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मरीजों को मिला स्ट्रेचर,वार्ड तक जाने को एम्बुलेंस
अमर उजाला
Updated Wed, 19 Oct 2016 12:18 AM IST
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मरीजों को मिली वार्ड तक जाने को एम्बुलेंस
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जिला अस्पताल प्रशासन की आखिर मंगलवार को तंद्रा भंग हो गई। अस्पताल प्रशासन ने जहां तालों में बंद स्ट्रेचर बाहर निकले,वहीं ट्रामा सेंटर में खड़ी रहने वाली एंबुलेंस भी मरीजों को ट्रामा सेंटर से वार्ड तक पहुंचाने का काम करती दिखाई दी। इससे ट्रामा सेंटर (इमरजेंसी) में आने वाले मरीजों के साथ उनके तीमारदारों को काफी राहत मिली।
उल्लेखनीय हो कि आपात कालीन विभाग के ट्रामा सेंटर में ट्रांसफर होने के बाद मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। आपात कालीन विभाग में मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के साथ ही उनको भर्ती कर लेते थे। लेकिन वार्ड में मरीज को भेजने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की जाती थी।
ऐसे में मरीज या तो पैदल ही ट्रामा सेंटर अस्पताल जाते थे या फिर गंभीर स्थिति में तीमारदार उनको गोदी में उठाकर ले जाते थे। इसको लेकर जहां मानवीय संवेदनाएं तार तार होती थी। वहीं तीमारदार के साथ मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को लेकर अमर उजाला ने उजागर किया था। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का ही परिणाम रहा कि डेंगू से पीड़ित रोशनी नामक बालिका की मौत हो गई थी। एक वृद्ध को वार्ड में सिफ्ट करने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली थी।
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इस मामले को नगर विधायक मनीष असीजा ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के समक्ष लखनऊ में रखा था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्थाओं को सुधारने की पहल मंगलवार को की। मंगलवार को हाल यह रहा कि तालों में बंद रहने वाले स्ट्रेचर बाहर निकाल लिए गए और ट्रामा सेंटर में खड़ी एंबुलेंस दिन भी मरीजों को वार्ड तक पहुंचाती दिखाई दी। इसके साथ ही सीएमएस पल-पल की जानकारी फोन कर कर्मचारियों से करते नजर आए। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिए कि एक भी मरीज ट्रामा सेंटर से पैदल अस्पताल नहीं जाना चाहिए। उन्होंने दो तीन मरीजों को एक साथ वार्डों में भेजने की व्यवस्था की। ताकि मरीजों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।
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उल्लेखनीय हो कि आपात कालीन विभाग के ट्रामा सेंटर में ट्रांसफर होने के बाद मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। आपात कालीन विभाग में मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के साथ ही उनको भर्ती कर लेते थे। लेकिन वार्ड में मरीज को भेजने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की जाती थी।
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ऐसे में मरीज या तो पैदल ही ट्रामा सेंटर अस्पताल जाते थे या फिर गंभीर स्थिति में तीमारदार उनको गोदी में उठाकर ले जाते थे। इसको लेकर जहां मानवीय संवेदनाएं तार तार होती थी। वहीं तीमारदार के साथ मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। इस समस्या को लेकर अमर उजाला ने उजागर किया था। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का ही परिणाम रहा कि डेंगू से पीड़ित रोशनी नामक बालिका की मौत हो गई थी। एक वृद्ध को वार्ड में सिफ्ट करने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली थी।
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इस मामले को नगर विधायक मनीष असीजा ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के समक्ष लखनऊ में रखा था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्थाओं को सुधारने की पहल मंगलवार को की। मंगलवार को हाल यह रहा कि तालों में बंद रहने वाले स्ट्रेचर बाहर निकाल लिए गए और ट्रामा सेंटर में खड़ी एंबुलेंस दिन भी मरीजों को वार्ड तक पहुंचाती दिखाई दी। इसके साथ ही सीएमएस पल-पल की जानकारी फोन कर कर्मचारियों से करते नजर आए। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिए कि एक भी मरीज ट्रामा सेंटर से पैदल अस्पताल नहीं जाना चाहिए। उन्होंने दो तीन मरीजों को एक साथ वार्डों में भेजने की व्यवस्था की। ताकि मरीजों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।