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अमर उजाला संवाद - हिंदी हिंदी ने दिलाया सम्मान, पहुंचाया बुलंदियों तक

Tue, 25 Aug 2020 11:04 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 11:04 PM IST
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hindi abhiyaan
फिरोजाबाद। आज के लोग हिंदी के बजाय अंग्रेजी भाषा को ज्यादा महत्व देते हैं। वहीं यह बात भी किसी से नहीं छुपी कि हिंदी भाषा ने ही लोगों को समाज में सम्मान दिलाया और बुलंदियों तक पहुंचाया है। हिंदी की बदौलत ही वह अपने जीवन को सफल मानते हैं। हिंदी का देश, दुनिया में नाम बढ़ रहा है। अमर उजाला द्वारा व्हाट्सएप पर हुई वार्ता में हिंदी के कारण सफल हुए लोगों ने अपने विचार रखे।
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हिंदी के लिए किया आंदोलन, हिंदी से बनाई पहचान
पूर्व सांसद ओमपाल सिंह निडर कहते हैं कि 1967 में बीए प्रथम वर्ष का छात्र था। उस समय मेरठ विवि में सामान्य अंग्रेजी अनिवार्य विषय थी। उस समय हमने आंदोलन किया और अंग्रेजी विषय अनिवार्य नहीं रहा। मैं पहला शिक्षक था, जो राजनीति शास्त्र को हिंदी विषय में पढ़ाता था। विद्यार्थी भी हिंदी में राजनीति शास्त्र पढ़कर आनंदित होते थे। कक्षा दसवीं से मुझे हिंदी कविता लिखने का शौक हुआ। उस समय मैने कविता लिखी सौगंध राम खातिर, मंदिर यही बनाएंगे, जो पूरे विश्व में प्रसिद्घ हुई। वह कहते हैं कि हिंदी की बदौलत मैने अपने मंच पर सम्मान पाया और मुझे सांसद का टिकट मिला।
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हिंदी विषय में प्रीती ने पाए सर्वाधिक अंक, मिला सम्मान
दाऊदयाल महाविद्यालय की छात्रा प्रीती जैन ने हिंदी विषय में सर्वाधिक अंक हासिल किए थे। उनको प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान ट्रस्ट की ओर से सम्मानित किया गया था। प्रीती कहती हैं कि हिंदी मातृभाषा है और लोग उसमें फेल हो जाते हें। मेरे लिए हिंदी विषय तो सम्मान की भाषा बन गई। हिंदी को विदेशों में भी पसंद किए जाने लगा है। हिंदी संस्थान में विदेशी लोग हिंदी को सीखते हैं। हमें अपनी मातृ भाषा को बढ़ावा देना चाहिए।
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13 व्यंग किताबें लिख चुके हैं अरविंद, राज्यपाल से मिला है सम्मान
शिकोहाबाद निवासी अरविंद तिवारी डायट प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। किंतु हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए शुरू से ही जुटे हैं। अरविंद तिवारी ने व्यंग की 13 पुस्तकें लिखीं हैं। एक किताब तो नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित हुई है। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का श्रीनारायण चतुर्वेदी पुरस्कार व्यंग सम्मान दो लाख रुपये के रूप में मिला था। राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री भी सम्मानित कर चुके हैं। देश के 100 शीर्ष रचनाकारों में अरविंद तिवारी का दो साल से नाम शामिल हो रहा है। वह कहते हैं हिंदी मातृभाषा है। इससे सम्मान इतना मिलता है कि हर रोज हिंदी विषय को समय देता हूं।
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