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Firozabad News: 13 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में चारों अभियुक्त बरी
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फिरोजाबाद। एडीजे कोर्ट ने लगभग 13 साल पुराने जानलेवा हमले और आयुध अधिनियम के मुकदमे में नामजद चारों अभियुक्तों को साक्ष्यों व गवाही के अभाव में निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है ।
अभियुक्त मुकुट सिंह, बालकराम, सौरभ कुमार उर्फ करू, और वरूण कुमार उर्फ रिंकू निवासी दूधाराम, सिरसागंज के खिलाफ थाना सिरसागंज में चन्द्रकांत की तहरीर पर केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि 18 मई 2012 की शाम अभियुक्तों ने उनके पिता कमल सिंह और ताऊ के लड़के नरेन्द्र सिंह पर रायफल व तमंचे से जान से मारने की नीयत से गोली चलाई थी। कमल सिंह के पेट में और नरेंद्र सिंह के मुंह में गोली लगी थी। गांव के काफी लोग मौके पर जुटे तो आरोपी उनको मरा समझकर भाग गए। पुलिस ने जांच कर इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने ट्रायल में पाया कि घटना में घायल हुए कमल सिंह और नरेन्द्र सिंह ने अपने बयान में मुकदमे का समर्थन नहीं किया। नरेन्द्र सिंह ने गवाही दी कि हमलावर मुंह पर कपड़ा बांधे हुए थे, इसलिए वे गोली चलाने वालों को देख नहीं पाए। चन्द्रकांत ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने गोली मारते हुए नहीं देखा और रिपोर्ट गांव वालों के कहने पर लिखवाई थी। अन्य चश्मदीद गवाह गीतांजली और मलिखान सिंह, जो घायलों के परिवार से थे, उन्होंने भी प्रकरण का समर्थन नहीं किया। इस आधार पर कोर्ट ने मुकुट सिंह, बालकराम, सौरभ कुमार उर्फ करू और वरूण कुमार उर्फ रिंकू को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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अभियुक्त मुकुट सिंह, बालकराम, सौरभ कुमार उर्फ करू, और वरूण कुमार उर्फ रिंकू निवासी दूधाराम, सिरसागंज के खिलाफ थाना सिरसागंज में चन्द्रकांत की तहरीर पर केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि 18 मई 2012 की शाम अभियुक्तों ने उनके पिता कमल सिंह और ताऊ के लड़के नरेन्द्र सिंह पर रायफल व तमंचे से जान से मारने की नीयत से गोली चलाई थी। कमल सिंह के पेट में और नरेंद्र सिंह के मुंह में गोली लगी थी। गांव के काफी लोग मौके पर जुटे तो आरोपी उनको मरा समझकर भाग गए। पुलिस ने जांच कर इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने ट्रायल में पाया कि घटना में घायल हुए कमल सिंह और नरेन्द्र सिंह ने अपने बयान में मुकदमे का समर्थन नहीं किया। नरेन्द्र सिंह ने गवाही दी कि हमलावर मुंह पर कपड़ा बांधे हुए थे, इसलिए वे गोली चलाने वालों को देख नहीं पाए। चन्द्रकांत ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने गोली मारते हुए नहीं देखा और रिपोर्ट गांव वालों के कहने पर लिखवाई थी। अन्य चश्मदीद गवाह गीतांजली और मलिखान सिंह, जो घायलों के परिवार से थे, उन्होंने भी प्रकरण का समर्थन नहीं किया। इस आधार पर कोर्ट ने मुकुट सिंह, बालकराम, सौरभ कुमार उर्फ करू और वरूण कुमार उर्फ रिंकू को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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