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गांव में जोर पकड़ने लगा प्रधानी का चुनाव, पोस्टरों,बैनरों को लगाने का क्रम हुआ तेज
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फिरोजाबाद। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के लिए आरक्षण तय हो गया है। गांव की सरकार बनाने के लिए वोटर से लेकर नेता तक जोश से लबरेज दिख रहे हैं। प्रचार में कोई पीछे न रह जाए इसके लिए अभी से दावेदारों ने गांव-गांव को होर्डिंग-बैनरों से पाट दिया है। इस मामले में आधी आबादी भी पीछे नहीं। 33 फीसदी सीटें आरक्षित होने के बाद महिला दावेदार भी प्रचार में अभी से जुट गई हैं जिससे समय रहते हर वोटर तक अपनी बात को रखा जा सके।
कोरोना के कारण लंबे समय प्रधान, बीडीसी एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के आरक्षण का सभी को इंतजार था। जैसे ही आरक्षण सूची जारी हुई वैसे ही प्रधान, बीडीसी एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने वाले दावेदारों ने अपनी सक्रियता को और भी तेज कर दिया है।
दावेदार ग्राम पंचायत के दायरे में आने वाले गांवों में दस्तक तो दे ही रहे हैं साथ में वोटर और सर्पोटर को भी साधने में जुट गए हैं। दावेदारों ने अपने घरों पर दावतें शुरू करा दी हैं। गांव-गांव पोस्टर एवं बैनरों को लगाया जा रहा है। इसके पीछे नेताओं का तर्क है कि जनता में यह संदेश चला जाए कि हम भी प्रधान पद के उम्मीदवार हैं। इसके लिए जनसंपर्क करने के साथ गांव-गांव टीम बनाई जा रही है।
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इस तरह का नजारा लाइनपार यमुना के तलहटी वाले गांवों में देखने को मिल रहा है। जिला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवारों ने सक्रियता बढ़ा दी है। सत्ताधारी दल भाजपा के पास टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त आना शुरू हो गई हैं। एक-एक वार्ड से पार्टी के तीन-तीन से चार-चार कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के लिए तैयारी कर रहे हैं। आखिर पार्टी किसे चुनाव लड़ाएगी इसे लेकर नेताओं के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। यह हाल सत्ताधारी दल का ही नहीं बल्कि सपा एवं बसपा में भी देखने को मिल रहा है।
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कोरोना के कारण लंबे समय प्रधान, बीडीसी एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के आरक्षण का सभी को इंतजार था। जैसे ही आरक्षण सूची जारी हुई वैसे ही प्रधान, बीडीसी एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने वाले दावेदारों ने अपनी सक्रियता को और भी तेज कर दिया है।
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दावेदार ग्राम पंचायत के दायरे में आने वाले गांवों में दस्तक तो दे ही रहे हैं साथ में वोटर और सर्पोटर को भी साधने में जुट गए हैं। दावेदारों ने अपने घरों पर दावतें शुरू करा दी हैं। गांव-गांव पोस्टर एवं बैनरों को लगाया जा रहा है। इसके पीछे नेताओं का तर्क है कि जनता में यह संदेश चला जाए कि हम भी प्रधान पद के उम्मीदवार हैं। इसके लिए जनसंपर्क करने के साथ गांव-गांव टीम बनाई जा रही है।
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इस तरह का नजारा लाइनपार यमुना के तलहटी वाले गांवों में देखने को मिल रहा है। जिला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवारों ने सक्रियता बढ़ा दी है। सत्ताधारी दल भाजपा के पास टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त आना शुरू हो गई हैं। एक-एक वार्ड से पार्टी के तीन-तीन से चार-चार कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के लिए तैयारी कर रहे हैं। आखिर पार्टी किसे चुनाव लड़ाएगी इसे लेकर नेताओं के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। यह हाल सत्ताधारी दल का ही नहीं बल्कि सपा एवं बसपा में भी देखने को मिल रहा है।