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ईटीपी न लगा तो कांच उद्योग पर भी लगेगा ब्रेक
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Thu, 23 Feb 2017 11:18 PM IST
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कांच फैक्ट्रियों से निकलने वाली गंदगी।
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सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद आने वाले दिनों में कांच उद्योग की मुश्किलें और बढ़ेंगी। कांच उद्योग में जल का अधिक प्रयोग करने वालीं इकाइयों को भी तीन माह में औद्योगिक प्रवाह शोधन संयंत्र (ईटीपी) लगाने होंगे। आदेश को नहीं मानने वालीं इकाइयां प्रभावित हो सकती हैं।
प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने औद्योगिक इकाइयों को तीन माह में ईटीपी लगाने का निर्देश दिए हैं। इसे नहीं मानने वाले उद्योगों को बंद करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सुहागनगरी के उद्यमियों में खलबली है। फिरोजाबाद में भी कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनमें कांच उत्पादों को धोने के लिए पानी का अधिक प्रयोग होता है। कांच इकाइयों से निकलने वाला गंदा एवं केमिकल युक्त इंडस्ट्रियल एरिया के मुख्य नालों में बहता है। यह दूषित पानी नाले के सहारे यमुना तक पहुंचता है। हालांकि कुछ इकाइयों में यह पानी रिसाइकल करने का भी इंतजाम है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी इकाइयों को सामूहिक रूप से नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
बाक्स--
कांच को चमकाने में प्रयोग होते हैं केमिकल
सुहागनगरी की कांच इकाइयों में बनी भट्ठियों में कांच को चमकाने के लिए विभिन्न प्रकार के केमिकल का प्रयोग होता है। इसमें बोरेक्स, सोडियम नाइट्रेट और डोलोमेट भट्ठी में डाले जाते हैं। केमिकल के साथ चिमनियों से निकलने वाले धुएं से भी प्रदूषण का मानक बढ़ता है।
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एनजीटी और हाईकोर्ट में भी चल रही प्रदूषण की लड़ाई
सुहागनगरी के कांच उद्योग से होने वाले प्रदूषण की लड़ाई एनजीटी से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ी जा रही है। नई दिल्ली की सेफ संस्था द्वारा बढ़ते प्रदूषण, बिना अनुमति इकाइयों के संचालन के मामले में दायर याचिका पर सितंबर 2015 से निरंतर सुनवाई हो रही है लेकिन अभी तक परिणाम नहीं निकल सका है। आगरा के उद्यमी संगठन नेशनल चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स द्वारा प्रदूषण के मामले में हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई है। इस पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
पकाईं भट्ठियां और लस्टर चूड़ी पर लगा ब्रेक
सुहागनगरी में बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती के बाद वर्षों से घनी आबादी के बीचोंबीच कोयले से संचालित एक सैकड़ा से अधिक पकाई भट्ठियाें पर सील लगा दी गई। वहीं एक दर्जन इकाइयों में लस्टर इकाइयां भी बंद हो गईं। लस्टर की चूड़ियों के लिए उद्यमियों ने काफी लड़ाई लड़ी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मुख्यालय के आदेश का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सामूहिक रूप से सभी इकाइयों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. विश्वनाथ शर्मा का कहना है कि मुख्यालय से आदेश मिलने के बाद सभी इकाइयों को नोटिस जारी किए जाएंगे। कांच इकाइयों में ईटीपी लगवाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हर हाल में पालन कराया जाएगा।
क्या कहते हैं उद्यमी
फिरोजाबाद के कांच उद्योग में पानी का अधिक प्रयोग नहीं होता है। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा समर्थन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कांच इकाइयों में शोधन संयंत्र लगवाए जाएंगे।
राजकुमार मित्तल
डायरेक्टर-यूपीजीएमएस
चूड़ी उद्योग से किसी तरह का जल प्रदूषण नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा। कांच इकाइयों से बाहर जाने वाले पानी को रोकने का पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
हनुमान प्रसाद गर्ग
डायरेक्टर-दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट
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प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने औद्योगिक इकाइयों को तीन माह में ईटीपी लगाने का निर्देश दिए हैं। इसे नहीं मानने वाले उद्योगों को बंद करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सुहागनगरी के उद्यमियों में खलबली है। फिरोजाबाद में भी कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनमें कांच उत्पादों को धोने के लिए पानी का अधिक प्रयोग होता है। कांच इकाइयों से निकलने वाला गंदा एवं केमिकल युक्त इंडस्ट्रियल एरिया के मुख्य नालों में बहता है। यह दूषित पानी नाले के सहारे यमुना तक पहुंचता है। हालांकि कुछ इकाइयों में यह पानी रिसाइकल करने का भी इंतजाम है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी इकाइयों को सामूहिक रूप से नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
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कांच को चमकाने में प्रयोग होते हैं केमिकल
सुहागनगरी की कांच इकाइयों में बनी भट्ठियों में कांच को चमकाने के लिए विभिन्न प्रकार के केमिकल का प्रयोग होता है। इसमें बोरेक्स, सोडियम नाइट्रेट और डोलोमेट भट्ठी में डाले जाते हैं। केमिकल के साथ चिमनियों से निकलने वाले धुएं से भी प्रदूषण का मानक बढ़ता है।
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एनजीटी और हाईकोर्ट में भी चल रही प्रदूषण की लड़ाई
सुहागनगरी के कांच उद्योग से होने वाले प्रदूषण की लड़ाई एनजीटी से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ी जा रही है। नई दिल्ली की सेफ संस्था द्वारा बढ़ते प्रदूषण, बिना अनुमति इकाइयों के संचालन के मामले में दायर याचिका पर सितंबर 2015 से निरंतर सुनवाई हो रही है लेकिन अभी तक परिणाम नहीं निकल सका है। आगरा के उद्यमी संगठन नेशनल चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स द्वारा प्रदूषण के मामले में हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई है। इस पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
पकाईं भट्ठियां और लस्टर चूड़ी पर लगा ब्रेक
सुहागनगरी में बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती के बाद वर्षों से घनी आबादी के बीचोंबीच कोयले से संचालित एक सैकड़ा से अधिक पकाई भट्ठियाें पर सील लगा दी गई। वहीं एक दर्जन इकाइयों में लस्टर इकाइयां भी बंद हो गईं। लस्टर की चूड़ियों के लिए उद्यमियों ने काफी लड़ाई लड़ी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मुख्यालय के आदेश का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सामूहिक रूप से सभी इकाइयों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. विश्वनाथ शर्मा का कहना है कि मुख्यालय से आदेश मिलने के बाद सभी इकाइयों को नोटिस जारी किए जाएंगे। कांच इकाइयों में ईटीपी लगवाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हर हाल में पालन कराया जाएगा।
क्या कहते हैं उद्यमी
फिरोजाबाद के कांच उद्योग में पानी का अधिक प्रयोग नहीं होता है। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा समर्थन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कांच इकाइयों में शोधन संयंत्र लगवाए जाएंगे।
राजकुमार मित्तल
डायरेक्टर-यूपीजीएमएस
चूड़ी उद्योग से किसी तरह का जल प्रदूषण नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा। कांच इकाइयों से बाहर जाने वाले पानी को रोकने का पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
हनुमान प्रसाद गर्ग
डायरेक्टर-दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट