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Firozabad News: नौकरी लेखपाल की और शिक्षक दर्शाकर बनवाया था राशन कार्ड

Wed, 09 Apr 2025 11:40 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Wed, 09 Apr 2025 11:40 PM IST
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Ration card was made by showing the job of Lekhpal and teacher
लेखपाल अशोक यादव का राशन कार्ड, जिसमें शिक्षक दर्ज है।  - फोटो : लेखपाल अशोक यादव का राशन कार्ड, जिसमें शिक्षक दर्ज है।
शिकोहाबाद। लेखपाल अशोक यादव के राशन कार्ड के बनवाने से लेकर नवीनीकरण तक में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। वह लेखपाल की नौकरी करने और कार्ड के नवीनीकरण के दौरान भी रसद एवं खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में शिक्षक ही बने रहे। यह बात हम नहीं, बल्कि लेखपाल का राशन कार्ड में दर्ज विवरण दर्शा रहा है। जिससे वह कार्ड के नवीनीकरण के बाद भी आगामी दो वर्षों तक गरीबों का हक डकारते रहे।
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जेएस यूनिवर्सिटी की राजस्थान में बीपीएड की फर्जी डिग्रियां पकड़े जाने के बाद लगातार एक के बाद एक फर्जीवाड़ों की लंबी फेहरिस्त परत-दर-परत सामने आ रही है। अभी तक जिला प्रशासन की नजर में यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री, भूमि एवं नक्शे को लेकर ही कई सवाल थे। जिनकी जांच की जा रही थी, लेकिन अमर उजाला ने सुकेश बंधु का एपीएल राशन कार्ड के डाटा के आधार पर सस्ती दरों पर मिलने वाले राशन का मामला भी उजागर कर दिया था। हालांकि पूर्ति निरीक्षक कार्यालय शिकोहाबाद में जांच के दौरान सुकेश बंधु के राशन कार्ड का डाटा उपलब्ध नहीं था, लेकिन मुख्यालय पर इसका डाटा होने की संभावना जताई जा रही थी। जिसकी जांच चल रही है। अब लेखपाल के राशन कार्ड पर अगर गौर फरमाया जाए, तो उसमें भी एक और फर्जीवाड़ा उजागर होता नजर आने लगा है। शासन के नियमों के विपरीत जाकर कुलाधिपति डॉ. सुकेश यादव के लेखपाल भाई अशोक यादव ने एपीएल का राशन कार्ड बनवाया था। जिसमें उन्होंने खुद को शिक्षक तथा वार्षिक आय लगभग 2.50 लाख रुपये दर्शाई है। बड़ी बात यह है कि इन दोनों ही राशन कार्डों का नवीनीकरण वर्ष 2011 अगस्त में हुआ है। बावजूद इसके दोनों के ही राशन कार्ड में शिक्षक अंकित रहा। मतलब साफ है कि रसद एवं खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में दोनों ही भाई अपनी न्यूनतम वार्षिक आय दर्शाते हुए सस्ती दरों पर मिलने वाले गरीबों के राशन को डकारते रहे हैं।
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16 वर्ष बाद हुआ नवीनीकरण फिर भी बने रहे शिक्षक

शिकोहाबाद। तहसीलदार शिकोहाबाद कीर्ति चौधरी बताती हैं कि लेखपाल अशोक यादव की नौकरी लगभग वर्ष 1995-96 के आसपास लगी है। तब वह लेखपाल थे। आज भी लेखपाल के पद पर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अशोक यादव की लेखपाल की नौकरी लगने के 16 वर्ष बाद कार्डों का नवीनीकरण हुआ था। बावजूद इसके उन्हें तत्कालीन खाद्य विभाग के अधिकारियों ने अपात्र घोषित नहीं किया था।
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यह था रसद एवं खाद्य विभाग का नियम

शिकोहाबाद। राशन कार्ड बनवाने के लिए वही पात्र घोषित हो सकता था। जिसकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक न हो। इसके अलावा उसके पास कार-ट्रैक्टर, 10 बीघा खेती न हो। बावजूद इसके लेखपाल का राशन कार्ड बनने में वार्षिक आय को 3 लाख रुपये से कम दर्शाने में उस समय के लेखपाल की भूमिका होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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