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मजदूरों की बेबसी में दब गई चूड़ियों की खनक, जेब खाली
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फिरोजाबाद। लॉकडाउन के कारण दो महीने से चूड़ी कारोबार बंद पड़ा है। गली-मोहल्लों से सुनाई देने वाली चूड़ियों के खनक थमी हुई है। चूड़ी के काम से जुडे़ श्रमिक अब परेशान होने लगे हैं। दूसरों की मदद से सिर्फ पेट भर पा रहा है। परिवार के और भी खर्च हैं इनको पूरा करने के लिए मजदूर चूड़ी का काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। श्रमिक बस्तियों में सन्नाटा है।
चूड़ी का माल ले जाने वाले ठेलों पर धूल जमी हुई है। जुड़ाई के अड्डे, चूड़ी छंटाई और झलाई का काम भी बंद है। दो महीने के लॉकडाउन ने घर का राशन खत्म कर दिया और जेब भी खाली कर दी। बेबस मजदूरों का कहना है कि चूल्हा जलाने के लिए कब तक हाथ फैलाते रहें, अब तो काम शुरू होना चाहिए।
होली के बाद से काम बंद पड़े है। घर में आठ लोगों का खर्च है। छह बच्चों के साथ पत्नी और खुद हैं। एक पैसा पास नहीं है। घर पर राशन की किल्लत है। मकान का किराया भी चढ़ रहा है। शहर का हाल देेखकर कहीं काम मिलने की उम्मीद भी नहीं है। राशन कार्ड भी पास नहीं है जिससे राशन मिल सके। दानदाताओं की मदद से चूल्हा जल रहा है।
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सुनील कुमार, डाक बंगला
पति चूड़ी मजदूरी करते हैं वह भी काम पर नहीं जा रहे हैं। तीन बच्चे हैं। खुद का मकान है, लेकिन वह भी कर्ज में गिरवी रखा हुआ है। कुछ लोगों से राशन मांगकर बच्चों का पेट पाल रहे हैं। एक-एक दिन गिनकर कट रहा है। राशन कार्ड बनवाने के लिए काफी प्रयास किए। लेकिन अभी तक राशन कार्ड नहीं सका। राशन कार्ड होता तो उससे कुछ राहत मिलती।
सुमनदेवी, निवासी रसूलपुर
होली से काम बंद पड़ा है। एक-एक पैसे के लिए दिक्कत हो रही है। किराए के मकान में रह रहे हैं। छोटे-छोटे तीन बच्चे हैं। उनके दूध के लिए भी पैसे नहीं है। जहां पता चलता है कि राशन बंट रहा है। वहीं पहुंच जाते हैं। अभी जो आटा मिला था। उससे एक दो दिन कट जाएंगे। अब तो शासन से ही राहत मिलने की उम्मीद है। पता नहीं कब पति काम पर जाएंगे।
विजय लक्ष्मी, बघेल कॉलोनी
किराए के मकान में निवास करने वाली धनवंतीदेवी भी लॉकडाउन के कारण काफी परेशान हैं। पति मजदूरी करते हैं तो तीन बच्चों के भरण पोषण के लिए धनवंती खुद घर पर चूड़ी जुड़ाई का कार्य में पति की मदद करती हैं, लेकिन पिछले तीन माह से काम बंद होने के कारण धनवंती और उनके पति काफी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। अब काम शुरू होना चाहिए।
धनवंती निवासी, झलकारी नगर
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चूड़ी का माल ले जाने वाले ठेलों पर धूल जमी हुई है। जुड़ाई के अड्डे, चूड़ी छंटाई और झलाई का काम भी बंद है। दो महीने के लॉकडाउन ने घर का राशन खत्म कर दिया और जेब भी खाली कर दी। बेबस मजदूरों का कहना है कि चूल्हा जलाने के लिए कब तक हाथ फैलाते रहें, अब तो काम शुरू होना चाहिए।
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होली के बाद से काम बंद पड़े है। घर में आठ लोगों का खर्च है। छह बच्चों के साथ पत्नी और खुद हैं। एक पैसा पास नहीं है। घर पर राशन की किल्लत है। मकान का किराया भी चढ़ रहा है। शहर का हाल देेखकर कहीं काम मिलने की उम्मीद भी नहीं है। राशन कार्ड भी पास नहीं है जिससे राशन मिल सके। दानदाताओं की मदद से चूल्हा जल रहा है।
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सुनील कुमार, डाक बंगला
पति चूड़ी मजदूरी करते हैं वह भी काम पर नहीं जा रहे हैं। तीन बच्चे हैं। खुद का मकान है, लेकिन वह भी कर्ज में गिरवी रखा हुआ है। कुछ लोगों से राशन मांगकर बच्चों का पेट पाल रहे हैं। एक-एक दिन गिनकर कट रहा है। राशन कार्ड बनवाने के लिए काफी प्रयास किए। लेकिन अभी तक राशन कार्ड नहीं सका। राशन कार्ड होता तो उससे कुछ राहत मिलती।
सुमनदेवी, निवासी रसूलपुर
होली से काम बंद पड़ा है। एक-एक पैसे के लिए दिक्कत हो रही है। किराए के मकान में रह रहे हैं। छोटे-छोटे तीन बच्चे हैं। उनके दूध के लिए भी पैसे नहीं है। जहां पता चलता है कि राशन बंट रहा है। वहीं पहुंच जाते हैं। अभी जो आटा मिला था। उससे एक दो दिन कट जाएंगे। अब तो शासन से ही राहत मिलने की उम्मीद है। पता नहीं कब पति काम पर जाएंगे।
विजय लक्ष्मी, बघेल कॉलोनी
किराए के मकान में निवास करने वाली धनवंतीदेवी भी लॉकडाउन के कारण काफी परेशान हैं। पति मजदूरी करते हैं तो तीन बच्चों के भरण पोषण के लिए धनवंती खुद घर पर चूड़ी जुड़ाई का कार्य में पति की मदद करती हैं, लेकिन पिछले तीन माह से काम बंद होने के कारण धनवंती और उनके पति काफी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। अब काम शुरू होना चाहिए।
धनवंती निवासी, झलकारी नगर