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लॉकडाउन में भूख : मजदूरों को नहीं मिल रहा काम, कनस्तर में आटा भी हुआ खत्म; कैसे शांत होगी भूख

Tue, 11 May 2021 11:16 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 11 May 2021 11:16 PM IST
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फिरोजाबाद। जैसे-जैसे लॉकडाउन का समय बढ़ता जा रहा है। वैसे-वैसे मजदूरों को बच्चों का पेट भरने के लिए चुनौतियों को सामना करना पड़ रहा है। इन घरों के कनस्तर में रखा जाने वाला आटा खत्म हो गया है। तो दुकानदारों ने भी उधार देने से मना कर दिया है। ऐसे में मजदूर और उनका परिवार समाजसेवियों से मिलने वाली मदद की उम्मीद लगाए हुए है।
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मजदूर काम की तलाश में घरों से निकल तो रहे है, लेकिन उनको रोजगार नहीं मिल रहा। दुकानों के चबूतरे पर तपती दोपहर में बैठे मजदूरों को उम्मीद रहती है कि कोई भूला भटका आ जाए और काम मिल जाए। जिससे शाम का चूल्हा जलने के साथ ही बच्चों के पेट की आग शांत हो सके। यह उन मजदूरों की दांस्ता है, जो बेलदारी करने के साथ ही प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन सौ रुपये प्रतिदिन कमाते है। लेकिन पिछले करीब 15 दिनों से काम न मिलने के कारण इनके सामने अब रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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- चार बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी है। पिछले दस दिनों से काम नहीं मिला। अभी तक आलू की खुदाई और गेंहू की कटाई करके परिवार का गुजारा होता रहा। काम न मिलने के कारण दिक्कत आने लगी है। लॉकडाउन और लंबा चला तो समस्या और विकराल हो जाएगी। अब तो मदद की ही उम्मीद है। -प्रवेश कुमार निवासी हलपुरा।
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- जनवरी माह में पत्नी की मौत हो गई। चार बेटियों की शादी के बाद बेटा ससुराल चला गया। अकेले ही रहते है। मजदूरी करके पेट भर लिया करते थे। अब तो काम भी नहीं मिल रहा। ऐसे में पेट भरने के लिए भी लाले पड़ गए है। आसपास जो लोग रहते है। आसपास के लोगों से भी मदद की उम्मीद नहीं है। -हसमुउद्दीन निवासी बारह बीघा।
- तीन बच्चों के साथ किराए मकान है। काम मिलता रहता था तो किसी तरह की दिक्कत नहीं होती थी। 15 दिन में दो बार काम मिला है। सात से आठ सौ रुपये मिले थे। उससे राशन भरवा लिया। एक दो दिन का राशन बचा है। इस बीच काम नहीं मिला तो दिक्कत खड़ी हो जाएगी। बच्चों का पेट कैसे भरेंगे। यही सोचते रहते है। -रोहित कुमार निवासी रामनगर।

- अभी तक गांव में काम मिल जाता था। तो किसी तरह की दिक्कत नहीं होती थी। काम में भी कोई नहीं है। शहर में भी काम नहीं मिल रहा। दो बच्चों के साथ पत्नी है। लॉकडाउन के कारण कोई और काम भी नहीं मिल पा रहा है। जिससे परिवार का खर्चा चलता रहे। पिछली साल लोगों ने मदद कर दी थी। इस बार मदद करने वाले लोग भी नजर नहीं आ रहे। -अशोक कुमार निवासी हलपुरा।
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