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Firozabad News: झोलाछाप नींद की दवा देकर तत्काल दे रहे आराम
Sat, 28 Sep 2024 12:57 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sat, 28 Sep 2024 12:57 AM IST
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फिरोजाबाद। गांव में हकीम बनकर बैठे झोलाछाप मरीजों को तुरंत लाभ देने के चक्कर में उनकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। दर्द, बुखार और अन्य बीमारियों में झोलाछाप नींद की दवा दे देते हैं। इससे मरीज को तुरंत नींद आ जाती है और वह आराम महसूस करता है। लेकिन मरीज को इस दवा की आदत पड़ रही है। दवा न मिलने पर मरीज मानसिक रोग का शिकार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में 100 में से 10 मरीज इस समस्या से पीड़ित आ रहे हैं। मरीज की काउंसिलिंग करने पर पता चल रहा है बुखार में चिकित्सक ने नींद की दवा दी थी।झोलाछाप के इलाज से आए दिन मरीजों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन, यह झोलाछाप छोटी बीमारी में जल्द राहत देने के चक्कर में बड़ी बीमारी परोस रहे हैं। झोलाछाप जिस बीमारी का इलाज कर रहे हैं, वह उसमें तुरंत राहत के लिए नींंद की दवा दे रहे हैं। इसका खुलासा मेडिकल कॉलेज की मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में अनिद्रा, दौरे पड़ने, कमजोर एकाग्रता, श्वसन अवसाद आदि समस्या लेकर इलाज कराने आ रहे मरीजों की काउंसिलिंग में हो रहा है।
मानसिक रोग विभाग में इंटर्नशिप कर रही गौरी राजौरिया ने 50 से ज्यादा मरीजों की काउंसिलिंग की। बताया कि जिन मरीजों में समस्या थी, वह एल्प्रेक्स दवा तीन से चार महीने से खा रहे हैं। बुखार आने पर झोलाछाप ने यह दवा दी थी। इसके बाद दवा की आदत पड़ने पर दवा के बिना चैन नहीं पड़ता। मरीजों ने बताया कि मरीज को यह दवा खाने के बाद तुरंत नींद आ जाती है। अब इस दवा के बिना मरीज नींद नहीं ले पाते हैं।
लंबे समय तक नींद की दवा लेने के ये हैं नुकसान
इनमें भूलने की बीमारी, कमजोर एकाग्रता, अस्पष्ट वाणी, उनींदापन, चक्कर आना, थकान, चक्कर आना, चक्कर आना, त्वचा पर लाल चकत्ते, कब्ज, श्वसन अवसाद, आत्महत्या के विचार और मांसपेशियों की कमजोरी शामिल हैं।
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-झोलाछाप जल्द आराम के चक्कर में नींद की दवा दे रहे हैं। जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। कुछ दिन दवा खाने के बाद मरीज इनका आदी हो जाता है। 100 मरीजों की ओपीडी में 10 मरीज इस परेशानी से आ रहे हैं। यह दवा लंबे समय तक खाने से भूलने की बीमारी, अनिद्रा, कमजोर एकाग्रता आदि हो रही है। इन मरीजों की काउंसिलिंग कराने के साथ दवा दे इलाज कर रहे हैं।
डाॅ. अरुशिखा सिंह, मेडिकल कॉलेज
-झोलाछापों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। हम लोगों को भी जागरूक करते हैं कि वह डिग्रीधारक चिकित्सक से ही इलाज कराएं। या सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने के लिए जाएं।
डाॅ. बीडी अग्रवाल, एसीएमओ
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मानसिक रोग विभाग में इंटर्नशिप कर रही गौरी राजौरिया ने 50 से ज्यादा मरीजों की काउंसिलिंग की। बताया कि जिन मरीजों में समस्या थी, वह एल्प्रेक्स दवा तीन से चार महीने से खा रहे हैं। बुखार आने पर झोलाछाप ने यह दवा दी थी। इसके बाद दवा की आदत पड़ने पर दवा के बिना चैन नहीं पड़ता। मरीजों ने बताया कि मरीज को यह दवा खाने के बाद तुरंत नींद आ जाती है। अब इस दवा के बिना मरीज नींद नहीं ले पाते हैं।
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लंबे समय तक नींद की दवा लेने के ये हैं नुकसान
इनमें भूलने की बीमारी, कमजोर एकाग्रता, अस्पष्ट वाणी, उनींदापन, चक्कर आना, थकान, चक्कर आना, चक्कर आना, त्वचा पर लाल चकत्ते, कब्ज, श्वसन अवसाद, आत्महत्या के विचार और मांसपेशियों की कमजोरी शामिल हैं।
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-झोलाछाप जल्द आराम के चक्कर में नींद की दवा दे रहे हैं। जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। कुछ दिन दवा खाने के बाद मरीज इनका आदी हो जाता है। 100 मरीजों की ओपीडी में 10 मरीज इस परेशानी से आ रहे हैं। यह दवा लंबे समय तक खाने से भूलने की बीमारी, अनिद्रा, कमजोर एकाग्रता आदि हो रही है। इन मरीजों की काउंसिलिंग कराने के साथ दवा दे इलाज कर रहे हैं।
डाॅ. अरुशिखा सिंह, मेडिकल कॉलेज
-झोलाछापों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। हम लोगों को भी जागरूक करते हैं कि वह डिग्रीधारक चिकित्सक से ही इलाज कराएं। या सरकारी अस्पतालों में उपचार कराने के लिए जाएं।
डाॅ. बीडी अग्रवाल, एसीएमओ