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पंचायत चुनाव : आरक्षण सूची जारी होते ही नए दावेदार करने लगे तैयारी
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फिरोजाबाद। पंचायत चुनाव के आरक्षण की अनन्तिम सूची जारी होने के साथ गांव की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शनिवार तक जो चुनाव लड़ने की तैयारी करने में जुटे थे, वह होर्डिंग्स, बैनर एवं पोस्टर उतारते दिखाई दिए। जबकि गांवों में नए प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी। अब चुनाव जीतने के लिए नए ढंग से समीकरण बैठाए जा रहे हैं। कई पंचायतें पहले सामान्य थीं, जो अब अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई हैं।
जिला प्रशासन द्वारा जिले की 564 ग्राम पंचायतों, 7196 ग्राम पंचायत सदस्य, 817 बीडीसी सदस्य एवं नौ ब्लॉक प्रमुख के साथ-साथ 33 जिला पंचायत सदस्य पद का आरक्षण शनिवार को जारी कर दिया। नये आरक्षण में बदलाव हो जाने के कारण गांव की राजनीति ही बदल गई। जो पहले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, वह घर बैठने को मजबूर हो गए। वहीं जो घर बैठे थे, वह चुनाव के मैदान में सक्रिय हो गए हैं। कइयों के जिला पंचायत का वार्ड उनके हिसाब से हो गया तो वहीं जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने वाले पंचायत अनारक्षित हो जाने के कारण प्रधानी का चुनाव लड़ने की प्लानिंग करने में जुट गए हैं। रविवार को इसी तरह का आलम गांवों में देखने को मिला। नारखी धौंकल, खैरगढ़ ग्राम पंचायतों का आरक्षण बदला तो यहां नए दावेदार सक्रिय हो गए। लालऊ, गाजीपुर में इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। वार्ड संख्या 26 एवं 27 अनारक्षित हो जाने के कारण यहां प्रत्याशियों की लिस्ट बढ़ना तय माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रत्याशियों की नजर
हाईकोर्ट में 1995 के आधार पर सरकार को चुनौती देने वाली याचिका के बाद प्रदेश सरकार ने अब 2015 को आधार मानते हुए नया आरक्षण जारी किया है। पुराने आरक्षण को यथावत रखने की कवायद करने वाले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए। इसके कारण नए आरक्षण में चुनाव मैदान से बाहर होने वाले प्रत्याशियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। वह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद दोबारा से पुराना आरक्षण लागू हो जाए और वह फिर से मैदान में दिखाई दें।
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कई उम्मीदवार दिखे हताश
प्रधान बनने का सपना देखने वाले कई प्रत्याशी हताश एवं निराश दिखे। नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरक्षण तय होने के बाद लाखों रुपये खर्च कर दिया। प्रचार करने के साथ-साथ वोटरों को अपने पक्ष में करने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन अरमानों पर पानी तब फिर गया, जब आरक्षण ही बदल गया।
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जिला प्रशासन द्वारा जिले की 564 ग्राम पंचायतों, 7196 ग्राम पंचायत सदस्य, 817 बीडीसी सदस्य एवं नौ ब्लॉक प्रमुख के साथ-साथ 33 जिला पंचायत सदस्य पद का आरक्षण शनिवार को जारी कर दिया। नये आरक्षण में बदलाव हो जाने के कारण गांव की राजनीति ही बदल गई। जो पहले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, वह घर बैठने को मजबूर हो गए। वहीं जो घर बैठे थे, वह चुनाव के मैदान में सक्रिय हो गए हैं। कइयों के जिला पंचायत का वार्ड उनके हिसाब से हो गया तो वहीं जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने वाले पंचायत अनारक्षित हो जाने के कारण प्रधानी का चुनाव लड़ने की प्लानिंग करने में जुट गए हैं। रविवार को इसी तरह का आलम गांवों में देखने को मिला। नारखी धौंकल, खैरगढ़ ग्राम पंचायतों का आरक्षण बदला तो यहां नए दावेदार सक्रिय हो गए। लालऊ, गाजीपुर में इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। वार्ड संख्या 26 एवं 27 अनारक्षित हो जाने के कारण यहां प्रत्याशियों की लिस्ट बढ़ना तय माना जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रत्याशियों की नजर
हाईकोर्ट में 1995 के आधार पर सरकार को चुनौती देने वाली याचिका के बाद प्रदेश सरकार ने अब 2015 को आधार मानते हुए नया आरक्षण जारी किया है। पुराने आरक्षण को यथावत रखने की कवायद करने वाले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए। इसके कारण नए आरक्षण में चुनाव मैदान से बाहर होने वाले प्रत्याशियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। वह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद दोबारा से पुराना आरक्षण लागू हो जाए और वह फिर से मैदान में दिखाई दें।
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कई उम्मीदवार दिखे हताश
प्रधान बनने का सपना देखने वाले कई प्रत्याशी हताश एवं निराश दिखे। नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरक्षण तय होने के बाद लाखों रुपये खर्च कर दिया। प्रचार करने के साथ-साथ वोटरों को अपने पक्ष में करने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन अरमानों पर पानी तब फिर गया, जब आरक्षण ही बदल गया।