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Firozabad News: आजादी के 75 साल बाद भी लाइनपार ग्रामीण अंचल में शिक्षा के अभाव में 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़कर रही छात्राएं

Fri, 11 Aug 2023 11:48 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Fri, 11 Aug 2023 11:48 PM IST
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Even after 75 years of independence, girl students left studies after 12th due to lack of education in Linepar rural area.
टूंडला। आजादी के 75 वर्ष बाद भी लाइनपार ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की लौ बेहद मंद है। परिषदीय स्कूलों की जर्जर व तोड़े गए भवनों को लेकर बच्चे खुले में पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं क्षेत्र में महाविद्यालय तो दूर की बात एक सहायता प्राप्त काॅलेज के अलावा एक भी इंटर कालेज नहीं हैं। इसके चलते अधिकतर लड़कियों की शिक्षा हाईस्कूल व इंटर के बाद ही समाप्त हो जाती है। इस क्षेत्र में शिक्षा एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
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देश को आजाद हुए 75 वर्ष का लंबा सफर बीत चुका है। पिछले वर्ष हम आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना चुके हैं। इस बार मेरी माटी मेरा देश महोत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं। हर क्षेत्र की माटी एकत्रित करके राजधानी भेजी जानी है। आजादी के 76वें दिवस को लेकर हर घर तिरंगा व अन्य कार्यक्रमों की तैयारियां चल रहीं हैं। इस बीच लाइनपार क्षेत्र की शिक्षा की बात की जाए धरातल पर कुछ नहीं है। आजादी के बाद इस क्षेत्र में उंगलियों पर गिनने लाइक ही प्राथमिक विद्यालय थे। उसके बाद कक्षा छह से आगे की शिक्षा के लिए टूंडला आना पड़ता था। फिर गांव एलई में वित्त पोषित कृषक इंटर कालेज की स्थापना हुई। तब से अब तक जमाना बदल गया, किंतु इस क्षेत्र के शिक्षा के हालात अधिक नहीं बदले। क्षेत्र में डिग्री काॅलेज तो छोड़िए एक भी इंटर कालेज नहीं है। कुछ जूनियर की मान्यता पर दूसरे स्कूलों से अटैच इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं चला रहे हैं। इन्हीं स्कूलों के माध्यम से क्षेत्र की खासकर लड़कियां इंटर तक शिक्षा ले पार रहीं हैं। उच्च शिक्षा के लिए उन्हें रिश्तेदारों की शरण अथवा शहर में रहकर शिक्षा लेनी पड़ रही है।
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हमें आजादी मिले 75 साल हो गए, किंतु लाइनपार क्षेत्र में शिक्षा के हालात नहीं बदले। क्षेत्र में एक इंटर काॅलेज के अलावा दूसरा काॅलेज नहीं है। आगे की पढ़ाई के लिए टूंडला 15 से 40 किमी जाना होता है। ऐसे में अधिकतर बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है।
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महेंद्र सिंह निषाद-समाज सेवी

टूंडला में कई इंटर कॉलेज हैं, सरकारी सहायता प्राप्त एक ही काॅलेज है, जिसमें भी विज्ञान, कॉमर्स वर्ग नहीं है। लड़के तो टूंडला, फिरोजाबाद, आगरा शिक्षा के लिए भेज दिए जाते हैं, किंतु बेटियों को अकेले भेजने में डर लगता है। ऐसे में अधिकतर 10वीं व 12वीं तक पढ़ाई हो पाती है।

रविशंकर-अभिभावक



इन गांव की छात्राएं नहीं ले पातीं 12वीं के आगे की शिक्षा

टूंडला। लाइनपार के नियामतपुर, घुरुकूआ, नगला नंदा, कुर्रा, नगला धीरी, नगला सिंघी, ऐलई, गढ़ी थानी, टीकरी, नगला उदय, बालमपुर, रसूलाबाद, गढ़ी साहब, गदलपुरा, बजहेरा, रामगढ़, नगला काले, कुतुकपुर, पीपरिया, ग्वारई, नगला राजपति, भीकनपुर, गढ़ी चेना, छांहरी, जटपुरा, गढ़ी भगवंत, नगला हरिश्चन्द्र, नगला केशों, अनवारा, केशोराय, जटई, नगला धीरी, बासदानी, धीरपुरा,लांघई, नगला बल्लू, नगला आम, प्रेमपुर, गढ़ी धर्मी आदि हैं।

बजहेरा से टूंडला 15 किमी दूर है। प्रतिदिन कॉलेज जाने में दिक्क़त होती थी। वहीं सुनसान रास्तों को लेकर डर रहता था। शमशाबाद बुआजी के घर रहकर एक कॉलेज में पढ़ाई कर रही हूं। मेरे साथ की कई छात्राओं की पढ़ाई बीच में ही छूट गई।

कमलेश कुमारी- बीएससी छात्रा

लाइनपार क्षेत्र में कोई भी डिग्री कालेज नहीं है। 12वीं कक्षा एक दूसरे से अटैच विद्यालय से किया है। आगे की पढ़ाई के लिए टूंडला 20 किमी दूर है। जाने को कोई साधन नहीं है। यमुना पार आगरा के बाजिदपुर स्थित महाविद्यालय में प्रवेश लिया है।

प्रीती कुमारी, पीपरिया बीए प्रथम वर्ष की छात्रा



किसी भी स्कूल की शिक्षा तभी बेहतर हो सकती है, जब स्कूल का वातावरण सही हो, स्कूल में शिक्षकों की तैनाती पर्याप्त हो और पढ़ाने वाले शिक्षक विषयवार हों।


दिनेशकांत दोषी, सेवानिवृत जीवविज्ञान प्रवक्ता



समय बदल रहा है, बदले परिवेश में शिक्षा का स्तर भी बदला जाना चाहिए। आज भी ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा का वातावरण वही है, जो वर्षों पूर्व था। सरकार को चाहिए कि सर्वे कराते हुए पर्याप्त स्कूल व शिक्षकों की तैनाती करनी चाहिए।

रामविलास उपाध्याय-सेवानिवृत प्रधानाचार्य
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