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Firozabad News: कागजों में घूम रहीं स्वास्थ्य सेवाएं, दर्द से कराह रहे मरीज
Thu, 05 Dec 2024 12:31 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Thu, 05 Dec 2024 12:31 AM IST
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फिरोजाबाद का ट्रॉमा सेंटर।
- फोटो : फिरोजाबाद का ट्रॉमा सेंटर।
फिरोजाबाद। स्वास्थ्य सेवाओं में सुविधाएं बढ़ाए जाने के लगातार दावे किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत में नजर डालें तो कई स्वास्थ्य योजनाएं धरातल पर नहीं उतरी हैं। सिर्फ कागजों पर घूम रही हैं। इसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं। सुविधाएं धरातल पर उतरने के इंतजार में मरीज दर्द से कराह रहे हैं। लेकिन कई महीनों का इंतजार करने के बाद प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।
पब्लिक हेल्थ यूनिट का भवन तैयार, सेवाओं का इंतजार
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरगढ़ और जाटऊ परिसर में 48 लाख रुपये की लागत से ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट का भवन बनकर तैयार हो गया है। निर्माण के तीन माह बीत जाने के बाद भी कर्मचारियोंं की तैनाती तो दूर मरीजों की जांच समेत अन्य चिकित्सीय उपकरण तक नहीं लग सके हैं। यहां पर मरीजों की लीवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), हीमोग्लोबिन, सीबीसी, लिपिड प्रोफाइल, एमपी विडाल समेत अन्य जांच शुरू होंगी। इसके लिए कई आधुनिक मशीनें लगाई जानी हैं। खैरगढ़ सीएचसी प्रभारी डॉ. रजनीकांत का कहना है कि अभी बिल्डिंग हैंडओवर नहीं हुई है।
ट्राॅमा सेंटर विस्तार को मिली हरी झंडी, कार्य शुरू नहीं
आपातकालीन सेवा को बेहतर बनाने के लिए सरकारी ट्राॅमा सेंटर के लिए 50 पलंग का किए जाने का निर्णय लिया गया। मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। इस पर मुहर भी लग चुकी थी। यहां 10 पलंग का आईसीयू के साथ ऑपरेशन थियेटर भी दूसरी मंजिल पर बनाए जाने की स्वीकृति मिली। लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ। योजना कागजों से धरातल पर नहीं उतरी है।
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एमआरआई को दो साल पहले मिली मंजूरी, नहीं आई मशीन
गंभीर रोगों को पता लगाने के लिए चिकित्सक एमआरआई जांच कराने की सलाह देते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में यह जांच महंगी है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में दो साल पूर्व शासन से एमआरआई मशीन को स्थापित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। मशीन स्थापना के लिए ट्राॅमा सेंटर के बराबर बनीं खाली जमीन को चिह्नित किया था। दो सालों से मशीन कागज में ही घूम रही है।
मॉड्यूलर ओटी, 200 शैया की अनदेखी
आज भी बड़े ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज में नहीं होते है। ऑपरेशन की सुविधा बढ़ाने के लिए 200 शैया बिल्डिंग में अलग-अलग विभागों की मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर शुरू किए जाने थे। वहीं, गर्मियों में मेडिकल कॉलेज के वार्ड फुल हो जाते हैं। इसके लिए 200 शैया बिल्डिंग को शुरू किया जाना था। पांच सालों में यह बिल्डिंग शुरू नहीं हो सकी है।
-शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जिन कार्यों की स्वीकृति मिल गई है, वह जल्द ही धरातल पर उतरेंगे। सीटी स्कैन मशीन नई आई है, उसे स्थापित कराया जा रहा है। जल्द ही शुरुआत करा दी जाएगी।
डाॅ. नवीन जैन, सीएमएस
मेडिकल कॉलेज
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पब्लिक हेल्थ यूनिट का भवन तैयार, सेवाओं का इंतजार
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरगढ़ और जाटऊ परिसर में 48 लाख रुपये की लागत से ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट का भवन बनकर तैयार हो गया है। निर्माण के तीन माह बीत जाने के बाद भी कर्मचारियोंं की तैनाती तो दूर मरीजों की जांच समेत अन्य चिकित्सीय उपकरण तक नहीं लग सके हैं। यहां पर मरीजों की लीवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), हीमोग्लोबिन, सीबीसी, लिपिड प्रोफाइल, एमपी विडाल समेत अन्य जांच शुरू होंगी। इसके लिए कई आधुनिक मशीनें लगाई जानी हैं। खैरगढ़ सीएचसी प्रभारी डॉ. रजनीकांत का कहना है कि अभी बिल्डिंग हैंडओवर नहीं हुई है।
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ट्राॅमा सेंटर विस्तार को मिली हरी झंडी, कार्य शुरू नहीं
आपातकालीन सेवा को बेहतर बनाने के लिए सरकारी ट्राॅमा सेंटर के लिए 50 पलंग का किए जाने का निर्णय लिया गया। मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। इस पर मुहर भी लग चुकी थी। यहां 10 पलंग का आईसीयू के साथ ऑपरेशन थियेटर भी दूसरी मंजिल पर बनाए जाने की स्वीकृति मिली। लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ। योजना कागजों से धरातल पर नहीं उतरी है।
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एमआरआई को दो साल पहले मिली मंजूरी, नहीं आई मशीन
गंभीर रोगों को पता लगाने के लिए चिकित्सक एमआरआई जांच कराने की सलाह देते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में यह जांच महंगी है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में दो साल पूर्व शासन से एमआरआई मशीन को स्थापित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। मशीन स्थापना के लिए ट्राॅमा सेंटर के बराबर बनीं खाली जमीन को चिह्नित किया था। दो सालों से मशीन कागज में ही घूम रही है।
मॉड्यूलर ओटी, 200 शैया की अनदेखी
आज भी बड़े ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज में नहीं होते है। ऑपरेशन की सुविधा बढ़ाने के लिए 200 शैया बिल्डिंग में अलग-अलग विभागों की मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर शुरू किए जाने थे। वहीं, गर्मियों में मेडिकल कॉलेज के वार्ड फुल हो जाते हैं। इसके लिए 200 शैया बिल्डिंग को शुरू किया जाना था। पांच सालों में यह बिल्डिंग शुरू नहीं हो सकी है।
-शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जिन कार्यों की स्वीकृति मिल गई है, वह जल्द ही धरातल पर उतरेंगे। सीटी स्कैन मशीन नई आई है, उसे स्थापित कराया जा रहा है। जल्द ही शुरुआत करा दी जाएगी।
डाॅ. नवीन जैन, सीएमएस
मेडिकल कॉलेज