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Firozabad News: फ्रांस, इटली के बीज से उगा रहे चिकोरी
Wed, 25 Sep 2024 01:53 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 25 Sep 2024 01:53 AM IST
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फिरोजाबाद। एका क्षेत्र में उगाई जा रही चिकोरी की विदेश में भी मांग बढ़ गई है। किसान गेहूं, आलू की खेती को छोड़कर कॉफी में प्रयोग होने वाली चिकाेरी की खेती करने लगे हैं। फ्रांस, इटली से बीज मंगाया जा रहा है। बड़ी कंपनियां भी पैदावार काे खरीदकर विदेश में निर्यात कर रही हैं।
एका गांव हरपाल निवासी किसान दिनेश चंद्र का प्रयास उन्हें मालामाल कर रहा है। परंपरागत खेती को छोड़कर दिनेश ने तीन साल पहले चिकोरी की खेती शुरू की। वह बदायूं, एटा में हो रही चिकोरी की फसल से प्रभावित हुए। उन्होंने इटली, फ्रांस से बीज मंगाकर खेती करना शुरु कर दी। दिनेश बताते हैं कि एक बीघा में गेहूं की फसल में 10 हजार रुपये कमाते थे। चिकोरी की एक बीघा में 40 क्विंटल पैदावार होती है और 35 से 40 हजार रुपये मिल जाते हैं।
अहम बात है कि कड़वी होने की वजह से फसल को गाय, पक्षी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। चिकोरी को प्लांटों में बेच दिया जाता है। दिनेश ने बताया कि चॉकलेट और कॉफी की कंपनियां इसे विदेश में निर्यात करती हैं। कम लागत में अधिक मुनाफा देखकर क्षेत्र के कई किसानों ने इसकी खेती शुरू कर दी है। इसे देखकर कई कंपनियों ने एका क्षेत्र में प्लांट भी लगा दिए हैं।
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इस तरह होता है चिकोरी का इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक डाॅ. ओमकार ने बताया कि चिकोरी का प्रयोग कैंसर की औषधि में भी होता है। कॉफी के विकल्प के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। इसमें कैफीन नहीं होता है और स्वाद चॉकलेट जैसा होता है। ठंडे देशों में चिकोरी पाउडर ज्यादा इस्तेमाल होता है।
एक बीघा में 80 से 100 ग्राम लगता है बीज
चिकोरी के लिए फ्रांस और इटली से बीज आता है। इसकी कीमत करीब 7500 हजार रुपये प्रति किलोग्राम होती है। एक बीघा में 80 से 100 ग्राम बीज लगता है। जो 40 से 45 क्विंटल चिकोरी का उत्पादन करता है। किसान दिनेश ने बताया कि प्लांट संचालक चिकोरी उत्पादन से पूर्व ही 750 रुपये क्विंटल का भाव तय कर जाते हैं।
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एका गांव हरपाल निवासी किसान दिनेश चंद्र का प्रयास उन्हें मालामाल कर रहा है। परंपरागत खेती को छोड़कर दिनेश ने तीन साल पहले चिकोरी की खेती शुरू की। वह बदायूं, एटा में हो रही चिकोरी की फसल से प्रभावित हुए। उन्होंने इटली, फ्रांस से बीज मंगाकर खेती करना शुरु कर दी। दिनेश बताते हैं कि एक बीघा में गेहूं की फसल में 10 हजार रुपये कमाते थे। चिकोरी की एक बीघा में 40 क्विंटल पैदावार होती है और 35 से 40 हजार रुपये मिल जाते हैं।
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अहम बात है कि कड़वी होने की वजह से फसल को गाय, पक्षी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। चिकोरी को प्लांटों में बेच दिया जाता है। दिनेश ने बताया कि चॉकलेट और कॉफी की कंपनियां इसे विदेश में निर्यात करती हैं। कम लागत में अधिक मुनाफा देखकर क्षेत्र के कई किसानों ने इसकी खेती शुरू कर दी है। इसे देखकर कई कंपनियों ने एका क्षेत्र में प्लांट भी लगा दिए हैं।
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इस तरह होता है चिकोरी का इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक डाॅ. ओमकार ने बताया कि चिकोरी का प्रयोग कैंसर की औषधि में भी होता है। कॉफी के विकल्प के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। इसमें कैफीन नहीं होता है और स्वाद चॉकलेट जैसा होता है। ठंडे देशों में चिकोरी पाउडर ज्यादा इस्तेमाल होता है।
एक बीघा में 80 से 100 ग्राम लगता है बीज
चिकोरी के लिए फ्रांस और इटली से बीज आता है। इसकी कीमत करीब 7500 हजार रुपये प्रति किलोग्राम होती है। एक बीघा में 80 से 100 ग्राम बीज लगता है। जो 40 से 45 क्विंटल चिकोरी का उत्पादन करता है। किसान दिनेश ने बताया कि प्लांट संचालक चिकोरी उत्पादन से पूर्व ही 750 रुपये क्विंटल का भाव तय कर जाते हैं।