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Firozabad News: दहेज हत्या के दोषी को आजीवन कारावास
Fri, 26 Jul 2024 03:07 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 26 Jul 2024 03:07 AM IST
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फिरोजाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय रविकांत यादव ने दहेज हत्या के दोषी को आजीवन कारावास एवं आठ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आठ माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की आधी धनराशि मृतका की पुत्री को दी जाएगी। मामला थाना लाइनपार क्षेत्र का है। वादी प्रमोद कुमार की चचेरी बहन सुनीता पुत्री हरभजन की शादी 2015 में रमेश पुत्र वीरी सिंह निवासी मालीपट्टी थाना बसई मोहम्मदपुर के साथ हुई थी। सुनीता ने एक मकान दतौजी खुर्द में अपने बहनोई के पास बनवाया था, उसी मकान में सुनीता अपनी पुत्री राखी व दूसरे पति रमेश के बच्चे सहित रहती थी। शादी के बाद से ही रमेश, सुनीता को विरासत में मिली जमीन व मकान को अपने नाम कराने के लिए पिटाई करता था। दहेज की मांग के लिए पहले भी कई बार पिटाई की।
3 मई 2018 को रात 11 बजे सुनीता की रमेश ने फिर पिटाई की। बीचबचाव उसके बहनोई व अन्य लोगों किया। उसके बाद रमेश और सुनीता एक कमरे में सो गए। और रमेश के लड़के व राखी छत पर सो गए। सुबह करीब 5 बजे राखी की आंख खुली तो नीचे कमरे में आकर देखा कि उसकी मां सुनीता कमरे में चारपाई पर मरी पड़ी है और उसके कानों के कुंडल व पायल गायब थीं। रमेश अपने दोनों लड़कों को लेकर फरार हो गया।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय दाखिल किया। मुकदमा सेशन सुपुर्द हुआ और सुनवाई एवं निस्तारण अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या द्वितीय रविकांत यादव की न्यायालय में की गई। न्यायालय में आठ गवाहों ने गवाही दी।
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न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने एवं पत्रावली पर तमाम साक्ष्य का गहनता से अध्ययन करने के बाद रमेश को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और आठ हजार रुपये की सजा से दंडित किया।
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3 मई 2018 को रात 11 बजे सुनीता की रमेश ने फिर पिटाई की। बीचबचाव उसके बहनोई व अन्य लोगों किया। उसके बाद रमेश और सुनीता एक कमरे में सो गए। और रमेश के लड़के व राखी छत पर सो गए। सुबह करीब 5 बजे राखी की आंख खुली तो नीचे कमरे में आकर देखा कि उसकी मां सुनीता कमरे में चारपाई पर मरी पड़ी है और उसके कानों के कुंडल व पायल गायब थीं। रमेश अपने दोनों लड़कों को लेकर फरार हो गया।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय दाखिल किया। मुकदमा सेशन सुपुर्द हुआ और सुनवाई एवं निस्तारण अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या द्वितीय रविकांत यादव की न्यायालय में की गई। न्यायालय में आठ गवाहों ने गवाही दी।
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न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने एवं पत्रावली पर तमाम साक्ष्य का गहनता से अध्ययन करने के बाद रमेश को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और आठ हजार रुपये की सजा से दंडित किया।