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नए उद्योग, विस्तारीकरण पर रोक से हलचल
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 09 Jan 2015 11:28 PM IST
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ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) में नए उद्योगों के सृजन, विस्तारीकरण पर रोक लगने के बाद उद्योग जगत में हलचल तेज हो गई है। मंडलायुक्त के फरमान से करोड़ों का इन्वेस्ट कर नई इकाईयां चालू करने की बाट जोह रहे उद्यमियों को तगड़ा झटका लगा है। फिलहाल इस मामले को लेकर कहीं से राहत मिलने की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है।
हाईकोर्ट द्वारा 30 दिसंबर 1996 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश जारी किए गया था कि आगरा स्थित 292 इकाईयों के अतिरिक्त टीटीजेड में स्थापित 625 इकाईयों को नोटिस जारी करें कि वह 15 फरवरी 1997 तक गैस के लिए आवेदन करें या फिर टीटीजेड से बाहर चली जाएं। इसके बाद 220 इकाईयों की सूची संयुक्त उद्योग निदेशक आगरा को सौंपी गई। शेष 405 इकाईयों ने गैस के लिए आवेदन नहीं कर हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया। उप्र. शासन द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के पंजीकरण की व्यवस्था को मान्यता देखी रही है, जिसके अंतर्गत जनपद में करीब 200 से अधिक नए उद्योगों को स्थापित करने के लिए समय-समय प्रयास किए गए, जिन्हें उद्योग विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मान्यता नहीं दी गई। नए उद्योगों के सृजन में लोगों ने गैस के कनेक्शन लेने, विभागों से एनओसी प्राप्त करने में करोड़ों रुपये का इन्वेस्ट कर दिया हैं। अब मंडलायुक्त के फरमान से ऐसे लोगाें को तगड़ा झटका लगा है।
कोयला, लकड़ी से नहीं चलेंगे उद्योग
ताज संरक्षित क्षेत्र में कोयला, लकड़ी से चलने वाले उद्योग जो धुआं उगलते हैं उनकी स्थापना पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। सुहागनगरी में वर्षों से धुआं उगल रहीं 111 पकाई भट्ठियों पर प्रशासन ने बंदी की मोहर लगा दी है। अब पकाई भट्ठी चलाने को भट्ठी स्वामी गैस के लिए प्रयासरत हैं या फिर टीटीजेड से बाहर जाने को मजबूर हैं।
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1200-1300 टन प्रतिदिन है उत्पादन क्षमता
कांचनगरी में गैस से संचालित करीब 191 इकाईयों की प्रतिदिन उत्पादन क्षमता करीब 1200-1300 टन प्रतिदिन है। मंडलायुक्त के निर्देश पर पीसीबी द्वारा किए गए सर्वे में कांच उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रदर्शित की गई है। अब इससे अधिक क्षमता विस्तार करना उद्यमियों के लिए संभव नहीं होगा।
वर्षों से नए उद्योग लगाने की आस में करोड़ों रुपये खर्च कर चुके लोगों के लिए बड़ा झटका है, जबकि वास्तव में नए उद्योग लगाने एवं विस्तारीकरण पर कोई रोक नहीं है। जब नए उद्योग नहीं लगेंगे तो देश का विकास कैसे होगा, हजारों मजदूरों को रोजगार नहीं मिल सकेगा। इस पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।
मोहन बाबू अग्रवाल
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हाईकोर्ट द्वारा 30 दिसंबर 1996 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश जारी किए गया था कि आगरा स्थित 292 इकाईयों के अतिरिक्त टीटीजेड में स्थापित 625 इकाईयों को नोटिस जारी करें कि वह 15 फरवरी 1997 तक गैस के लिए आवेदन करें या फिर टीटीजेड से बाहर चली जाएं। इसके बाद 220 इकाईयों की सूची संयुक्त उद्योग निदेशक आगरा को सौंपी गई। शेष 405 इकाईयों ने गैस के लिए आवेदन नहीं कर हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया। उप्र. शासन द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के पंजीकरण की व्यवस्था को मान्यता देखी रही है, जिसके अंतर्गत जनपद में करीब 200 से अधिक नए उद्योगों को स्थापित करने के लिए समय-समय प्रयास किए गए, जिन्हें उद्योग विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मान्यता नहीं दी गई। नए उद्योगों के सृजन में लोगों ने गैस के कनेक्शन लेने, विभागों से एनओसी प्राप्त करने में करोड़ों रुपये का इन्वेस्ट कर दिया हैं। अब मंडलायुक्त के फरमान से ऐसे लोगाें को तगड़ा झटका लगा है।
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कोयला, लकड़ी से नहीं चलेंगे उद्योग
ताज संरक्षित क्षेत्र में कोयला, लकड़ी से चलने वाले उद्योग जो धुआं उगलते हैं उनकी स्थापना पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। सुहागनगरी में वर्षों से धुआं उगल रहीं 111 पकाई भट्ठियों पर प्रशासन ने बंदी की मोहर लगा दी है। अब पकाई भट्ठी चलाने को भट्ठी स्वामी गैस के लिए प्रयासरत हैं या फिर टीटीजेड से बाहर जाने को मजबूर हैं।
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1200-1300 टन प्रतिदिन है उत्पादन क्षमता
कांचनगरी में गैस से संचालित करीब 191 इकाईयों की प्रतिदिन उत्पादन क्षमता करीब 1200-1300 टन प्रतिदिन है। मंडलायुक्त के निर्देश पर पीसीबी द्वारा किए गए सर्वे में कांच उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रदर्शित की गई है। अब इससे अधिक क्षमता विस्तार करना उद्यमियों के लिए संभव नहीं होगा।
वर्षों से नए उद्योग लगाने की आस में करोड़ों रुपये खर्च कर चुके लोगों के लिए बड़ा झटका है, जबकि वास्तव में नए उद्योग लगाने एवं विस्तारीकरण पर कोई रोक नहीं है। जब नए उद्योग नहीं लगेंगे तो देश का विकास कैसे होगा, हजारों मजदूरों को रोजगार नहीं मिल सकेगा। इस पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।
मोहन बाबू अग्रवाल