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Firozabad News: 8 साल से हॉकी के नहीं मिले कोच
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फिरोजाबाद। हॉकी इंडिया सात नवंबर को 100 वर्ष पूरे कर रहा है और पूरे देश में शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। लेकिन जिले में हॉकी खेल में युवाओं की प्रतिभा को संवारने का काम ठहरा हुआ है। दाऊदयाल स्टेडियम में समय-समय पर आयोजित होने वाली हॉकी प्रतियोगिताओं के बावजूद स्थानीय खिलाड़ी खेल नहीं निखार पा रहे हैं। वजह है कि 8 साल से प्रशिक्षक (कोच) नहीं है।
8 साल पूर्व हॉकी कोच की स्टेडियम में तैनाती थी। लेकिन कोच का ट्रांसफर होने के बाद बाद आज तक दूसरे की तैनाती नहीं हो सकी है। समय-समय पर हॉकी प्रतियोगिताएं कराने के लिए बमुश्किल टीम ढूंढी जाती है। कई बार तो दूसरे खेल के खिलाड़ियों को हॉकी पकड़ाकर प्रतियोगिता की औपचारिकताएं निभाई जाती है। जिले के अधिकतर स्कूलों में हॉकी टीम तक नहीं है।
- हॉकी कोच की तैनाती स्टेडियम में नहीं है। हम शासन से मांग करेंगे कि हॉकी कोच तैनात हो। इससे खिलाड़ियों की प्रतिभा निखर सके। हॉकी कोच के अभाव में खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाते हैं।
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मुकेश कुमार, जिला क्रीड़ाधिकारी
- प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेना अच्छा लगता है, लेकिन नियमित मार्गदर्शन और प्रशिक्षण न मिलने के कारण आत्मविश्वास कम हो गया है। अगर हमारे पास स्थायी कोच और नियमित टीम होती, तो हम अपनी प्रतिभा को बेहतर ढंग से निखार सकते थे।
अर्पित जैन, युवा
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8 साल पूर्व हॉकी कोच की स्टेडियम में तैनाती थी। लेकिन कोच का ट्रांसफर होने के बाद बाद आज तक दूसरे की तैनाती नहीं हो सकी है। समय-समय पर हॉकी प्रतियोगिताएं कराने के लिए बमुश्किल टीम ढूंढी जाती है। कई बार तो दूसरे खेल के खिलाड़ियों को हॉकी पकड़ाकर प्रतियोगिता की औपचारिकताएं निभाई जाती है। जिले के अधिकतर स्कूलों में हॉकी टीम तक नहीं है।
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- हॉकी कोच की तैनाती स्टेडियम में नहीं है। हम शासन से मांग करेंगे कि हॉकी कोच तैनात हो। इससे खिलाड़ियों की प्रतिभा निखर सके। हॉकी कोच के अभाव में खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाते हैं।
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मुकेश कुमार, जिला क्रीड़ाधिकारी
- प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेना अच्छा लगता है, लेकिन नियमित मार्गदर्शन और प्रशिक्षण न मिलने के कारण आत्मविश्वास कम हो गया है। अगर हमारे पास स्थायी कोच और नियमित टीम होती, तो हम अपनी प्रतिभा को बेहतर ढंग से निखार सकते थे।
अर्पित जैन, युवा