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Firozabad News: अमेरिकी रुख में नरमी ने जगाई, एसपीएस समझौता की उम्मीद
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कांच आयटम।
फिरोजाबाद। बीते दिनों में भारत के प्रति अमेरिका के रुख में नरमी दिखी है। अमेरिका के बदले रुख को भांप शहर के कांच कांच हस्तशिल्पियों ने केंद्र से जीएसपी (जनरल सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज) समझौता के लिए पुख्ता प्रयास किए जाने की मांग है। 50 प्रतिशत टैरिफ चलते ठप कांच कारोबार को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
50 प्रतिशत टैरिफ के कारण सालों में अमेरिकी बाजार में कांच हस्तशिल्प आयटम कारोबार पूरी तरह से ठप है। सात अगस्त से टैरिफ व्यवस्था लागू होने के बाद अमेरिकी ग्राहकों ने करोड़ों रुपये की लागत वाले कांच हस्तशिल्प आयटम के आर्डरों को स्थगित कर दिया है। इस कारण से फिरोजाबाद की कांच हस्तशिल्प इकाइयों में कामकाज पटरी से उतार गया है। वहीं, कई दिनों से भारत के प्रति अमेरिकी रुख में बदलाव भी दिखा है। भारत के प्रति अमेरिका नरम रुख अपनाने के बाद कांच उद्योग जगत में जल्द समाधान की उम्मीद बंधी हैं। कांच हस्तशिल्पियों के अनुसार भारत सरकार बीते 2023 में हुए समझौता के तहत अमेरिका पर जीएसपी शर्ताें के अनुपालन को जरूरी प्रयास करे।
क्या है जीएसपी समझौता
जीएसपी शर्त के मुताबिक विकसित देश अन्य (अल्प विकसित) देशों को टैरिफ प्रणाली में छूट देते हैं। जीएसपी के तहत सबसे खास बात है कि अमेरिका व उसके मित्र देश गरीब व अल्प विकसित देशों को जीएसपी (सामान्य वरियता प्रणाली) कारोबारी तरक्की को जरूरी उपायों पर जोर और गरीबी से बाहर निकालने को जरूरी उपाय करेंगे।
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कांच उद्यमियों की बात-
केंद्र सरकार संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि वाशिंगटन डीसी के जरिये जीएसपी शर्तों को लागू कराने की पहल करे। जीएसपी शर्तें लागू होने की स्थिति में कांच हस्तशिल्प आयटम अमेरिका निर्यात आसान होगा।
सरवर हुसैन
- अमेरिकी टैरिफ के कारण हो रहे नुकसान की भरपाई जीएसपी समझौता के जरिये हो सकती है। केंद्र सरकार इस पर ध्यान दे।क्योंकि हाल ही अमेरिका का भारत के प्रति रूख नरम हुआ है।
दीपक जैन
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ग्लास मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन ने भेजा पत्र
जीएसपी लागू करने के लिए कांच निर्यातकों के संगठन ग्लास मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश बंसल टोनी, सरवर हुसैन,राजेद्र गुप्ता,गगन सचदेवा आदि ने एक संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र जीएसपी प्रतिनिधि को भेजा है।
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50 प्रतिशत टैरिफ के कारण सालों में अमेरिकी बाजार में कांच हस्तशिल्प आयटम कारोबार पूरी तरह से ठप है। सात अगस्त से टैरिफ व्यवस्था लागू होने के बाद अमेरिकी ग्राहकों ने करोड़ों रुपये की लागत वाले कांच हस्तशिल्प आयटम के आर्डरों को स्थगित कर दिया है। इस कारण से फिरोजाबाद की कांच हस्तशिल्प इकाइयों में कामकाज पटरी से उतार गया है। वहीं, कई दिनों से भारत के प्रति अमेरिकी रुख में बदलाव भी दिखा है। भारत के प्रति अमेरिका नरम रुख अपनाने के बाद कांच उद्योग जगत में जल्द समाधान की उम्मीद बंधी हैं। कांच हस्तशिल्पियों के अनुसार भारत सरकार बीते 2023 में हुए समझौता के तहत अमेरिका पर जीएसपी शर्ताें के अनुपालन को जरूरी प्रयास करे।
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क्या है जीएसपी समझौता
जीएसपी शर्त के मुताबिक विकसित देश अन्य (अल्प विकसित) देशों को टैरिफ प्रणाली में छूट देते हैं। जीएसपी के तहत सबसे खास बात है कि अमेरिका व उसके मित्र देश गरीब व अल्प विकसित देशों को जीएसपी (सामान्य वरियता प्रणाली) कारोबारी तरक्की को जरूरी उपायों पर जोर और गरीबी से बाहर निकालने को जरूरी उपाय करेंगे।
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कांच उद्यमियों की बात-
केंद्र सरकार संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि वाशिंगटन डीसी के जरिये जीएसपी शर्तों को लागू कराने की पहल करे। जीएसपी शर्तें लागू होने की स्थिति में कांच हस्तशिल्प आयटम अमेरिका निर्यात आसान होगा।
सरवर हुसैन
- अमेरिकी टैरिफ के कारण हो रहे नुकसान की भरपाई जीएसपी समझौता के जरिये हो सकती है। केंद्र सरकार इस पर ध्यान दे।क्योंकि हाल ही अमेरिका का भारत के प्रति रूख नरम हुआ है।
दीपक जैन
ग्लास मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन ने भेजा पत्र
जीएसपी लागू करने के लिए कांच निर्यातकों के संगठन ग्लास मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश बंसल टोनी, सरवर हुसैन,राजेद्र गुप्ता,गगन सचदेवा आदि ने एक संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र जीएसपी प्रतिनिधि को भेजा है।