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Firozabad News: सांस नली में फंसी प्लास्टिक की गुल्ली और चोबा, मासूम की हालत बिगड़ी
Mon, 09 Jun 2025 10:44 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 09 Jun 2025 10:44 PM IST
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बच्चे के ऑपरेशन के बाद चिकित्सक की टीम। संवाद।
फिरोजाबाद। खेल-खेल में एक पांच वर्षीय बालक की सांस नली में बिजली फिटिंग में प्रयोग होने वाला चोबा और प्लास्टिक की गुल्ली फंस गई। इससे बच्चे की सांसें उखड़ने लगीं और हालत गंभीर हो गई। परिजन जब कस्बा के निजी चिकित्सक पर ले गए। बच्चे की सांस फूलता देखकर उन्होंने भी फिरोजाबाद रेफर कर दिया। चिकित्सक ने ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचाई।
मक्खनपुर निवासी नीरज का पांच वर्षीय बेटा रितिक घर में खेल रहा था। इसी दौरान उसने प्लास्टिक की गुल्ली और चोबा मुंह में डाल लिया, जो अचानक उसकी सांस नली में फंस गया। रितिक की सांसें तेज चलने लगीं और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा। परिजन उसे तत्काल कस्बा स्थित निजी चिकित्सकों के पास ले गए, लेकिन जब स्थिति नहीं संभली तो ट्रामा सेंटर लाया गया। परिजन भी समझ सके कि सांस फूलने की वजह क्या है। ट्रॉमा सेंटर में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. भानुप्रताप सिंह ने जांच के बाद एक्स-रे करवाया, जिसमें गले में प्लास्टिक का टुकड़ा और चोबा फंसा पाया गया। जो सांस नली को रोके था। डॉक्टरों की टीम ने करीब आधे घंटे की मेहनत के बाद ऑपरेशन कर दोनों वस्तुओं को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने पर यह मामला गंभीर रूप ले सकता था। फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसे निगरानी में रखा गया है।
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मक्खनपुर निवासी नीरज का पांच वर्षीय बेटा रितिक घर में खेल रहा था। इसी दौरान उसने प्लास्टिक की गुल्ली और चोबा मुंह में डाल लिया, जो अचानक उसकी सांस नली में फंस गया। रितिक की सांसें तेज चलने लगीं और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा। परिजन उसे तत्काल कस्बा स्थित निजी चिकित्सकों के पास ले गए, लेकिन जब स्थिति नहीं संभली तो ट्रामा सेंटर लाया गया। परिजन भी समझ सके कि सांस फूलने की वजह क्या है। ट्रॉमा सेंटर में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. भानुप्रताप सिंह ने जांच के बाद एक्स-रे करवाया, जिसमें गले में प्लास्टिक का टुकड़ा और चोबा फंसा पाया गया। जो सांस नली को रोके था। डॉक्टरों की टीम ने करीब आधे घंटे की मेहनत के बाद ऑपरेशन कर दोनों वस्तुओं को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने पर यह मामला गंभीर रूप ले सकता था। फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसे निगरानी में रखा गया है।
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