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‘मायाचार का त्याग ही आर्जव धर्म’
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 20 Sep 2015 07:44 PM IST
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दसलक्षण महापर्व पर जैन मंदिर णमोकार महामंत्र से गुंजायमान हो रहे हैं। प्रात:काल सेे ही धार्मिक कार्यक्रमों की शृंखला देर रात तक जारी है। पूजा अर्चना के लिए महिलाओं एवं पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। रविवार को आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की गई।
चंद्रप्रभु मंदिर में विद्वान शिवचरन लाल शास्त्री ने कहा कि छल कपट मायाचारिता जीवन का सौंदर्य नही है। इनसे आत्मा कलुषित होती है और चित्त अशांत रहता है। अपनी आत्मा को कुटिलता से नही पहचाना जा सकता। अपनी आत्मा का अनुभव करने के लिये आर्जव धर्म को प्रकट करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष दसलक्षण पर्व आते और चले जाते है। हम सभी एक लकीर पीटने की तरह मंदिर आते है, पूजा पाठ करके, प्रवचन आदि सुनकर घर चले जाते है। क्या यही धर्म है? नही, यह धर्म यह नही है। दसलक्षण धर्म का पालन करने पर भी यदि जीवन में परिवर्तन न आए तो समझो आपने धर्म का पालन किया ही नही। जीवन में धर्म आने पर अनिवार्य रूप से दिनचर्या बदल जाती है। दिनचर्या में बदलाव न आए तो दसलक्षण सही तरह अपनाया नही गया। दसलक्षण मनाते 20, 30, 40 वर्ष बीत गये लेकिन यदि आपने लक्ष्य निर्धारित नही किया तो कल्याण होना संभव नही। वहीं, दोपहर में बालेयोगी मुनि अमितसागर महाराज ने तत्वार्थ सूत्र के तीसरे अध्याय में मध्य लोक की विशद व्याख्या करते हुए कहा कि हम लोग शरीर से तो धर्मसभा में बैठते हैं, लेकिन वास्तव में मन व्यापार आदि में चला जाता है यह ठीक नही। इसीलिए कोई भी कार्य मन लगाकर करना चाहिए। वहीं, छदामीलाल जैन मंदिर, नसियाजी मंदिर, विभव नगर, नई बस्ती के जैन मंदिर में भी देर रात्रि तक धार्मिक आयोजन चलते रहे।
नसियाजी मंदिर में मनाया पुष्पदंत भगवान का निर्वाण महोत्सव
फीरोजाबाद। उत्तम आर्जव धर्म पर नसियाजी मंदिर में मुनि अमित सागर महाराज ने व्याख्यान किया। मुनि अमित सागर महाराज के सानिध्य में भगवान पुष्पदंत का निर्वाण महोत्सव मनाया गया। पंचामृत अभिषेक करने का सौभाग्य सुनील जैन, मुनि सुव्रतनाथ की शांतिधारा करने का सौभाग्य बबलू जैन को प्राप्त हुआ। हरिकिशन, डॉ. अमित, राजेश जैन सरल की देखरेख में में पूजा संपन्न हुई।
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चंद्रप्रभु मंदिर में विद्वान शिवचरन लाल शास्त्री ने कहा कि छल कपट मायाचारिता जीवन का सौंदर्य नही है। इनसे आत्मा कलुषित होती है और चित्त अशांत रहता है। अपनी आत्मा को कुटिलता से नही पहचाना जा सकता। अपनी आत्मा का अनुभव करने के लिये आर्जव धर्म को प्रकट करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष दसलक्षण पर्व आते और चले जाते है। हम सभी एक लकीर पीटने की तरह मंदिर आते है, पूजा पाठ करके, प्रवचन आदि सुनकर घर चले जाते है। क्या यही धर्म है? नही, यह धर्म यह नही है। दसलक्षण धर्म का पालन करने पर भी यदि जीवन में परिवर्तन न आए तो समझो आपने धर्म का पालन किया ही नही। जीवन में धर्म आने पर अनिवार्य रूप से दिनचर्या बदल जाती है। दिनचर्या में बदलाव न आए तो दसलक्षण सही तरह अपनाया नही गया। दसलक्षण मनाते 20, 30, 40 वर्ष बीत गये लेकिन यदि आपने लक्ष्य निर्धारित नही किया तो कल्याण होना संभव नही। वहीं, दोपहर में बालेयोगी मुनि अमितसागर महाराज ने तत्वार्थ सूत्र के तीसरे अध्याय में मध्य लोक की विशद व्याख्या करते हुए कहा कि हम लोग शरीर से तो धर्मसभा में बैठते हैं, लेकिन वास्तव में मन व्यापार आदि में चला जाता है यह ठीक नही। इसीलिए कोई भी कार्य मन लगाकर करना चाहिए। वहीं, छदामीलाल जैन मंदिर, नसियाजी मंदिर, विभव नगर, नई बस्ती के जैन मंदिर में भी देर रात्रि तक धार्मिक आयोजन चलते रहे।
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नसियाजी मंदिर में मनाया पुष्पदंत भगवान का निर्वाण महोत्सव
फीरोजाबाद। उत्तम आर्जव धर्म पर नसियाजी मंदिर में मुनि अमित सागर महाराज ने व्याख्यान किया। मुनि अमित सागर महाराज के सानिध्य में भगवान पुष्पदंत का निर्वाण महोत्सव मनाया गया। पंचामृत अभिषेक करने का सौभाग्य सुनील जैन, मुनि सुव्रतनाथ की शांतिधारा करने का सौभाग्य बबलू जैन को प्राप्त हुआ। हरिकिशन, डॉ. अमित, राजेश जैन सरल की देखरेख में में पूजा संपन्न हुई।
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