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Firozabad News: नौ में से छह ब्लॉक अत्यधिक संवेदनशील, शहरी क्षेत्र में 67 मीटर तक नीचे गिरा पानी

Fri, 19 Jun 2026 02:39 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2026 02:39 AM IST
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firozabad news land water dark zone
फोटो 19देखभाल में लापरवाही के कारण जर्जर स्थिति में विकास भवन स्थित वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम  - फोटो : Samvad
फिरोजाबाद। जिले में भूगर्भ जल स्तर को मापने और जल संरक्षण की स्थिति को परखने के लिए केंद्रीय भूगर्भ संरक्षण विभाग की ओर से मानसून पूर्व का विशेष सर्वे शुरू कर दिया है। लेकिन, इस अभियान में खुद जिला प्रशासन से जुड़े कई बड़े विभाग और सुहागनगरी के कांच व चूड़ी कारखानेदार हीलाहवाली कर रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में स्थापित किए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का डाटा नहीं दे रहे हैं।
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ताजा आंकड़ों के अनुसार, ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के तहत आने वाले जिले के नौ में से छह ब्लॉक भूगर्भ जल स्तर के लिहाज से बेहद नाजुक और संवेदनशील स्थिति में पहुंच चुके हैं। इनमें फिरोजाबाद, टूंडला, हाथवंत, नारखी, अरांव और शिकोहाबाद (आंशिक) शामिल हैं। इन सभी ब्लॉकों में भूगर्भ जल स्तर औसतन 20 मीटर से भी ज्यादा नीचे जा चुका है।
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शहरी क्षेत्र में 30 से 67 मीटर नीचे पहुंचा जलस्तर

वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम के शहरी क्षेत्र में पानी की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां अलग-अलग इलाकों में भूगर्भ जलस्तर 30 मीटर से लेकर रिकॉर्ड 67 मीटर तक की गहराई में चला गया है। इस संकट के बावजूद नगर निगम क्षेत्र में संचालित कांच एवं चूड़ी इकाइयों, निकाय प्रशासन, पंचायती राज विभाग और कृषि विभाग की ओर से अपने परिसरों में लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की रिपोर्ट केंद्रीय भूगर्भ संरक्षण विभाग आगरा को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
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विकास भवन से लेकर तहसील तक, झाड़ियों और कचरे में तब्दील हुए सिस्टम
जिले में वर्षा जल संचयन की जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी और गैर-सरकारी उपक्रमों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कागजों और कंक्रीट में तो तैयार कर दिए गए, लेकिन अफसर उनकी देखभाल करना भूल गए। वर्तमान में विकास भवन परिसर, सदर ब्लॉक, जिला उद्योग केंद्र, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और तहसील सदर में स्थापित करोड़ों के वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कचरे, गंदगी और झाड़ियों के चलते पूरी तरह निष्क्रिय और चोक पड़े हैं।


बयान

बरसात से पहले जिले में भूगर्भ जल स्तर के मापन (सर्वे) का काम शुरू कर दिया गया है। चूंकि भूगर्भ जल संचयन के लिए बनाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली के आधार पर ही जलस्तर की सही जांच और मापन होता है, इसलिए सभी संबंधित विभागों से डेटा मांगा गया है। कई बार आधिकारिक सूचना दिए जाने के बावजूद कुछ विभागों और औद्योगिक इकाइयों ने अभी तक डेटा उपलब्ध नहीं कराया है, जो कि बेहद चिंताजनक है।
- नील नवरत्न, हाइड्रोलोजिस्ट, भूगर्भ जल संरक्षण विभाग, आगरा
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