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अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या, झुलस रही त्वचा
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:19 PM IST
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गर्मी के तल्ख तेवर और बढ़ती उमस लोगों को बीमार कर रही है। अप्रैल में गर्मी ने मई और जून जैसा अहसास करा दिया है। लू और तीखी धूप से त्वचा को झुलसा रही है तो बदलता मौसम बीमारियां साथ ला रहा है। थोड़ी सी लापरवाही अस्पताल पहुंचा रही है। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 12 सौ से अधिक मरीजा आए, वहीं पुराने मरीजों की भी मौजूदगी रही। इधर, प्राइवेट अस्पतालों एवं झोलाछापों के यहां मरीजों की भीड़ लग रही है।
सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों एवं तीमारदारों की भीड़ दिखी। चिकित्सकों के कक्ष के बाहर मरीजों की लाइनें दिखीं। दवा की खिड़की पर कई बार धक्का मुक्की भी हुई। सर्वाधिक मरीज त्वचा रोग से पीड़ित आए। वायरल फीवर, मलेरिया, नकसीर फूटने, पीलिया आदि के मरीजों की संख्या भी अधिक दिखी। बीमारों में बच्चों की संख्या ज्यादा थी जबकि बुजुर्ग भी पीड़ित दिखे।
बालरोग विशेषज्ञ डा. नेमीनचंद्रा ने बताया कि अधिक तापमान के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। नतीजतन बीमारी का हमला आसान हो जाता है।
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कुछ सावधानियां बरतकर बीमारी से हम बच सकते हैं। बढ़ते तापमान के दौरान पीलिया, पाचन संबंधी बीमारी बढ़ती है। खुले और कटे फलों का सेवन भूल कर भी न करें। लू के साथ धूल उड़ने के कारण यह मौसम श्वांस संबंधी रोगियों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे में बाहर निकलते समय मुंह-नाक को हलके कपड़े से ढक लें। लू के कारण गर्म हवा नाक के भीतर की कोमल झिल्ली को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण नकसीर फूट जाता है। उन्होंने गर्मी के असर से बचने की सलाह दी है।
डा. अजय अग्रवाल, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल
गर्मी में क्या करें
- बदलते मौसम के साथ फल व जूस का भरपूर सेवन करें।
- धूप से आंखों को बचाने के लिए चश्मे का प्रयोग करें।
- हाथों और मुंह पर मास्क लगाकर निकलें और सफेद सूती कपड़े पहनें।
खाली पेट नहीं रहें
- भोजन समय पर लें। खाने में हरी सब्जी की मात्रा अधिक लें। बाहर का खाना कम लें। सुबह उठने के बाद दो गिलास सादा पानी जरूर लें। घर से बाहर जाते समय अपने साथ पानी जरूर रखें। धूप से आने के तुरंत बाद पानी या फिर शरबत नहीं लें।
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सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों एवं तीमारदारों की भीड़ दिखी। चिकित्सकों के कक्ष के बाहर मरीजों की लाइनें दिखीं। दवा की खिड़की पर कई बार धक्का मुक्की भी हुई। सर्वाधिक मरीज त्वचा रोग से पीड़ित आए। वायरल फीवर, मलेरिया, नकसीर फूटने, पीलिया आदि के मरीजों की संख्या भी अधिक दिखी। बीमारों में बच्चों की संख्या ज्यादा थी जबकि बुजुर्ग भी पीड़ित दिखे।
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बालरोग विशेषज्ञ डा. नेमीनचंद्रा ने बताया कि अधिक तापमान के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। नतीजतन बीमारी का हमला आसान हो जाता है।
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कुछ सावधानियां बरतकर बीमारी से हम बच सकते हैं। बढ़ते तापमान के दौरान पीलिया, पाचन संबंधी बीमारी बढ़ती है। खुले और कटे फलों का सेवन भूल कर भी न करें। लू के साथ धूल उड़ने के कारण यह मौसम श्वांस संबंधी रोगियों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे में बाहर निकलते समय मुंह-नाक को हलके कपड़े से ढक लें। लू के कारण गर्म हवा नाक के भीतर की कोमल झिल्ली को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण नकसीर फूट जाता है। उन्होंने गर्मी के असर से बचने की सलाह दी है।
डा. अजय अग्रवाल, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल
गर्मी में क्या करें
- बदलते मौसम के साथ फल व जूस का भरपूर सेवन करें।
- धूप से आंखों को बचाने के लिए चश्मे का प्रयोग करें।
- हाथों और मुंह पर मास्क लगाकर निकलें और सफेद सूती कपड़े पहनें।
खाली पेट नहीं रहें
- भोजन समय पर लें। खाने में हरी सब्जी की मात्रा अधिक लें। बाहर का खाना कम लें। सुबह उठने के बाद दो गिलास सादा पानी जरूर लें। घर से बाहर जाते समय अपने साथ पानी जरूर रखें। धूप से आने के तुरंत बाद पानी या फिर शरबत नहीं लें।