ने कहा कि यदि आप हम में भगवान का आचरण आ जाएगा तो रामराज आ जाएगा।
संत सम्मेलन का संचालन स्वामी नारायणानंद महाराज ने किया। इस दौरान चंद प्रकाश शर्मा, सर्वेश दीक्षित, द्विजेंद्र मोहन शर्मा, उमाकांत पचौरी एडवोकेट, दिनेश लहरी, सम्मन सिंह यादव, शिव नारायण यादव, जगदीश यादव, महेश चंद्र गुप्ता, रामेश्वर दयाल यादव, पंडित हरिओम शर्मा, राधेश्याम यादव, संजय अग्रवाल, लल्ला चौधरी, राकेश प्रधान आदि शामिल रहे।
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फिरोजाबाद। धर्म शिक्षा व सदाचार की आज महती आवश्यकता है। आज समाज को सही दिशा प्राप्त नहीं हो रही है। आज का युवा सबसे अधिक भ्रमित हो रहा है। यह बातें सोमवार को अखिल भारतीय सोह्म महामंडल के सात दिवसीय संत सम्मेलन के समापन पर सोहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि धर्म की ठीक से जानकारी प्राप्त हो सके इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है। आज सद्शिक्षा व सदाचार के अभाव में घर-घर समस्याएं हैं। बच्चे बुजुर्गों के प्रति उदासीन हो रहे हैं। इसी कारण वृद्धाश्रम खुल रहे हैं। खुद के अंदर मातृ देवो भव: पितृ देवो भव: अतिथि देवो भव: की भावनाएं जागृत करें। स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने कहा कि पति की सेवा करना पत्नी का धर्म है, कपट छोड़कर पतियों की सेवा करें। स्वामी अनंतानंद महाराज ने कहा कि सत्संग का मूल उद्देश्य मोक्ष को प्राप्त करना है।
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परमानंद महाराज ने कहा कि यदि आप हम में भगवान का आचरण आ जाएगा तो रामराज आ जाएगा।
संत सम्मेलन का संचालन स्वामी नारायणानंद महाराज ने किया। इस दौरान चंद प्रकाश शर्मा, सर्वेश दीक्षित, द्विजेंद्र मोहन शर्मा, उमाकांत पचौरी एडवोकेट, दिनेश लहरी, सम्मन सिंह यादव, शिव नारायण यादव, जगदीश यादव, महेश चंद्र गुप्ता, रामेश्वर दयाल यादव, पंडित हरिओम शर्मा, राधेश्याम यादव, संजय अग्रवाल, लल्ला चौधरी, राकेश प्रधान आदि शामिल रहे।
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