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सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद देने की तैयारी
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फिरोजाबाद। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद देने की तैयारी है। कुटीर उद्योग के जरिए महिलाओं की आजीविका में वृद्घि एवं सदस्यों की संख्या बढ़ाने वाले 130 समूहों की सूची तैयार की गई है।
लगातार तीन वर्ष से सक्रिय, समूह की आय में बढ़ोत्तरी करने एवं सदस्यों की संख्या में इजाफा करने वाली महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को सरकार आर्थिक मदद के तौर पर रिवाल्विंग फंड देगी। दस-दस हजार रूपये की आर्थिक मदद के लिए जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के 130 स्वयं सहायता समूहों को चिन्ह्ति किया गया है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत संचालित इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही नहीं मनरेगा के तहत होने वाले विभिन्न कार्यों में भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
बढे़ंगे कुटीर उद्योग
शासन-प्रशासन का प्रयास है कि ग्रामीण महिलाओं की आजीविका में वृद्घि हो। इसके लिए महिलाओं को स्वरोजगार कार्यक्रमों एवं कुटीर उद्योग स्थापना जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि वे परंपरागत दरी एवं चटाई बनाने, लकड़ी के खेल-खिलौना एवं डलिया निर्माण, कांच चूड़ी पर पच्चीकारी, स्कूल ड्रेस निर्माण एवं पलंग बुनाई जैसे कार्यों के जरिए आमदनी बढ़ा सकें। इसके लिए महिलाओं अथवा समूहों को बैंक अथवा शासकीय योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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लगातार तीन वर्ष से सक्रिय, समूह की आय में बढ़ोत्तरी करने एवं सदस्यों की संख्या में इजाफा करने वाली महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को सरकार आर्थिक मदद के तौर पर रिवाल्विंग फंड देगी। दस-दस हजार रूपये की आर्थिक मदद के लिए जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के 130 स्वयं सहायता समूहों को चिन्ह्ति किया गया है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत संचालित इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही नहीं मनरेगा के तहत होने वाले विभिन्न कार्यों में भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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बढे़ंगे कुटीर उद्योग
शासन-प्रशासन का प्रयास है कि ग्रामीण महिलाओं की आजीविका में वृद्घि हो। इसके लिए महिलाओं को स्वरोजगार कार्यक्रमों एवं कुटीर उद्योग स्थापना जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि वे परंपरागत दरी एवं चटाई बनाने, लकड़ी के खेल-खिलौना एवं डलिया निर्माण, कांच चूड़ी पर पच्चीकारी, स्कूल ड्रेस निर्माण एवं पलंग बुनाई जैसे कार्यों के जरिए आमदनी बढ़ा सकें। इसके लिए महिलाओं अथवा समूहों को बैंक अथवा शासकीय योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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