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श्रमिक नेताओं के साथ श्रमिक मंडी पहुंचे अफसर
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जाटवपुरी चौराहे पर श्रमिकों से काम लगाने की कहते श्रमिक नेता भूरी सिंह यादव
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। उपद्रव के कारण शुक्रवार से अघोषित औद्योगिक बंदी झेल रहे कांच व चूड़ी उद्योग को पटरी पर लाने के लिए प्रमुख उद्योगपति, श्रमिक नेता एवं श्रम विभाग के अधिकारी खुद सड़क पर उतरे। चूड़ी कारखानेदारों के साथ सहायक श्रमायुक्त श्रमिक मंडी पहुंच गए। श्रमिक नेताओं की मौजूदगी में श्रमिकों को काम पर लौटने को राजी किया।
कई दिन से चल रही अघोषित औद्योगिक बंदी के कारण सुहागनगरी की पहचान चूड़ी उद्योग को करीब दस करोड़ की चपत लग चुकी है। वहीं कारखानों, स्टॉक, गोदामों एवं ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुडे़ श्रमिकों के समक्ष रोजीरोटी का संकट है। शुक्रवार को हुए उपद्रव के बाद कांच व चूड़ी श्रमिक अनहोनी की आशंका के कारण कारखाने नहीं पहुंच रहे। हालत सुधारते ही जिला प्रशासन कांच व चूड़ी उद्योग को सुचारु कराने की जुगत में लग गया है।
इसी कवायद के चलते सहायक श्रमायुक्त अरुण कुमार सिंह मंगलवार की सुबह से ही चूड़ी कारखानेदारों एवं श्रमिक नेताओं को साथ लेकर श्रमिक मंडी जाटवपुरी चौराहा पर पहुंच गए। वहां मौजूद श्रमिकों को काम पर लौटने के लिए समझा गया। अधिकारियों व कारखानेदारों ने श्रमिकों को सुरक्षा का आश्वासन देकर काम पर लौटने के लिए राजी किया। इस दौरान दी ग्लास सिडिंकेट के हाजी अंसार, श्रमिक नेता भूरी सिंह यादव मौजूद रहे।
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कई कारखाने में काम पर लौटे श्रमिक
प्रशासन, श्रम विभाग एवं श्रमिक नेताओं की पहल के बाद सुहागनगरी के श्रीराम ग्लास इंडस्ट्रीज, मैसर्स गनेश ब्लाक ग्लास, मिलेनियम ग्लास, विजेता ग्लास, नेशनल ग्लास, दिनेश ग्लास, सपना ग्लास, श्रीनाथ ग्लास एवं सरोजनी ग्लास में कामकाज पटरी पर लौटते दिखा। इन कारखानों में श्रमिक कामकाज में तल्लीन दिखे।
कांच उद्योग को लगी 15 करोड़ की चपत
कांच व चूड़ी उद्योग में कामकाज ठप होने के साथ-साथ इससे जुडे़ हजारों चूड़ी गोदामों, स्टॉक, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुडे़ व्यापारी हाथ पे हाथ धरे बैठे रहे। चार दिन की अघोषित बंदी से नगर क्षेत्र के चूड़ी कारखानों में करीब साढे़ चार करोड़ से ज्यादा की गैस बेवजह फुंक गई। अचानक बंदी से दो करोड़ से ज्यादा का चूड़ी मटीरियल भी बेकार हो गया।
नगर क्षेत्र के कुल चूड़ी कुल कारखाने-----60-70
अनुमानत: पल्लेदारों, हाथठेला की संख्या----5000
कुल चूड़ी गोदामों व स्टॉक की सख्या-----10,000
गोदाम व स्टॉक पर काम करने वाले श्रमिक-50000
इसके अतिरिक्त सुहागनगरी करीब 1500 हिल कारीगर, चूड़ी जुड़ाई, झलाई एवं चकलाई करने वाले श्रमिकों की संख्या 50 हजार से ज्यादा है।
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कई दिन से चल रही अघोषित औद्योगिक बंदी के कारण सुहागनगरी की पहचान चूड़ी उद्योग को करीब दस करोड़ की चपत लग चुकी है। वहीं कारखानों, स्टॉक, गोदामों एवं ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुडे़ श्रमिकों के समक्ष रोजीरोटी का संकट है। शुक्रवार को हुए उपद्रव के बाद कांच व चूड़ी श्रमिक अनहोनी की आशंका के कारण कारखाने नहीं पहुंच रहे। हालत सुधारते ही जिला प्रशासन कांच व चूड़ी उद्योग को सुचारु कराने की जुगत में लग गया है।
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इसी कवायद के चलते सहायक श्रमायुक्त अरुण कुमार सिंह मंगलवार की सुबह से ही चूड़ी कारखानेदारों एवं श्रमिक नेताओं को साथ लेकर श्रमिक मंडी जाटवपुरी चौराहा पर पहुंच गए। वहां मौजूद श्रमिकों को काम पर लौटने के लिए समझा गया। अधिकारियों व कारखानेदारों ने श्रमिकों को सुरक्षा का आश्वासन देकर काम पर लौटने के लिए राजी किया। इस दौरान दी ग्लास सिडिंकेट के हाजी अंसार, श्रमिक नेता भूरी सिंह यादव मौजूद रहे।
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कई कारखाने में काम पर लौटे श्रमिक
प्रशासन, श्रम विभाग एवं श्रमिक नेताओं की पहल के बाद सुहागनगरी के श्रीराम ग्लास इंडस्ट्रीज, मैसर्स गनेश ब्लाक ग्लास, मिलेनियम ग्लास, विजेता ग्लास, नेशनल ग्लास, दिनेश ग्लास, सपना ग्लास, श्रीनाथ ग्लास एवं सरोजनी ग्लास में कामकाज पटरी पर लौटते दिखा। इन कारखानों में श्रमिक कामकाज में तल्लीन दिखे।
कांच उद्योग को लगी 15 करोड़ की चपत
कांच व चूड़ी उद्योग में कामकाज ठप होने के साथ-साथ इससे जुडे़ हजारों चूड़ी गोदामों, स्टॉक, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुडे़ व्यापारी हाथ पे हाथ धरे बैठे रहे। चार दिन की अघोषित बंदी से नगर क्षेत्र के चूड़ी कारखानों में करीब साढे़ चार करोड़ से ज्यादा की गैस बेवजह फुंक गई। अचानक बंदी से दो करोड़ से ज्यादा का चूड़ी मटीरियल भी बेकार हो गया।
नगर क्षेत्र के कुल चूड़ी कुल कारखाने-----60-70
अनुमानत: पल्लेदारों, हाथठेला की संख्या----5000
कुल चूड़ी गोदामों व स्टॉक की सख्या-----10,000
गोदाम व स्टॉक पर काम करने वाले श्रमिक-50000
इसके अतिरिक्त सुहागनगरी करीब 1500 हिल कारीगर, चूड़ी जुड़ाई, झलाई एवं चकलाई करने वाले श्रमिकों की संख्या 50 हजार से ज्यादा है।